BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Wednesday, June 12, 2013

बर्थ में अकेले मां की लाश लिए मदद को घंटों तरसता रहा बेटा

बर्थ में अकेले मां की लाश लिए मदद को घंटों तरसता रहा बेटा


यात्रियों की भीड़ में मां की लाश लेकर रमाशंकर घंटों रोता रहा. बावजूद इसके जनता की तो बात छोड़ो, रेलवे पुलिस भी आंख मूंदकर बैठी रही. रास्ते के सभी स्टेशनों पर चिकित्सा केंद्रों का दरवाजा खटखटाया, मगर प्राथमिक उपचार केंद्रों में ज्यादातर ताले लगे मिले...

संजय स्वदेश


दुर्ग-गोरखपुर चलने वाली नौतनवा एक्सप्रेस में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. ट्रेन की एक बर्थ में वृद्ध महिला की भीड़ में दम घुटने से हृदयघात के चलते मौत हो गई. मगर कोइ भी मदद को आगे नहीं आया. इंसानियत पर से एक बेटे का भरोसा उस वक्त उठ गया, जब दर्जनभर यात्री लाश के बाजू से होकर सफर करते रहे, लेकिन मदद के नाम पर किसी ने भी सहारा नहीं दिया. वृद्ध महिला का बेटा ट्रेन की बर्थ में अपनी मां की लाश लिए मदद को 18 घंटे तक तरसता रहा. खास यह है कि पूरे मामले से रेलवे पुलिस भी घंटों बेखबर रही.

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बर्थ में अपनी माँ की लाश के साथ रमाशंकर

गोरखपुर से लौट रही एक्सप्रेस ट्रेन की एस-8 बोगी में 68 वर्षीय रामदुलारी चौधरी की भीड़ में दम घुटने से हृदयघात के चलते मौत हो गई. कटनी स्टेशन के पास से ट्रेन में बैठी वृद्धा अपने बेटे रमाशंकर के साथ भिलाई लौट रही थी. 10 जून की रात को कटनी स्टेशन के पास यात्रियों की भीड़ अचानक बढ़ गई थी. बर्थ पर यात्रियों की भीड़ टूटते ही रामदुलारी की सेहत बिगड़ गई.

वह सीट पर अचानक बेसुध हो गई और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई. अगले दिन यानी 11 जून की दिन में साढ़े तीन बजे एक्सप्रेस राजधानी पहुंची, तो जो खुलासे हुए चौंकाने वाले थे. बताया गया है कि वृद्धा की लाश बहुत देर तक बर्थ पर पड़ी रही. उसके बेटे रमाशंकर की किसी ने मदद नहीं की. यात्रियों की भीड़ में मां की लाश लेकर रमाशंकर घंटों रोता रहा. बावजूद रेलवे पुलिस भी आंख मूंदकर बैठी रही. रमाशंकर ने बताया कि बोगी में ही उसकी मां की धड़कन अचानक थम गई. उन्हें भिलाई आना था, चलती ट्रेन में लोगों ने भी मदद करने से इनकार कर दिया. यहां तक कि कई स्टेशनों पर पुलिस से भी मदद मांगी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की.

रमाशंकर के मुताबिक कटनी से लौटते वक्त उसने रास्ते के सभी स्टेशनों पर चिकित्सा केंद्रों का दरवाजा खटखटाया. मगर प्राथमिक उपचार केंद्रों में ज्यादातर ताले लगे मिले. कई बार रेलवे पुलिस से भी मदद की गुहार लगानी चाही. अपनी मां के शव को अकेले ही सीट पर छोड़कर वह यहां-वहां भटकता रहा. गौरतलब है कि इस दौरान बोगी में बहुत सारे लोगों का आना जाना लगा रहा.

असंवेदनशीलता और इंसानियत को शर्मसार कर देने का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि भिलाई पावर हाउस में आटा चक्की कारोबारी रमाशंकर ने 18 घंटे लाश के साथ अकेले सफर तय किया. नौतनवा एक्सप्रेस की इस बोगी में इस दौरान कई यात्री सहमे दिखे, मगर मदद को कोइ आगे नहीं आया. 10 जून की रात करीब 9.30 बजे वृद्ध महिला की मौत हुई और अगले दिन दोपहर 3.30 बजे के बाद रमाशंकर अपने शहर भिलाई पावर हाउस पहुंच सका.

sanjay-swadeshसंजय स्वदेश समाचार विस्फोट के संपादक हैं.


http://www.janjwar.com/society/1-society/4079-birth-men-man-mee-lash-liye-madd-ko-ghanton-tarsta-raha-beta

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