| Thursday, 02 February 2012 17:29 |
तसलीमा ने कहा, '' माकपा ने मुझे खदेड़ा था लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने मुझे बताया था कि वह मुझे वापस लाएगी। मुझे बहुत अधिक उम्मीदें थीं । इस प्रकार रहना काफी दर्दनाक है ।'' उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि बंगाली समाचारपत्रों में उनके कॉलम भी अब प्रकाशित नहीं हो रहे हैं । साहित्यिक और बौद्धिक समुदाय द्वारा उनके समर्थन में नहीं खड़ा होने पर भी उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा , '' कोलकाता में कई समाचारपत्रों में मेरे लेख प्रकाशित होते थे । अब उस पर भी प्रतिबंध लग गया है ।'' तसलीमा ने कहा , '' अब केवल कुछ लोग ही मुझे समर्थन दे रहे हैं।'' कल उनकी पुस्तक का विमोचन लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता महाश्वेता देवी के पुत्र और बंगाली लेखक नबारून भट्टाचार्य ने लेखक रंजन बंदोपाध्याय की मौजूदगी में किया था । लेकिन विमोचन को लेकर पैदा हुए विवाद के बावजूद तसलीमा के हौंसले कमजोर नहंी पड़े हैं । तसलीमा ने कहा, '' मेरे लिए यह नयी बात नहीं है । मेरी किताबें 80 के दशक से ही बेस्टसेलर रही हैं , जब मैंने लिखना शुरू किया था। अब मैं अपने मकसद के प्रति अधिक प्रतिबद्ध हूं । ये सब चीजें मुझे अधिक दृढ़ बनाती हैं ।'' यूरोप में एक दशक तक शरण लिए रहने के बाद तसलीमा वर्ष 2004 से पर्यटक वीजा पर कोलकाता में रह रही थीं लेकिन विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रशासन को उन्हें नयी दिल्ली में किसी गोपनीय स्थान पर ले जाना पड़ा । |
BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Thursday, February 2, 2012
तसलीमा का दावा : फिल्म निदेशकों ने पैर पीछे खींचे
तसलीमा का दावा : फिल्म निदेशकों ने पैर पीछे खींचे
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