BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Monday, March 10, 2008

विवाहेतर संबंधों पर झूठ स्वीकार्य

विवाहेतर संबंधों पर झूठ स्वीकार्य










BBC BBC

इटली की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि महिलाएँ अपने विवाहेतर संबंधों के बारे में झूठ बोल सकती हैं, फिर वह चाहे न्यायिक जाँच का मामला ही क्यों न हो। अदालत ने तर्क दिया है कि महिलाएँ अपने सम्मान की रक्षा के लिए ऐसा कर सकती हैं।

ये फैसला एक 48 वर्षीय महिला कार्ला की अपील स्वीकार करते समय सुनाया गया है, जिसे पुलिस को झूठा बयान देने के लिए दोषी ठहराया गया था। मामला कार्ला के अपने प्रेमी गियोवानी को अपना मोबाइल फोन देने का था।

महिला के प्रेमी गियोवानी ने उस फोन का इस्तेमाल महिला के पति विनसेंजो को कॉल करके उसका अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया। कार्ला और उनके पति विनसेंजो के संबंध बिगड़े हुए थे।

कानून का उल्लंघन नहीं किया : पहले स्थानीय अदालत में मामला चला और उस समय कार्ला के प्रेमी गियोवानी को गालियाँ देने का दोषी पाया गया। साथ ही कार्ला को इस अपराध में उनका साथ देने का दोषी पाया गया था।

लेकिन कार्ला की अपील सुनने वाली अदालत ने ये मानने से इनकार कर दिया कि महिला ने कानून का उल्लंघन किया है। अदालत का कहना था कि यदि विवाहेतर संबंध के छिपाने के लिए सच्चाई से कुछ छेड़छाड़ की भी गई तो ऐसा करना कानूनी रूप से वैध था।

अदालत का ये भी मानना था कि ऐसा न किया गया होता तो इससे दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बीच महिला के सम्मान को क्षति पहुँचती। फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये आदेश पुरुषों पर भी भी इसी तरह से लागू होगा या नहीं।






विवाहेतर संबंधों पर झूठ स्वीकार्य










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इटली की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि महिलाएँ अपने विवाहेतर संबंधों के बारे में झूठ बोल सकती हैं, फिर वह चाहे न्यायिक जाँच का मामला ही क्यों न हो। अदालत ने तर्क दिया है कि महिलाएँ अपने सम्मान की रक्षा के लिए ऐसा कर सकती हैं।

ये फैसला एक 48 वर्षीय महिला कार्ला की अपील स्वीकार करते समय सुनाया गया है, जिसे पुलिस को झूठा बयान देने के लिए दोषी ठहराया गया था। मामला कार्ला के अपने प्रेमी गियोवानी को अपना मोबाइल फोन देने का था।

महिला के प्रेमी गियोवानी ने उस फोन का इस्तेमाल महिला के पति विनसेंजो को कॉल करके उसका अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया। कार्ला और उनके पति विनसेंजो के संबंध बिगड़े हुए थे।

कानून का उल्लंघन नहीं किया : पहले स्थानीय अदालत में मामला चला और उस समय कार्ला के प्रेमी गियोवानी को गालियाँ देने का दोषी पाया गया। साथ ही कार्ला को इस अपराध में उनका साथ देने का दोषी पाया गया था।

लेकिन कार्ला की अपील सुनने वाली अदालत ने ये मानने से इनकार कर दिया कि महिला ने कानून का उल्लंघन किया है। अदालत का कहना था कि यदि विवाहेतर संबंध के छिपाने के लिए सच्चाई से कुछ छेड़छाड़ की भी गई तो ऐसा करना कानूनी रूप से वैध था।

अदालत का ये भी मानना था कि ऐसा न किया गया होता तो इससे दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बीच महिला के सम्मान को क्षति पहुँचती। फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये आदेश पुरुषों पर भी भी इसी तरह से लागू होगा या नहीं।





विवाहेतर संबंधों पर झूठ स्वीकार्य










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इटली की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि महिलाएँ अपने विवाहेतर संबंधों के बारे में झूठ बोल सकती हैं, फिर वह चाहे न्यायिक जाँच का मामला ही क्यों न हो। अदालत ने तर्क दिया है कि महिलाएँ अपने सम्मान की रक्षा के लिए ऐसा कर सकती हैं।

ये फैसला एक 48 वर्षीय महिला कार्ला की अपील स्वीकार करते समय सुनाया गया है, जिसे पुलिस को झूठा बयान देने के लिए दोषी ठहराया गया था। मामला कार्ला के अपने प्रेमी गियोवानी को अपना मोबाइल फोन देने का था।

महिला के प्रेमी गियोवानी ने उस फोन का इस्तेमाल महिला के पति विनसेंजो को कॉल करके उसका अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया। कार्ला और उनके पति विनसेंजो के संबंध बिगड़े हुए थे।

कानून का उल्लंघन नहीं किया : पहले स्थानीय अदालत में मामला चला और उस समय कार्ला के प्रेमी गियोवानी को गालियाँ देने का दोषी पाया गया। साथ ही कार्ला को इस अपराध में उनका साथ देने का दोषी पाया गया था।

लेकिन कार्ला की अपील सुनने वाली अदालत ने ये मानने से इनकार कर दिया कि महिला ने कानून का उल्लंघन किया है। अदालत का कहना था कि यदि विवाहेतर संबंध के छिपाने के लिए सच्चाई से कुछ छेड़छाड़ की भी गई तो ऐसा करना कानूनी रूप से वैध था।

अदालत का ये भी मानना था कि ऐसा न किया गया होता तो इससे दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बीच महिला के सम्मान को क्षति पहुँचती। फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये आदेश पुरुषों पर भी भी इसी तरह से लागू होगा या नहीं।

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