BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Thursday, June 14, 2012

Fwd: ...तो फिर आप लिखते ही क्यों हैं?



---------- Forwarded message ----------
From: reyaz-ul-haque <beingred@gmail.com>
Date: 2012/6/14
Subject: ...तो फिर आप लिखते ही क्यों हैं?
To: abhinav.upadhyaya@gmail.com


एदुआर्दो गालेआनो का यह लेख सीमा आजाद और विश्व विजय को आजीवन कारावास, कबीर कला मंच पर राजकीय दमन, सुधीर ढवले, अभिज्ञान सरकार, जीतन मरांडी और उत्पल की गिरफ्तारियों, यान मिर्डल को भारत में प्रतिबंधित किए जाने और गौरव सोलंकी की लेखकीय सम्मान के हक में लड़ाई की पृष्ठभूमि में पढ़ें तो शायद इसे ज्यादा अच्छी तरह समझा जा सकेगा. 1940 में उरूग्वे में जन्मे गालेआनो ने शुरूआत प्रगतिशील पत्र-पत्रिकाओं में लिखने से की और इसी वजह से देश में आई सैन्य तानाशाही के दमन का शिकार बनकर देश छोड़ने को मज़बूर होना पड़ा. 1971 में आई "Las Venas Abiertas de América Latina" ( अंगरेजी में Open Veins of Latin America) उनकी अब तक की सबसे चर्चित किताब है. यह आज़ादी के बाद लातिन अमेरिकी देशों में पूंजीवादी शक्तियों जैसे शुरू-शुरू में इंग्लैंड और अन्य यूरोपीय तथा बाद में बेधड़क चले अमेरिकी आर्थिक और कई मौकों पर सीधे-सीधे सैन्य हस्तक्षेप का जीवंत दस्तावेज है. बाद के आई किताबों में " Días y Noches de Amor y Guerra (Days and Nights of Love and War) , "Patas Arriba: La Escuela del Mundo al Revés" (World Upside Down) प्रमुख हैं. अपने लेखन और सक्रिय भागीदारी से इन्होंने सामाजिक बदलाव के संघर्षों अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई है और आज के दौर के महत्वपूर्ण लातिन अमेरिकी लेखकों में शुमार किये जाते हैं. उनके लेख का सीधे स्पेनी भाषा से हिंदी अनुवाद पी.कुमार मंगलम ने किया है जो जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में लातिन अमेरीकी साहित्य के शोध छात्र हैं.

...तो फिर आप लिखते ही क्यों हैं?



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