| Saturday, 05 May 2012 14:10 |
जनसत्ता 5 मई, 2012: राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के ताजा आंकड़ों से एक बार फिर यही साबित हुआ है कि देश की आधी से अधिक आबादी बदहाली में जी रही है। इस अध्ययन के मुताबिक जुलाई 2009 से जून 2010 के बीच साठ फीसद ग्रामीण रोजाना पैंतीस रुपए से कम पर गुजारा कर रहे थे। वहीं साठ फीसद शहरी जनसंख्या का औसत दैनिक खर्च छियासठ रुपए दर्ज किया गया। पर अगर साठ फीसद के बजाय नीचे की दस फीसद आबादी को लें तो हालत और खराब दिखेगी। सर्वेक्षण के समय ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे नीचे की दस फीसद आबादी का प्रतिव्यक्ति दैनिक खर्च महज पंद्रह रुपए से कम था। शहरों में यह हिसाब बीस रुपए से नीचे ठहरता है। विभिन्न राज्यों के बीच भी आय या व्यय के लिहाज से काफी अंतर है। मसलन बिहार, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा का प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता खर्च केरल के मुकाबले आधे से भी कम है। शहरी और ग्रामीण भारत और विभिन्न राज्यों के प्रतिव्यक्ति दैनिक खर्च के आंकड़े देने के साथ ही इस सर्वेक्षण ने पूरे देश में गरीबी के बारे में भी एक अनुमान पेश किया है। |
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Sunday, May 6, 2012
गरीबी का पैमाना
गरीबी का पैमाना
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