BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Tuesday, June 11, 2013

प्रेसीडेंसी से इतिहासविद बेंजामिन जकारिया की विदाई!

प्रेसीडेंसी से इतिहासविद बेंजामिन जकारिया की विदाई!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


जिन हालात में फेसबुक मंतव्य के लिए विख्यात इतिहासविद बेंजामिन जकारिया की प्रेसीडेंसी कालेज से विदाई हो गयी, उससे यादवपुर विश्वविद्यालट के शिक्षक अंबिकेश महापात्र की याद ताजा हो गयी। लेकिन इस मामले को लेकर सिविल सोसाइटी की खोमोशी हैरत में डालने वाली है। इंग्शेलैंड के शेफील्ड विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई इतिहास के शिक्षक पद से इस्तीफा देकर स्वायत्त विश्वविद्यालय प्रेसीडेंसी के बुलावे पर वहां की पक्की नौकरी छोड़कर चले आये बेंजामिन जकारिया के साथ जो सलूक परिवर्तन राज में हुआ , वह न केवल शर्मनाक है, बल्कि प्रेसीडेंसी कालेज की उपकुलपति मालविका सरकार जैसी विदुषी प्रशासक की साख को बट्टा लगाने वाला है। प्रेसीडेंसी के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों में बेंजामिन की भारी लोकप्रियता उनकी आधुनिक दृष्टि और शिक्षा की विशिष्ट शैली की वजह से है। वे सारे छात्र उनके पक्ष में हैं। बेंजामिन पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण करना चाहते थे, जिसके खिलाफ में हैं इतिहास विभाग के बाकी शिक्षक। इसको लेकर लंबे अरसे से खींचातानी चल रही थी।प्रेसीडेंसी के 158 साल के इतिहास में किसी अध्यापक को इस तरह हटाये जाने की कोई नजीर नहीं है।


बेंजमिन ने केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से पीएचडी की और लगातार ग्यारह साल तक शेफील्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाने से इतनी प्रतिष्ठा अर्जित की प्रेसीडेंसी से उन्हें शिक्षकता का आमंत्रण भेजा गया। अब बेंजामिन के साथ जो सलूक हुआ और राज्य के विश्वविद्यालयों में राजनीति जिस कदर हावी है, जैसे वर्चस्ववादी गिरोहबंदी है, इस वारदात के बाद राज्य के किसी विश्वविद्यालय से विदेश की क्या कहें, देश के दूसरे विश्वविद्यालयों को कोई आने को तैयार होगा या नहीं, यह शंका पैदा हो गयी है।


वैसे प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय ने बैंजामिन को इतिहास विभाग का अध्यक्ष बनाने का वायदा करके बुलाया था।लेकिन शायद बेंजामिन को बंगाल के वर्चस्ववादी अकादमिक जगत के बारे में मालूम हीं नहीं था। उन्हें अध्यक्ष पद तो दिया ही नहीं गया बल्कि शुरु से उनके खिलाफ मोर्चाबंदी होती रही। जिसपर दुःखी बेंजामिन ने फेसबुक वाल पर मंतव्य कर दिया। जिसके आधार पर पर मालविकादेवी ने उन्हें हटाने का फैसला किया और बेंजामिन इस्तीफा देकर चले गये। बंगाल में इतिहास चर्चा की यह अपूरणीय क्षति है।


प्रेसीडेंसी के अध्यापकों की लेकिन बेंजामिन जकारिया के खिलाफ ढेरों शिकायतें हैं। आरोप है कि बेंजामिन ने  वरिष्ठ प्रेफेसर रजत राय केसाथ अभव्य आचरण किया है। इसे लेकर उपकुलपते से शिक्षकों ने शिकायत की। इसपर उपकुलपति ने ईमेल के जरिये बर्खास्तगी का संदेश देते हुए बेंजामिन को लिखा कि उनका और प्रेसीडेंसी कालेज का एक साथ कोई भविष्य नहीं है। इसपर बेंजामिन ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा फेसबुक पर भी पोस्ट कर दिया। इसतरह छह महीने के भीतर बेंजामिन कथा का पटाक्षेप हो गया।


अपने इस्तीफे में बेंजामिन ने प्रेसीडेंसी में अव्यवस्था का आरोप लगाया है और तरह तरह की अनियमितताओं का आरोप भी।परीक्षाओं मे गड़बड़ी के भी उन्होंने आरोप लगाये हैं।उपकुलपति मालविका सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।बेंजामिन के मुताबिक रजनीकांत सर उनके अध्यापक रहे हैं और उनसे दुर्व्यवहार का सवाल ही नहीं उटता। रजत बाबू ने भी इस सिलसिले में कोई शिकायत नहीं की है।उन्होंने अखबारों के जरिए उनके खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप भी लगाया।


कुल मिलाकर प्रेसीडेंसी में कोई भारी गड़बड़ी चल रही है, जिसके चलते पिछले चार महीने में चार चार विद्वान शिक्षक प्रेसीडेंसी छोड़कर चले गये।इसके अलावा अनेक शिक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं और उनके भी विश्वविद्यालय छोड़ देने की आशंका है। छात्रों में अपने अनिश्चित भविष्य को लेकर इस सिलसिले में भारी आशंका है और विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।



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