BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Wednesday, July 27, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/7/27
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


पंजाब यूनिवर्सिटीःएंट्रेंस क्लीयर होने पर भी दाखिला नहीं

Posted: 26 Jul 2011 11:04 AM PDT

पीयू के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस) में पांच वर्षीय बीएएलएलबी कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया सोमवार को उस समय प्रभावित हुई जब पीयू ने आईसीएसई से बारहवीं पास करने वाले पांच छात्रों को प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद दाखिला देने से इंकार कर दिया। पीयू यही नहीं तय कर पा रहा था कि इन छात्रों के बारहवीं के अंक जोड़ते समय सर्वश्रेष्ठ पांच विषयों के नंबर जोड़े जाएं या सभी छह विषयों के। देर रात तक पीयू के विधि संकाय के डीन गोपाल कृष्ण चतरथ की अध्यक्षता में इस मसले पर बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि इन छात्रों के सवर्श्रेष्ठ पांच विषयों के अंक ही जोड़े जाएंगे।
पीयू की ओर से बीएएलएलबी में दाखिले के लिए जून में प्रवेश परीक्षा ली गई थी। आईसीएसई से बारहवीं करने वाले पांच छात्रों ने भी प्रवेश परीक्षा पास की थी। पीयू की एडमिशन लिस्ट में इनका नाम था, लेकिन जब ये छात्र दाखिला फीस जमा कराने पहुंचे तो इन्हें दाखिला देने से इंकार कर दिया। पीयू विधि विभाग के अधिकारी कहते रहे कि पीयू आईसीएसई के छात्रोंके बारहवीं के पांच सर्वश्रेष्ठ अंकों को जोड़ता है। बाद में कुलपति ने विभाग को निर्देश दिए कि पांच सीटों को छोड़कर अन्य पर दाखिला जारी रखा जाए। पीयू के विधि संकाय के डीन गोपाल कृष्ण चतरथ के अनुसार आईसीएसई के छात्रों के मार्क्स तय करते हमेशा पांच सर्वश्रेष्ठ विषयों के अंक जोड़े जाते रहे हैं। भ्रम क्यों हो गया इसका कारण समझ नहीं आया(अमर उजाला,चंडीगढ़,26.7.11)।

पंजाब यूनिवर्सिटी में शुरू होगा सोशल वर्क में पांच वर्षीय कोर्स

Posted: 26 Jul 2011 10:58 AM PDT

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के सेंटर फॉर सोशल वर्क में नए सत्र से पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड (ऑनर्स) कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव है। इस कोर्स में बारहवीं कर चुके छात्र दाखिला ले सकेंगे और पांच साल बाद छात्रों को एमए (सोशल वर्क) की डिग्री मिलेगी। अब तक पीयू के आर्ट्स विभागों में सिर्फ इक्नॉमिक्स में ही पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स है। पीयू सिंडीकेट की 31 जुलाई को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चरचा होगी।
पीयू के डीन आर्ट्स फैकल्टी की ओर से सेंटर फॉर सोशल वर्क में यह कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव कुलपति को दिया गया था। इसमें स्पष्ट था कि इस नए कोर्स के लिए अतिरिक्त मूलभूत ढांचा और शिक्षकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर पीयू सिंडीकेट इस प्रस्ताव की मंजूरी दे देता है तो इस कोर्स में दाखिले के लिए छात्रों से आवेदन मंगवाए जाएंगे। इस कोर्स में फिलहाल 20 सीटें होंगी और दाखिला मेरिट के आधार पर होगा। यह कोर्स इंटर डिसिप्लनरी होगा।

सिंडीकेट की बैठक में यूआईईटी की छात्रा शिल्पा को फीस में पूरी छूट देने, पीयू के छात्रों के लिए शुरू ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के कांट्रेक्ट को रीन्यू करने, जन संपर्क अधिकारी के पद की योग्यता में बदलाव करने के मुद्दे पर भी बैठक में चरचा होगी। 
बैठक में पीयू के विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पर मुहर लगेगी। साथ ही कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नत हुए शिक्षकों की पदोन्नति को भी मंजूरी दी जाएगी। 
सिंडीकेट की बैठक में पीयू से संबद्ध कालेजों में पढ़ाए जा रहे एड ऑन कोर्सों के लिए समिति की ओर से तैयार नीति को मंजूरी दी जाएगी। साथ ही एमई और एमटेक कोर्सों के नियमों को भी बैठक में स्वीकृति मिलेगी। पीएचडी के लिए कोर्स वर्क अनिवार्य किए जाने पर समिति की सिफारिश को भी बैठक में मंजूरी दी जाएगी। पीयू की परीक्षा शाखा के सीनियर असिस्टेंट के खिलाफ एसएस लांबा की ओर से की गई जांच की रिपोर्ट भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा बैठक में विभिन्न कालेजों को नए और मौजूदा कोर्सों के लिए संबद्धता भी दी जाएगी।
दो माह बाद हो रही है बैठक 
पीयू सिंडीकेट की यह बैठक लगभग दो महीने बाद हो रही है। इसलिए बैठक का एजेंडा इस बार काफी भारी भरकम है। सिंडीकेट सदस्यों को अभी 335 पेज का एजेंडा भेजा गया है। बैठक से पहले सप्लीमेंटरी एजेंडा भी जारी होगा। इसके साथ ही बैठक के दौरान करेंट एजेंडा भी दिया जा सकता है।
डॉ. जोसन मामले में भी हो सकता है फैसला
पंजाब यूनिवर्सिटी सिंडीकेट की बैठक में डीएवी कालेज के प्रिंसिपल डॉ.बीसी जोसन के निलंबन को बहाल करने के मामले में फैसला लिया जा सकता है। हालांकि यह मुद्दा अभी एजेंडे में शामिल नहीं है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इसे करेंट आइटम में शामिल किया जाएगा। 
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद डॉ.जोसन ने पीयू से उनके निलंबन को बहाल करने का पत्र भेजा है। पीयू ने इस पत्र पर कानूनी सलाह मांगी है। डॉ.जोसन के समर्थन में कई प्रिंसिपल उतरे हैं। बैठक में पीयू से संबद्ध कालेजों में यूनिफार्म फीस ढांचे के मामले में भी फैसला हो सकता है(अमर उजाला,चंडीगढ़,26.7.11)।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय बांट चुका है हजारों को बांटी गईं फर्जी डिग्रियां

Posted: 26 Jul 2011 10:52 AM PDT

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री बांटने की फैक्ट्री बन चुका है। अकेले बालकृष्ण ही नहीं बल्कि मोटी रकम लेकर हजारों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गई हैं। बाजार में फैले दलाल, विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं अधिकारी और संबद्ध कालेजों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर यह व्यवसाय धड़ल्ले से चल रहा है। बागपत, बरेली, मेरठ, बुलंदशहर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैकड़ों मामले पकड़ में आ चुके हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव के निकटतम सहयोगी बालकृष्ण की आचार्य की फर्जी डिग्री पकड़े जाने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रदेश ही नहीं पूरे देश में बंट रहीं संस्कृत विश्वविद्यालय की जाली डिग्रियों के पीछे विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और इस गिरोह के सदस्यों के बीच गठजोड़ है। यही कारण है मोटी रकम लेकर जाली डिग्रियां देने के बाद सत्यापन तक में इस गिरोह का खासा दखल होता था। इसी कारण सालों से फल फूल रहे करोड़ों रुपये के अवैध व्यवसाय में किसी की धरपकड़ तक नहीं हो सकी थी। हालांकि विशिष्ट बीटीसी में फर्जी अंकपत्रों की बाढ़ सी आ गई और मामला शासन एवं राजभवन तक पहुंचा था। इसके बाद संविवि के दो कर्मचारी जेल भेजे गए। विश्वविद्यालय प्रशासन अपने यहां केवल सत्यापन में गड़बडि़यों की बात स्वीकार रहा था। यहां से फर्जी अंकपत्र बनाए जाने की बात को प्रशासन अब तक नकारता रहा है, लेकिन बालकृष्ण की आचार्य की जारी डिग्री ने सारी पोल खोल दी है। बालकृष्ण की तरह न जाने कितनों को यह डिग्रियां बेची जा चुकी हैं। फर्जी डिग्री, कालेजों को फर्जी मान्यता। सब कुछ यहां से प्राप्त हो जाता है। बस मोटी रकम जेब में होनी चाहिए। कुुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र भी इस बात को स्वीकार रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व कुलपतियों एवं कुलसचिवों की लापरवाही के कारण विश्वविद्यालय की यह दुर्दशा हो रही है(अमर उजाला,वाराणसी,26.7.11)।

लखनऊ विश्वविद्यालयःएग्री बिजनेस और रूरल मैनेजमेंट रहेंगे सस्पेंड

Posted: 26 Jul 2011 10:49 AM PDT

लखनऊ विश्वविद्यालय का वित्तीय तंत्र सुधारने की चाहत में कई गुना फीस बढ़ाने का फैसला वित्तीय ढांचे एवं कोर्स दोनों को ही गर्त में ले जा रहा है। फिलहाल इसका शिकार एमबीए के कोर्सेज हुए हैं। बड़े ब्रांड नेम एवं दुबारा आवेदन प्रक्रिया के बावजूद लविवि के एमबीए के दो कोर्स इस सत्र में बंद हो गए जबकि तीन कोर्सेज में सीटें खाली रह गयी हैं। सोमवार को हुई काउंसलिंग में आवेदन करने वालों में सिर्फ 50 फीसदी के आस-पास अभ्यर्थियों ने ही हिस्सा लिया और एमबीए की 28 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह गयी हैं। एमबीए एग्री बिजनेस एवं रूरल मैनेजमेंट इस सत्र में सस्पेंड रहेंगे। लविवि में एमबीए की पहली काउंसलिंग के दौरान आईएमएस के अंतर्गत संचालित 9 कोर्सेज में केवल तीन कोर्सेज की ही सीटें भर सकी थी। जबकि छह कोर्सेज की 223 सीटें खाली रह गयी थीं। इसके लिए लविवि ने दुबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी जिसमें महज 67 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया था। ऐसे में पहले ही खाली सीटों के लगभग 30 फीसदी आवेदन आए थे। सोमवार को काउंसलिंग के दौरान मेरिट में शामिल 67 अभ्यर्थियों में महज 34 ही काउंसलिंग कराने पहुंचे। इसमें भी एक अभ्यर्थी मनपसंद सीट न मिलने के चलते लौट गया जबकि एक अभ्यर्थी के एमबीए करने की चाहत पर लविवि की मोटी फीस भारी पड़ गयी। ऐसे में अंतिम रूप से महज 32 अभ्यर्थियों ने ही दाखिला लिया। इस तरह से 191 सीटों के लिए कोई दावेदार नहीं मिल सका। यह सीटें अब इस सत्र में खाली रहेंगी। एचआर मैनेजमेंट में 1 सीट खाली थी जो भर गयी। इसके अलावा मैनेजमेंट साइंसेज में 8 अभ्यर्थियों ने और दाखिला लिया। इससे इसकी छात्र संख्या 38 हो गयी। कारपोरेट मैनेजमेंट में 17 छात्र और जुड़े। जिससे इसमें कुल 41 दाखिले हो गए जबकि रिटेल मैनेजमेंट में छह और एडमिशन होने के बाद भी आधी सीटें खाली रह गयी हैं। एमबीए एग्री बिजनेस मैनेजमेंट एवं एमबीए रूरल मैनेजमेंट की 60-60 सीटों का खाता नहीं खुल सका। आईएमएस के ओएसडी प्रो. जेके शर्मा का कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में दाखिले न होने से इस सत्र में कक्षाएं नहीं संचालित होंगी(अमर उजाला,लखनऊ,26.7.11)।

गौतम बुद्ध प्राविधिक विविःबीटेक काउंसिलिंग में 6738 सीटें लॉक

Posted: 26 Jul 2011 10:47 AM PDT

गौतम बुद्ध प्राविधिक विवि लखनऊ (जीबीटीयू) एवं महामाया प्राविधिक विवि नोयडा (एमटीयू) से संबद्ध मान्यता प्राप्त कालेजों की बीटेक काउंसिलिंग के दूसरे दिन 12 बजे तक सर्वर लिंक नहीं हुआ। बाद में सर्वर लिंक होने पर 6738 सीटें लॉक हुईं। वहीं, काउंसिलिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पहली बार बायो मेट्रिक डिवाइस तकनीकी और सीसी टीवी कैमरों का प्रयोग किया जा रहा है। उधर,काउंसिलिंग व्यवस्था को लेकर एचबीटीआई के सेंटर इंजार्ज डा. रघुराज सिंह ने बताया कि कोई भी अभ्यर्थी फर्जीवाड़ा न कर सके इसके लिए अबकी बार बायो मेट्रिक डिवाइस का प्रयोग किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थी के अंगूठे का निशान लेकर उसे स्कैन कर सुरक्षित किया जा रहा है। किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर सुरक्षित की गई डिवाइस का प्रयोग कर अभ्यर्थी का मिलान किया जाएगा। पूरे काउंसिलिंग सेंटर को सीसी टीवी कैमरों से लैस किया है। सोमवार को 105 अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग के लिये बुलाया गया था। उधर सोमवार को देर रात तक चली काउंसिलिंग में एचबीटीआई में 76, केआईटी में 307, प्राणवीर इंस्टीट्यूट में 317, महाराणा प्रताप में 329 और नारायणा इंस्टीट्यूट में 138 विकल्प लॉक किए गए। काउंसिलिंग कोआर्डीनेटर डा. ओंकार सिंह ने बताया कि रात साढ़े आठ बजे तक संस्थानों में 1025 टोकन पेंडिंग बताए गए। इनकी काउंसिलिंग देर रात कर कराई गई। बताया गया कि काउंसिलिंग प्रदेश के 35 सेंटरों में चल रही है। अभ्यर्थियों में पांच सरकारी संस्थानों का क्रेज ज्यादा है। जबकि सेल्फ फाइनेंस कालेजों में अभी कम विकल्प लॉक हो रहे हैं। सरकारी संस्थानों की सीटें भरने के बाद सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट की सीटें भरी जाएंगी।


एचबीटीआई में पहले दिन सात रिजेक्शन
बीटेक की काउंसिलिंग में सोमवार को एचबीटीआई में सात अभ्यर्थियों को रिजेक्शन लेटर दिया गया। जबकि पहले दिन च्वाइस फिलिंग करने वाले 49 अभ्यर्थियों को कालेज एलॉट किया गया। सेंटर इंजार्ज डा. रघुराज सिंह ने बताया कि रिजेक्शन लेटर पाने वाले अभ्यर्थी अगली काउंसिलिंग में दोबारा हिस्सा ले सकते हैं। पर ऐसे सभी अभ्यर्थियों को अगली काउंसिलिंग 500 रुपए काउंसिलिंग वैरीफिकेशन चार्ज व 5000 रुपए इनीशियल फीस भरनी होगी। इंस्टीट्यूट च्वाइस व ब्रांच कम भरने से इन्हें मनचाहा कालेज नहीं मिल पाया है। बताया गया कि फिलहाल अभ्यर्थियों को 5000 रुपए इनीशियल फीस का ड्राफ्ट वापस दे दिया जाएगा। 

वैरीफिकेशन के बाद भी नहीं पहुंचे सारे अभ्यर्थी
यूपीएसईई परीक्षा में सफल हुए प्रदेश के सवा लाख अभ्यर्थियों की पहले चरण की काउंसिलिंग 28 जून को खत्म हुई थी। 22 जून से 28 जून तक प्रदेश के 35 सेंटरों में चली इस काउसिलिंग में एचबीटीआई में 1355, नारायणा इंस्टीट्यूट में 1354, केआईटी में 1642, महाराणा प्रताप में 1750 और पीएसआईटी में 1567 सहित कुल 7668 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांचे गये थे। बताया जा रहा है कि वैरीफिकेशन कराने वाले सभी अभ्यर्थी द्वितीय चरण की काउंसिलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं। एचबीटीआई के सेंटर इंजार्ज डा. रघुराज सिंह ने बताया कि सोमवार को 105 अभ्यर्थियों में कई गायब थे।
(अमर उजाला,कानपुर,26.7.11)

पंजाब विश्वविद्यालयःबीएड के लिए आवेदन तिथि बढ़ी

Posted: 26 Jul 2011 10:37 AM PDT

पंजाब विश्वविद्यालय ने बीएड में दाखिले के लिए आनलाइन फार्म जमा कराने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 28 जुलाई कर दी है। ज्वाइंट बीएड एडमिशन्स 2011-12 की कोआर्डीनेटर डा. नंदिता ने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी के सभी सदस्यों ने जनहित में अंतिम तिथि बढ़ाने की सहमति दे दी है। उनके अनुसार अब जो छात्र-छात्रा 26 जुलाई को 4 बजे तक अपना रजिस्ट्रेशन करा कर बैंक फीस जमा करा देगा उसे 28 जुलाई 5 बजे तक आनलाइन आवेदन जमा कराने की छूट रहेगी(दैनिक ट्रिब्यून,चंडीगढ़,26.7.11)।

चंडीगढ़ के कॉलेजों में लौटी रौनक

Posted: 26 Jul 2011 10:36 AM PDT

शहर के कॉलेजों में आज से नया अकादमिक सत्र शुरू हो गया। कॉलेजों में आज पहले दिन नए विद्यार्थियों की काफी चहल पहल रही। वे एक दूसरे से मिले और कॉलजों में लगने वाली कक्षाओं के शैड्ïयूल को जानने के लिये वे कई-कई घंटे नोटिस बोर्ड पर अपना ध्यान टिकाये हुए थे।
सेक्टर 11 के पोस्ट ग्रेजुएट गल्र्स कॉलेज में भी आज बीसीए, बीएससी मेडिकल और नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के परिचय के लिये एक आरियंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में करीब 300 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें नये शिक्षा सत्र में आरंभ होनी वाली कक्षाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारियां प्रदान की गईं। कॉलेज के प्रिंसिपल जेएस रघु ने नये विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र के दौरान अनुशासन का पालन करने और किसी भी अप्रिय घटना से दूर रहने के बारे में कहा। इस बीच कॉलेज की डीन प्रो. रमणीक शर्मा ने विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग सैल, सैक्सुअल हरासमेंट सैल, क्लनास अटेंडस व अन्य कॉलेज की गतिविधियों से अवगत करवाया।

उधर, गुरुगोबिन्द सिंह कॉलेज फार वुमेन सेक्टर-26 में सुबह से ही कॉलेज के कोरिडोर में लगे नोटिस बोर्ड के आसपास नए और पुरानी छात्राएं अपने-अपने विभागों के टाइम टेबल नोट करने में लगी रहीं। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. चरणजीत सिंह सोही ने नई छात्राओं को वर्ष 2011-12 के सत्र की योजनाओं के बारे में बताया। इस दौरान सभी छात्राओं को संस्थान में रैङ्क्षगग पर लगे प्रतिबंध और उससे जुड़े विभिन्न नियमों के बारे में जागरूक किया गया। कॉलेज के पहले दिन आई नई छात्राओं को सहज बनाने के लिए पुरानी छात्राओं ने उसके साथ बातचीत की और कॉलेज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सांझी की।
सेक्टर 10 डीएवी कॉलेज में एबीवीपी संगठन की ओर से नये शिक्षा सत्र के दौरान विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। प्रधान सोमांशु और संचालक सचिव दिनेश चौहान ने विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र के दौरान अनुशासन बनाये रखने के लिये कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। इसी प्रकार सेक्टर 42 के कॉमर्स कॉलेज में भी इसी परंपरा के साथ विद्यार्थियों का स्वागत किया। संगठन सचिव चौहान ने बताया कि एबीवीपी की ओर से रविवार से सेक्टर 17 में भ्रष्टाचार के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया है, जिसमें कॉलेजों के कई विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया(दैनिक ट्रिब्यून,चंडीगढ़,26.7.11)।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में ढांचागत विकास न होने से आरक्षण मुश्किल

Posted: 26 Jul 2011 10:29 AM PDT

ढांचागत विकास नहीं होने से नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) में अभी तक 15 फीसदी ओबीसी आरक्षण भी लागू नहीं हो सका है। इस बात को खुद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रणबीर सिंह भी स्वीकारते हैं। उनका कहना है कि सरकार अगर विश्वविद्यालयों में 27 फीसदी आरक्षण लागू करना चाहती है तो उसे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर ढांचागत विकास और उसी अनुपात में अनुदान राशि भी मुहैया करानी चाहिए। प्रो. रणबीर सिंह ने बताया कि एनएलयू में प्रतिवर्ष 80 छात्रों का दाखिला होता है। पांच वर्षीय कोर्स के तहत विश्वविद्यालय में छात्रावास की क्षमता 400 है। अभी यहां 5 छात्रावास हैं। अगर ओबीसी आरक्षण लागू करेंगे तो हमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर कुल 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू करना होगा। जिससे सीटों की संख्या 120 हो जाएगी और 60-60 छात्रों के दो सेक्शन बनाने होंगे। 10 छात्रावासों की भी जरूरत होगी। प्रो. सिंह के अनुसार कुछ समय पहले मुख्यमंत्री शीला दीक्षित विवि आई थी, तो उन्होंने कहा था कि पास में ही डीडीए की जमीन खाली विवि को दे दी जाए। लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इस संबंध में कुछ नहीं किया गया। कुलपति ने कहा कि सरकार द्वारा 12 फीसदी सीटें बढ़ाना और ओबीसी को 15 के बजाय 21 फीसदी आरक्षण देना स्वागतयोग्य है। लेकिन एनएलयू में ओबीसी छात्रों को इसका फायदा तभी मिलेगा, जब विश्वविद्यालय का ढांचागत विकास होगा(दैनिक जागरण,दिल्ली,26.7.11)।

दिल्ली के विश्वविद्यालयों में होगा 2766 सीटों का इजाफा

Posted: 26 Jul 2011 10:25 AM PDT

12 फीसदी सीटें बढ़ने से राजधानी के चारों विश्वविद्यालयों में 2766 सीटों की वृद्धि होगी जबकि ओबीसी का कोटा 15 फीसदी से बढ़ाकर 21 फीसदी होने से ओबीसी की 1964 सीटें बढेंगी। खास बात यह है कि सरकार ने सत्र 2011-12 में ही इसे लागू करने की बात कही है। अभी इस प्रस्ताव पर कैबिनेट में फैसला हुआ है, जिस पर उपराज्यपाल की संस्तुति बाकी है। उसके बाद ही इसे अमल में लाया जा सकेगा। दिल्ली में इस समय गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आइपीयू), दिल्ली टेक्नॉलोजिक्ल यूनिवर्सिटी (डीटीयू), अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (एयूडी), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली (एनएलयू) हैं। इनमें कुल सीटों की संख्या 23048 है। सरकार के फैसले का सभी कुलपतियों ने स्वागत किया है। आइपीयू के कुलपति प्रो. डी.के. बंधोपाध्याय कहते हैं कि छात्रहित में सरकार का यह फैसला वाकई स्वागत योग्य है। उनके यहां पहले से ही 15 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू है और इसे 21 फीसदी करने के लिए तैयार हैं। साथ ही विवि में 12 फीसदी सीटें बढ़ाने में भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इससे उन छात्रों को फायदा होगा, जो दाखिले की लाइन में हैं। लेकिन यह लागू तभी होगा, जब सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए जाएंगे। उधर, एयूडी के कुलपति प्रो. श्याम बी. मेनन ने कहा कि द्वारका से उनका कैंपस कश्मीरी गेट स्थानांतरित हो रहा है और उनके यहां अभी स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर के ही कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं। जिसमें करीब 750 सीटें हैं। ऐसे में ओबीसी छात्रों की सीटों में 6 फीसदी इजाफा और सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए 12 फीसदी इजाफा स्वागत योग्य है। डीटीयू के प्रवक्ता डा. विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से छात्रों को फायदा होगा क्योंकि विश्वविद्यालय के सभी कोर्स तकनीकी हैं। सीटें बढ़ने से अधिक छात्रों को तकनीकी शिक्षा मिलेगी। जिसके बाद विवि की सीटों में करीब 145 सीटें बढ़ जाएंगी(दैनिक जागरण,दिल्ली,26.7.11)।

लखनऊ विविःबिना इनरोलमेंट नम्बर के जारी कर दी मार्कशीट

Posted: 26 Jul 2011 02:01 AM PDT

लखनऊ विविद्यालय में नियमित कोर्स को छोड़ आनर्स पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों को इनरोल ही नहीं किया गया, जबकि उसने छात्रों से प्रथम वर्ष में प्रवेश के दौरान प्रति छात्र 500 रुपये इनरोलमेंट फीस के भी वसूले हैं। ऐसे पाठ्यक्रमों की संख्या करीब आधा दर्जन से ज्यादा है। राज्य के बाहर दूसरे विविद्यालयों ने प्रवेश लेने गये छात्रों के अंकपत्र पर इनरोलमेंट नम्बर न होने से लौटा दिया। विविद्यालय में सोमवार को करीब दो दर्जन से ज्यादा छात्र अपनी पीड़ा को बयां करने के लिए प्रशासनिक भवन स्थित परीक्षा नियंत्रक कार्यालय जा धमके। छात्रों को मिले परीक्षा नियंत्रक ने सुधार का आासन दिया और सभी से फिलवख्त स्नातक के तीनों वर्ष की छायाप्रति अंकपत्र लेकर इनरोलमेंट नम्बर आवंटित करने पर राजी हो गये हैं और इसके बाद छात्रों से मूल अंकपत्र लेकर इनरोलमेंट वाले अंकपत्र जारी किये जाएंगे। परीक्षा नियंत्रक ने इसके लिए कोई अलग से शुल्क लेने से भी इंकार किया है और कहा कि अंकपत्र बनाने का खर्च खुद विवि वहन करेगा। उल्लेखनीय है कि चार वर्ष पहले विविद्यालय ने स्नातक स्तर पर बीकाम व बीए आनर्स शुरू किया। छात्रों से प्रवेश के दौरान इनरोलमेंट शुल्क के रूप में 500 रुपये भी जमा कराये गये। प्रथम वर्ष छात्रों को जब कोई इनरोलमेंट नम्बर नहीं मिला तो उन्होंने शिकायत दर्ज करायी। इस पर उन्हें स्नातक अंतिम वर्ष के अंकपत्र में इनरोलमेंट नम्बर आवंटित करने के लिए आासन मिला था। बीए, बीकाम और प्रोफेसनल कोर्स, पत्रकारिता विभाग के कोर्स के छात्रों को भी इनरोलमेंट नम्बर नहीं मिले। बीए आनर्स करने के बाद छात्रों ने दिल्ली विवि, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित राज्य के दूसरे विविद्यालयों में आवेदन किया। अलग-अलग विविद्यालयों में दाखिला पाने में सफल छात्रों से अंकपत्र जमा कराये गये तो उनमें इनरोलमेंट नम्बर नहीं होने पर विविद्यालय से दोबारा दर्ज कराकर लाने के निर्देश दिये गये हैं। अब छात्र परेशान होकर विविद्यालय में भटक रहे हैं। छात्रों के घेराव के बाद दबाव को देखते हुए परीक्षा नियंत्रक प्रो. यशवीर त्यागी ने आनर्स पाठ्यक्रमों को देखने वाली परीक्षा विभाग की टीम और अधिकारियों को बुलाकर जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। प्रो. त्यागी ने कहा कि अभी तो उन्हीं बच्चों के अंकपत्रों में इनरोलमेंट जारी किया जाएगा, जिन्हें कहीं प्रवेश मिल चुका है। लविवि में आवेदन करने वाले छात्रों के भी अंकपत्र जमा कराये जा रहे हैं। प्रो. त्यागी ने कहा कि यह मामला हालांकि उनके कार्यकाल से पहले का है, लेकिन छात्रों की दिक्कतों को दूर करने के लिए जरूरी कार्रवाई होगी।
विविद्यालय व डिग्री कालेजों में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को एक विशेष नम्बर जारी होता है। इसमें दाखिला लेने का वषर्, संकाय और प्रवेश क्रमांक के साथ छात्र नम्बर होता है। इसी नम्बर से विविद्यालय में एक सत्र में प्रवेशित छात्रों का ब्योरा तैयार होता है और अंकपत्रों के सत्यापन या फिर माइग्रेशन वगैरह जारी करने में इनरोलमेंट जरूरी होता है। विविद्यालय में पढ़ाई करने के दौरान छात्र को इनरोलमेंट सिर्फ एक बार ही जारी होता है और विवि बदलने के बाद ही इनरोलमेंट नम्बर बंद होता है। विविद्यालय में शैक्षिक सत्र में अलग-अलग सीरीज में इनरोलमेंट नम्बर आवंटित होता है। अब इन छात्रों विविद्यालय से नये सीरीज का नम्बर जारी होगा या फिर पुरानी सीरीज में कोई अलग पहचान करनी होगी(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,26.7.11)।

हरियाणा लोक सेवा आयोग को सीटें कम करने पर नोटिस

Posted: 26 Jul 2011 01:59 AM PDT

हरियाणा सिविल सर्विस (कार्यकारी) से बदलकर एक्साइज एड टेक्सेसन ऑफिसर के कैडर पर नियुक्ति को चुनौती याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग को एक अगस्त के लिए नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

अदालत ने आयोग से पूछा कि एचसीएस की सीटों में कमी क्यों की गई। कैथल निवासी डॉ. कृष्ण कुमार की तरफ से दाखिल याचिका में लोक सेवा आयोग के उस फैसले को खारिज करने की मांग की गई जिसमें उसे हरियाणा सिविल सर्विस (कार्यकारी) से बदल कर एक्साइज एड टेक्सेशन ऑफिसर के कैडर पर नियुक्त करने का आदेश दिया गया।


याचिका में कहा गया कि एचसीएस की परीक्षा में मेरिट में आने के बाद उसे एचसीएस का कैडर दिया गया था जबकि एक अन्य प्रतिभागी राजेश को एक्साइज एंड टेक्सेसन ऑफिसर के कैडर पर नियुक्ति दी गई थी। बाद में आयोग ने सीटें कम करने का हवाला दिया था(दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,26.7.11)।

राजस्थान में जनजातियों को शोध के लिए फैलोशिप

Posted: 26 Jul 2011 01:19 AM PDT

अब पीएचडी करने के लिए गरीब जनजाति छात्रों के लिए शुल्क रोड़ा नहीं बनेगा। जनजाति उपयोजना क्षेत्र(टीएसपी) के जनजाति विद्यार्थियों को शोध से जोड़ने के लिए राज्य सरकार की ओर से फैलोशिप दी जाएगी।
जनजाति विभाग की ओर से दी जाने वाली इस फैलोशिप के लिए प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जल्दी ही आवेदन मांगे जाएंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की फैलोशिप के तर्ज पर शुरू की गई योजना में विद्यार्थियों को दस हजार रूपए प्रतिमाह तक दिया जाएगा।

संभाग में हर साल सैंकड़ों जनजाति विद्यार्थी स्नातकोत्तर कोर्स करते हैं, लेकिन पीएचडी में पचास-साठ विद्यार्थी भी प्रवेश नहीं ले पाते हैं। शोध में होने वाले खर्च के कारण कई विद्यार्थी रूचि होने के बावजूद पीएचडी नहीं कर पाते हैं।
यूजीसी की ओर से ऎसे अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश के बाद राजीव गांधी फैलोशिप दी जाती है। लेकिन इसमें विषयवार शोध के आधार पर ही चयन होता है, जिससे कम ही विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलता है। यह नई फैलोशिप उन विद्यार्थियों को मिलेगी, जिन्हें राजीव गांधी फैलोशिप का लाभ नहीं मिल पाया है(राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,26.7.11)।

हिमाचलःनियम तोड़ा तो प्राइवेट विवि पर लगेगा 5 करोड़ जुर्माना

Posted: 26 Jul 2011 01:17 AM PDT

प्राइवेट यूनिवर्सिटी को बार-बार अनियमितता करना अब महंगा पड़ेगा। इसके तहत यूनिवर्सिटी को पांच करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसा निर्णय सरकार ने अनियमितताओं संबंधी शिकायतों को मिलने के बाद किया है। साथ ही, यूनिवर्सिटी की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है।

प्रदेश सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों पर निगरानी रखने के लिए नियामक आयोग का गठन किया है। इसकी पहली अध्यक्ष पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सरोजनी गंजू ठाकुर को बनाया गया है। आयोग में उनके साथ दो सदस्य भी होंगे, जो अध्यक्ष की मदद करेंगे।

हर जिले में यूनिवर्सिटी खोलना विचाराधीन : प्रदेश में हर जिले में प्राइवेट यूनिवर्सिटी को खोलना विचाराधीन है। ऐसे में अब जिन जिलों में प्राइवेट यूनिवर्सिटी नहीं खुली है, वहां पर इसे खोला जाएगा। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि छात्रों को कम से कम दूरी पर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़े।


अब तक खुली 11 प्राइवेट यूनिवर्सिटी : प्रदेश में अब तक 11 प्राइवेट यूनिवर्सिटी खुल चुकी है। इसमें चितकारा यूनिवर्सिटी कालू झंडा, इंटरनल यूनिवर्सिटी बड़ूसाहिब, मानव भारती यूनिवर्सिटी लाडो, अरनी यूनिवर्सिटी काठगढ़, इंडस यूनिवर्सिटी बाथू, बद्दी यूनिवर्सिटी ऑफ एमर्जिग एंड टेक्नोलॉजी साइंसिज एंड टेक्नोलॉजी मलकूमाजरा, शूलिनी जैव प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन विज्ञान यूनिवर्सिटी बझोल, महर्षि मरकडेश्वर यूनिवर्सिटी सोलन, बहारा यूनिवर्सिटी वाकनाघाट, श्री साई यूनिवर्सिटी पालमपुर एवं द इक्फाई यूनिवर्सिटी कालू झंडा शामिल है। ग्यारह यूनिवर्सिटी को खोलने के अलावा आठ यूनिवर्सिटी को खोलने की प्रक्रिया जारी है। 

किस तरह की अनियमितताएं 

प्राइवेट यूनिवर्सिटी में कई तरह की अनियमितताएं हो सकती है। इसमें यूजीसी के मापदंड पूरा न करना, शिक्षक एवं गैर शिक्षक स्टाफ की कमी, मूलभूत सुविधाओं की कमी, विधानसभा में बने एक्ट के अनुसार काम न करना, आवश्यकता से अधिक वसूली करना, छात्रों की शिकायतों पर ध्यान न देना, पुस्तकालय से लेकर अन्य तरह की सुविधाओं पर ध्यान न देना एवं ऐसे मानकों की अवहेलना करना, जिसकी नियामक आयोग अवहेलना मानता हो। नियामक आयोग की तरफ से मांगी गई रिपोर्ट का पूर्ण विवरण भी देना होगा। 

वर्तमान सरकार प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर पूरा शिकंजा कसेगी। बार-बार अनियमितता करने पर पांच करोड़ का जुर्माना होगा। साथ ही मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है। अब प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों पर निगरानी के लिए नियामक आयोग का गठन कर दिया है, जिससे बेहतर तरीके से निगरानी हो सकेगी। - आईडी धीमान, शिक्षा मंत्री(कुलदीप शर्मा,दैनिक भास्कर,शिमला,26.7.11)

बिहारःबकाया वेतन भुगतान के लिए विवि में नहीं लगेगा कैंप

Posted: 26 Jul 2011 01:15 AM PDT

राज्य के विविद्यालय कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान के लिए कैंप लगाने की योजना पर पानी फिर गया है। विविद्यालयों में राशि नहीं रहने के कारण कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान के लिए लगाये जाने वाले कैंप की तिथि रद्द कर दी गयी है। नयी तिथि की घोषणा विविद्यालय में राशि उपलब्ध होने के बाद की जायेगी। उच्च शिक्षा निदेशालय के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के विविद्यालयों के कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान के लिए विविद्यालय प्रशासन ने कैंप लगाने का निर्णय लिया है। पटना विविद्यालय, जय प्रकाश नारायण विविद्यालय और बीएन मंडल विविद्यालय में 27 से 29 जुलाई तक कैंप लगाकर कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किया जाना था। इन विविद्यालयों में राशि उपलब्ध नहीं रहने के कारण कैंप की तिथि को रद्द कर दिया गया है। निदेशालय ने इन विविद्यालयों में दस दिनों के अंदर राशि उपलब्ध कराने का भरोसा विविद्यालय प्रशासन को दिया है। इसके बाद कैंप की नयी तिथि की घोषणा की जायेगी। आधिकारियों के अनुसार इसी तरह एलएन मिथिला विविद्यालय, तिलका मांझी विविद्यालय और दरभंगा स्थित संस्कृत विविद्यालय के कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान के लिए तीन व पांच अगस्त को कैंप लगाने की तिथि निर्धारित है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,26.7.11)।

पटना विश्वविद्यालयःपीजी के लिए कल तक जमा होंगे फॉर्म

Posted: 26 Jul 2011 01:13 AM PDT

पटना विविद्यालय में स्नातकोत्तर में फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 27 जुलाई है। इसके बाद किसी भी हालत में फॉर्म नहीं जमा नहीं लिया जायेगा। फॉर्म भरे जाने के बाद मेधा सूची जारी की जाएगी और फिर उसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। पटना विविद्यालय में स्नातक में नामांकन प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है और सभी कॉलेजों में सत्र प्रारंभ हो चुका है। मगध विविद्यालय के कुछ कॉलेजों में नामांकन जारी है। पटना विविद्यालय(पीयू) में स्नातक में नामांकन समाप्त होने के बाद सोमवार को मगध विविद्यालय (एमयू) के कॉलेजों में काफी भीड़ देखने को मिली। जेडी वीमेंस कॉलेज में आज नामांकन की अंतिम तिथि थी। यहां बड़ी संख्या में छात्राओं ने नामांकन कराया। वहीं कॉलेज ऑफ कॉमर्स में 28 जुलाई को दूसरी मेधा सूची निकाली जायेगी। यहां फिलहाल पहली मेधा सूची में शामिल छात्र-छात्राओं का नामांकन लिया जायेगा। एएन कॉलेज में भी नामांकन प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त एओयू व इग्नू में भी नामांकन प्रक्रिया जारी है। छात्रों के पास निजी संस्थानों से रोजगारोन्मुखी पाठय़क्रम करने का विकल्प भी मौजूद है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,26.7.11)।

DU: ओबीसी कोटे का कन्वर्जन मुश्किल

Posted: 26 Jul 2011 01:11 AM PDT

डीयू में इस बार ओबीसी की सीटों पर जनरल कैटिगरी के स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलने के चांस काफी कम नजर आ रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने सीटों के कन्वर्जन पर रोक लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को ओबीसी रिजर्वेशन के मसले पर सुनवाई होनी है और यूनिवर्सिटी का कहना है कि कोर्ट के फैसले के आधार पर ही कॉलेजों को गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।

अभी डीयू में जनरल और ओबीसी कैटिगरी के स्टूडेंट्स की कट ऑफ में अधिकतम 10 पर्सेंट गैप रखा गया है लेकिन इस फॉर्म्युले के आधार पर सात कट ऑफ जारी करने के बाद भी ओबीसी की सीटें बची हुई हैं और जनरल की सारी सीटें भर चुकी हैं। ऐसे में जनरल कैंडिडेट उम्मीद कर रहे हैं कि ओबीसी की सीटें कन्वर्ट होंगी और उन्हें एक बार फिर से एडमिशन का चांस मिल सकेगा।


पिछले साल तो ओबीसी की बची हुई सीटें जनरल कैटिगरी में कन्वर्ट हो गई थी लेकिन इस बार इसके चांस अब काफी कम हो गए हैं। कॉलेजों में जनरल कैटिगरी के एडमिशन पहले ही काफी ज्यादा हैं और अगर यूनिवर्सिटी सीटों के कन्वर्जन का निदेर्श देती भी है तो भी बहुत सारे कॉलेजों में जनरल के लिए एडमिशन ओपन नहीं किए जाएंगे।
रामलाल आनंद कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विजय कुमार शर्मा का कहना है कि हर कोर्स में जनरल के एडमिशन तय सीटों से काफी ज्यादा हो गए हैं। ओबीसी की करीब 50 सीटें हैं और इन सीटों पर जनरल कैटिगरी के स्टूडेंट्स को एडमिशन नहीं दिया जाएगा। दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एस. के. गर्ग का कहना है कि बीकॉम ऑनर्स, फिजिक्स ऑनर्स, केमिस्ट्री ऑनर्स समेत सभी कोर्सेज में जनरल के एडमिशन सीटों से कहीं ज्यादा हैं और सीटें कन्वर्ट होने का कोई सवाल ही नहीं है(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,26.7.11)।

राजस्थानःशिक्षक तबादला आवेदन के लिए एक और मौका

Posted: 26 Jul 2011 01:10 AM PDT

राज्य सरकार ने शिक्षकों को इच्छित स्थान पर तबादला आवेदन के लिए एक और मौका दिया है। इस संबंध में प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक ने सोमवार को एक आदेश जारी किया। इसके अनुसार सभी उपनिदेशकों व जिला शिक्षा अधिकारियों को अवगत कराया गया है कि वे शिक्षकों से तबादला आवेदन-पत्र अब 31 जुलाई तक प्राप्त कर सकते हैं।
इसके बाद संकलित सूचना निर्धारित प्रपत्र में तैयार कर पांच अगस्त तक शिक्षा निदेशालय भेजने होंगे। आदेश में साफ किया गया है कि प्रबोधकों के तबादला आवेदन-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएं, क्योंकि ये पद संबंधित विद्यालयों के ही आवंटित हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सात जुलाई को एक आदेश जारी कर शिक्षकों से तबादलों के लिए आवेदन मांगे थे तथा इसकी अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित की थी। उक्त तिथि तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में तबादला आवेदन-पत्रों के ढेर लग गए। इसके बावजूद कई शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह गए। इसके मद्देनजर निदेशालय ने अब अंतिम तिथि बढ़ा दी है(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,26.7.11)।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालयःबीए-2 का रिजल्ट लीक

Posted: 26 Jul 2011 01:08 AM PDT

एचपी यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त नाहन कॉलेज में बीए सेकंड का रिजल्ट लीक होने से यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है। यूनिवर्सिटी की ओर से अभी बीए द्वितीय का परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हुआ है जबकि कॉलेज में शनिवार को ही रिजल्ट पहुंच गया है। अधिकतर छात्रों ने अपना रिजल्ट पता भी कर लिया है। रिजल्ट लीक होने से यूनिवर्सिटी की सीक्रेसी पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन समय के भीतर रिजल्ट तैयार तो नहीं कर पाया, लेकिन लीक जरूर हो गया है। सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों के पास यह रिजल्ट पहुंचा है, वह कंप्यूटर से निकाला गया है। तीन पेजों का यह रिजल्ट कैसे लीक हुआ, इस पर सवाल खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रविवार को स्थापना समारोह के बाद रिजल्ट लीक होने को लेकर एक आपातकालीन बैठक भी हुई।

पिछले साल भी हुआ था : पिछले साल भी इस कॉलेज का बीए प्रथम वर्ष का रिजल्ट लीक हो गया था। छात्रों ने रिजल्ट निकलने से पहले ही रिजल्ट पता कर लिया था। इसी तरह यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग का रिजल्ट भी घोषित होने से पहले ही लीक हो गया था। उधर, नाहन कॉलेज के छात्र संगठन इसे एक दूसरे की कारगुजारी बता रहे हैं। कुछ छात्रों ने इसकी परीक्षा नियंत्रक को भी शिकायत कर दी है।


एबीवीपी मंगलवार को इस बारे में विरोध प्रदर्शन भी करने जा रही है। इकाई के प्रांतमंत्री अजय भेरटा का कहना है कि नाहन कॉलेज में बीए सेकंड का रिजल्ट पहुंचना विवि कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में परीक्षा नियंत्रक को शिकायत कर दी है।

जिस स्तर पर रिजल्ट लीक हुआ है, उसका पता लगाया जाएगा। मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. नरेंद्र अवस्थी, परीक्षा नियंत्रक

यदि रिजल्ट लीक हुआ है तो इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. एडीएन वाजपेयी, कुलपति एचपीयू(दैनिक भास्कर,शिमला,26.7.11)

बिहारःचालक सिपाही नियुक्ति के नियमों में संशोधन

Posted: 26 Jul 2011 01:07 AM PDT

बिहार पुलिस व सैन्य पुलिस में चालक सिपाही के नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन किया गया है। जो भी बहालियां होंगी वे नए नियम के आधार पर की जाएंगी। बिहार पुलिस हस्तक-1978 का नियम-1186 का खण्ड (क) में किए गए संशोधन के मुताबिक सामान्य से लेकर आरक्षित वर्ग तक के लिए अधिकतम आयु सीमा को बढ़ा दिया गया है। संशोधन के मुताबिक सामान्य कोटि के उम्मीदवारों के लिए उम्र सीमा 18 से 23 वर्ष की जगह 18 से 30 वर्ष कर दी गई है। इसी तरह पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को उम्र सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। यानी न्यूनतम 18 और अधिकतम उम्र 33 निर्धारित की गई है। अनारक्षित कोटि की महिलाओं को भी उम्र सीमा में इसी तर्ज पर 3 वर्ष की प्राप्त होगी। वहीं अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के 18 वर्ष से लेकर 35 वर्ष तक के पुरुष और महिला चालक सिपाही पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन्हें उम्र सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की गई है। चालक सिपाही के लिए आवेदन करने वालों की शैक्षणिक योग्यता कम से कम 10 वीं उर्त्तीण या इसके समकक्ष होनी चाहिए। उम्मीदावरों के लिए ऊंचाई भी निर्धारित की गई है। इसके तहत अनारक्षित, पिछड़ा,अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पुरुष के लिए न्यूनतम 165 सेमी होगी। वहीं भारतीय मूल के गोरखा को सिर्फ (बि.सै.पु 1) में 160 सेमी निर्धारित की गई है। वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई 162 सेमी होनी चाहिए। जबकि सभी वर्ग की महिलाओं की न्यूनतम ऊंचाई 153 से.मी निर्धारित की गई है(राष्ट्रीय सहारा,पटना,26.7.11)।

कुमाऊं विवि में अफवाहें सरगर्म

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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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