BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Thursday, June 13, 2013

खाद्य सुरक्षा विधेयक पर अध्यादेश का फैसला टला

खाद्य सुरक्षा विधेयक पर अध्यादेश का फैसला टला

Thursday, 13 June 2013 15:06

नयी दिल्ली। इस विधेयक को अध्यादेश के जरिए लागू करने के प्रस्ताव पर आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में अलग अलग मत उभरने के मद्देनजर अध्यादेश का इदारा फिलहाल छोड़ दिया गया।

सरकार बहुप्रतीक्षित महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा विधेयक को पारित करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। 
खाद्य सुरक्षा विधेयक संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिल से जुड़ी योजना है। लम्बे समय से प्रस्तावित इस योजना को अध्यादेश के जरिए लागू करने के प्रस्ताव पर 
मंÞित्रमंडल में कोई फैसला न होने के बाद तय किया गया कि इस विधेयक को संसद के विशेष अधिवेशन के जरिए पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन जुटाया जाए।  
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि गृह मंत्री एवं लोकसभा के नेता सुशील कुमार शिंदे, संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ एवं खाद्य मंत्री के वी थॉमस इस महत्वपूर्ण कानून को पारित करने के लिए विपक्षी नेताओं से मिल कर उनका समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे। 
उन्होंने कहा, ै खाद्य सुरक्षा विधेयक तैयार है। हम इसे विधेयक के रूप में पारित करना चाहेंगे लेकिन विधेयक का अध्यादेश-संस्करण भी तैयार है। हमने आज फैसला किया कि विपक्षी दलों से एक बार और मिल कर उनसे पूछने का प्रयास हो कि क्या वे संसद के विशेष सत्र में इस विधेयक को पारित करने के लिए वे अपना सहयोग प्रदान करेंगे। ै
थॉमस ने कहा कि अध्यादेश का मार्ग पूरी तरह से छोड़ा नहीं गया है और सरकार के पास यह एक विकल्प के रूप में मौजूद रहेगा।
खाद्य सुरक्षा विधेयक को संसद के पिछले बजट सत्र में संसद में पेश किया गया था पर विभिन्न कथित घोटालों को लोक सभा में हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी। 
इस विधेयक का उद्देश्य देश की 67 प्रतिशत आबादी को राशन की दुकानों के जरिये 1से3 रच्च्पये प्रति किग्रा की निर्धारित दरों पर प्रति माह पांच-पांच किग्रा खाद्यान्न प्राप्त करने का कानूनी अधिकार दिलाना है।  

चिदंबरम ने कहा कि अगर विपक्षी दलों का समर्थन मिला तो इस खाद्य विधेयक को संसद के विशेष सत्र में पारित कर दिया जायेगा।
मंत्री ने कहा, ै मुख्य विपक्षी दल के जवाब के आधार पर हमें आगे हमें निर्णय करना होगा। हमारा इरादा है कि इसे संसद के विशेष सत्र में इसे पारित कराया जाए। हम विपक्षी दलों से जानने का एक और प्रयास कर रहे हैं कि वे हमारा समर्थन करते हैं या नहीं। ै
चिदंबरम ने कहा कि अगर विपक्षी दल संसद में विधेयक को पारित करने के लिए सहमत होते हैं,'तो इसके लिए विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, हम विधेयक को यथाशीघ्र पारित करना चाहेंगे।'
अलग से बातचीत के दौरान थॉमस ने कहा, ै हमने यह फैसला इस लिए किया है क्योंकि भाजपा सहित कई राजनीतिक दलों ने अनुरोध किया है कि इस पर संसद में चर्चा कराई जानी चाहिए।  ै
थॉमस ने कहा, ै प्रधानमंत्री ने सभी से परामर्श किया है, इसलिए हमने फैसला किया है कि संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाये... बात केवल यह है कि राजनीतिक दलों को एक सकारात्मक नजरिया अपनाना चाहिये। ै
थॉमस ने कहा कि अध्यादेश का प्रस्ताव अभी भी मंत्रिमंडल के पास है, ै हम अध्यादेश पर फैसले को टाल रहे हैं पर इसे वापस नहीं लिया गया है... हम सभी राजनीतिक दलों से :खाद्य विधेयक के बारे में: विचार विमर्श शुरच्च् करेंगे और अगर वो सहयोग करने के इच्छुक हैं, तो हम संसद का एक विशेष सत्र बुलायेंगे। ै
खाद्य विधेयक लाने का प्रस्ताव कांग्रेस के वर्ष 2009 के आम चुनाव का चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा था। कांग्रेस का मानना है कि यह अगले लोकसभा चुनाव में उसके लिए ''तुरच्च्प का पत्ता'' साबित हो सकता है।
खाद्य विधेयक को लागू करने के लिए सरकार को हर वर्ष 6.2 करोड़ टन खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। इससे राजकोष पर वर्ष भर में 1.25 लाख करोड़ रच्च्पये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आयेगा जो मौजूदा सब्सिडी बोझ स्तर से 25,000 करोड़ रच्च्पये अधिक होगा।

No comments:

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...