| Monday, 06 February 2012 09:47 |
| उमा भट्ट जनगणना में भाषाओं की गणना की जिस प्रकार जाती रही है, उससे मातृभाषाओं का महत्त्व कम होता जा रहा है। सरकार अलग से भाषाओं का सर्वेक्षण कराने की आवश्यकता नहीं समझती। दो वर्ष पूर्व वडोदरा में भाषा संगम में भाषा वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों की उपस्थिति में निर्णय लिया गया कि भारत की समस्त भाषाओं का सर्वेक्षण कराया जाए। इस भाषा संगम में महाश्वेता देवी शामिल थीं तो प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक नारायण भाई देसाई भी थे। देश के अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति और केंद्रीय भाषा संस्थान, मैसूर के कई पूर्व और वर्तमान निदेशक भी उपस्थित थे। इस निर्णय में वे लोग भी शामिल थे जो आदिवासी, हिमालयी या घुमंतू समाजों से आए थे। इसका दायित्व भाषा संशोधन एवं प्रकाशन केंद्र, वडोदरा ने लिया। इस महाप्रयास को भारत की भाषाओं का लोक सर्वेक्षण कहा गया, यानी पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे आॅफ इंडिया। यह निश्चित हुआ कि भारत की भाषाओं का यह सर्वेक्षण लोगों द्वारा तैयार किया जाएगा। इसमें एक-एक भाषाई क्षेत्र को लेते हुए उस क्षेत्र की भाषाओं का विवरण दिया जाएगा। एक क्षेत्र की भाषाओं में परस्पर आदान-प्रदान होता रहता है, भले ही भिन्न-भिन्न परिवारों की भाषाएं हों। दूसरे क्षेत्रों की भाषाओं से भी उनका संबंध होता है। एक क्षेत्र की भाषाओं का दूसरे क्षेत्र की भाषाओं से भी घनिष्ठ संबंध हो सकता है। इस सर्वेक्षण में बोली और भाषा के विवाद को कोई स्थान नहीं दिया गया है। सभी की उपस्थिति भाषा के रूप में दर्ज होगी। भाषा एक जनसमूह की अभिव्यक्ति का माध्यम है, इसमें छोटे या बड़े का प्रश्न नहीं है। एक समुदाय अगर उसे भाषा के रूप में प्रयुक्त करता है तो भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण में भाषा के रूप में ही उसकी जगह है। भाषाओं को देखने का हमारा दृष्टिकोण क्या हो, यह अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाएं लोक की थाती हैं, पंडितों की नहीं। जब देश की सब भाषाएं आगे बढ़ेंगी तब उन भाषाओं को बोलने वाले लोग भी आगे बढ़ेंगे। सात और आठ जनवरी 2012 को फिर वडोदरा में भाषा संशोधन एवं प्रकाशन केंद्र ने भाषा वसुधा यानी भाषाओं का विश्व सम्मेलन नाम से एक वृहत आयोजन किया, जिसमें विश्व की लगभग नौ सौ भाषाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिंदुस्तान के अतिरिक्त अफ्रीका, न्यूजीलैंड, अर्जेंटीना, ब्राजील, कांगो, नाइजीरिया, फ्रांस, पापुआ न्यूगिनी के साथ-साथ भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल आदि से भी अपनी-अपनी भाषाओं के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। दो वर्ष पूर्व लिए गए संकल्प का परिणाम इस सम्मेलन में देखा गया। भारत की भाषाओं के लोक सर्वेक्षण के तहत परिकल्पित बीस खंडों में से पंद्रह राज्यों- छत्तीसगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, राजस्थान और उत्तराखंड- के सर्वेक्षणों की प्रकाशन-पूर्व प्रस्तुति विभा पुरी दास (मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव) की अध्यक्षता में की गई। इनमें से कुछ हिंदी में और कुछ अंग्रेजी में प्रकाशित होंगे। भाषा संशोधन एवं प्रकाशन केंद्र के संस्थापक-सदस्य प्रो. गणेश देवी के अनुसार इस कार्य के लिए देश भर में क्षेत्रवार अलग-अलग कार्यशालाएं आयोजित की गर्इं, जिनमें सर्वे की रूपरेखा निश्चित की गई। हालांकि आम जन की भी भागीदारी इसमें है, मगर प्रबुद्ध भाषाशास्त्रियों की देखरेख में यह कार्य संपन्न हो रहा है। इन संस्करणों का सामूहिक रूप से संपादन किया जा रहा है। ग्रियर्सन के लगभग सौ साल बाद यह अपनी तरह का अकेला अद््भुत प्रयास होगा जो बगैर किसी सरकारी सहायता के इतने कम समय में संपन्न किया जा रहा है। भाषाओं के इस विश्व सम्मेलन में भाषा नीति, आदिवासियों की भाषाएं, हिंदी क्षेत्र की भाषाएं, मातृभाषा में शिक्षण, भाषा विविधता का मानचित्रीकरण, भाषाओं का विस्थापन, राजभाषाएं और घुमंतू भाषाएं, भाषाओं का वर्चस्ववाद, लुप्त होती भाषाएं, संस्थाएं और भाषाओं का संरक्षण आदि विविध विषयों पर अलग-अलग समूहों में चर्चा हुई। इस तरह इतने सारे लोगों द्वारा देश भर की और कुछ दूसरे देशों की भाषाओं पर चर्चा करने का यह दुर्लभ अवसर था, जो एक प्रकार से अपनी भाषाओं को बचाने का आंदोलन ही कहा जाएगा। भाषा संशोधन एवं प्रकाशन केंद्र द्वारा जारी फोल्डर में लगभग आठ सौ भाषाओं के नाम दिए गए हैं। हमारे देश में वर्तमान में सोलह सौ के लगभग भाषाएं बोली जा रही हैं। यह भाषा-वैविध्य न केवल हमारे सांस्कृतिक वैविध्य का सूचक है, वरन हमारे समाज के पास मौजूद ज्ञान के वैविध्य का भी प्रतीक है। इसके संरक्षण का महत्त्वपूर्ण काम भी लोक ही कर सकता है, इसमें संदेह नहीं। |
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Monday, February 6, 2012
भाषाओं का लोक सर्वेक्षण
भाषाओं का लोक सर्वेक्षण
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