| Friday, 04 May 2012 10:49 |
महीप सिंह हमारे लेखक-आलोचक भी इस हीनता भाव से मुक्त नहीं हैं। वे सभी धाक जमाने के लिए अपने भाषणों और लेखों में जितने उदाहरण और उद्धहरण देते हैं उन सभी में यूरोप और अमेरिका की चर्चा होती है। अनेक अवसरों पर गलत-सलत अंग्रेजी बोलना उन्हें ठीक-ठाक हिंदी बोलने से अधिक तृप्ति देता है। ऐसे हीनता भाव पर किस प्रकार विजय प्राप्त की जा सकती है! इस साल फरवरी के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पचासीवां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन की विशेषता यह है कि इसमें किसी गैर-मराठी लेखक को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित कर उसका सम्मान किया जाता है। इस वर्ष सम्मेलन के आयोजकों ने मुझे आमंत्रित किया था। मुझे यह बात लगातार अनुभव होती रही है कि भारत की विभिन्न भाषाओं में आपसी संवाद नहीं के बराबर है। सभी भाषाओं के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन होते रहते हैं। लेकिन ऐसे सम्मेलन प्राय: उसी भाषा के लेखकों और विद्वानों तक सीमित रहते हैं। कई विश्व हिंदी सम्मेलनों में मैंने भाग लिया है। अनेक विश्व पंजाबी सम्मेलन भी हो चुके हैं। मैं पंजाबी में लिखता हूं, इसलिए उनमें भी मेरी भागीदारी रही है। पर मुझे यह स्मरण नहीं होता कि ऐसे सम्मेलनों में कभी इतर भाषा के लेखकों को आमंत्रित किया गया हो। साहित्य अकादेमी ऐसे आयोजन अवश्य करती है, पर उनमें संवाद और विचार-विमर्श की भाषा सदैव अंग्रेजी होती है। इस दृष्टि से अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का कार्य बहुत सराहनीय है। स्वाभाविक है कि सम्मेलन का सारा कार्य, वक्तव्य और विचार-विमर्श मराठी में हुआ था। मेरे जैसे व्यक्ति ने वहां अपना भाषण हिंदी में दिया था। 20 जुलाई, 2011 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय हिंदी समिति की बैठक हुई थी। उसमें भी मैंने राष्ट्रीय भाषा आयोग के गठन की बात उठाई थी, जिसका अनेक सदस्यों ने समर्थन किया था। बाद में मैंने विस्तार से ऐसे आयोग के गठन की रूपरेखा देते हुए प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था। यह आवश्यक है कि भारत सरकार एक राष्ट्रीय भाषा आयोग का गठन करे। यह आयोग उसी प्रकार और स्तर का हो जैसे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग या मानवाधिकार आयोग है। इस आयोग का दायित्व और कार्य कुछ इस प्रकार हो सकते हैं- - सभी भारतीय भाषाओं के विकास, प्रचार-प्रसार और प्रोन्नयन के लिए योजनाएं बनाना और उनके कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से संपर्क करना और सलाह देना। सभी भारतीय भाषाओं में आपसी संवाद, आदान-प्रदान और अनुवाद कार्य को प्रोत्साहित करना, उसके लिए योजनाएं बनाना और इसके कार्यान्वयन के लिए साहित्य अकादेमी, नेशनल बुक ट्रस्ट और राज्यों की भाषा और साहित्य अकादमियों से संपर्क करना और सलाह देना। भारतीय भाषाओं के लेखकों-भाषाविदों-रंगकर्मियों के मिलेजुले सम्मेलन कराना, जिनमें सभी लोग आपस में विचार-विमर्श कर सकें, नई प्रवृत्तियों और रचनाओं से परिचित हो सकें। एक भाषा के लेखकों को दूसरी भाषा के क्षेत्र में भेजना, जिससे वे उस भाषा और उसके साहित्य का अंतरंग परिचय प्राप्त और क्षेत्रीय संस्कृति की विशेषताओं से अपना तादात्म्य स्थापित कर सकें। भारतीय भाषाओं के मिलेजुले विश्व सम्मेलन आयोजित करना और उनमें विदेशों में बसे विभिन्न भारतीय भाषा-भाषियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना। भारतीय साहित्य के एक समग्र और समन्वित स्वरूप के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाना। भारतीय भाषाओं के बहुख्यात साहित्यकारों की जयंतियां अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित करना। एक से अधिक भारतीय भाषाओं में सिद्धता प्राप्त करके एक भाषा से दूसरी भाषा में सीधा अनुवाद कर सकने वालों को प्रोत्साहित करना। विश्वविद्यालयों में भारतीय साहित्य के समग्र और समन्वित पाठ््यक्रम तैयार कराना और उन्हें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करना। संभव हो तो इस कार्य के लिए एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करना। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि सभी भारतीय भाषाओं के बीच विचार-चर्चा और पत्र-व्यवहार के लिए हिंदी को संपर्क और संवाद की भाषा के रूप में आगे बढ़ाना। ये कुछ सूत्र हैं, जिन्हें राष्ट्रीय राजभाषा आयोग अपने कार्य क्षेत्र में सम्मिलित कर सकता है। इसमें अन्य अनेक सूत्र और जोड़े जा सकते हैं। ऐसे आयोग की रचना के संबंध में अगर भारत सरकार कदम उठाए तो भारतीय भाषाओं को वह स्थान प्राप्त करना सुलभ हो जाएगा, जिसकी हम सभी कामना करते हैं। |
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Friday, May 4, 2012
वर्चस्व और हाशिए की भाषा
वर्चस्व और हाशिए की भाषा
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