BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Friday, July 13, 2012

गुवाहाटी के हाट में 'इज्जत' गई बिकाय

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गुवाहाटी के हाट में 'इज्जत' गई बिकाय

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सचमुच यह शॉकिंग विडियो है. एक लड़की को सरे बाजार आधी रात को कुछ लोग मिलकर घसीट रहे हैं. एक बार वह उन लोगों से अपना पीछा छुड़ाकर भागती है तो घसीटनेवाले लोग उसे दोबारा से पकड़कर वहां ले आते हैं जहां कोई अज्ञात पत्रकार अपने वीडियो कैमरे के साथ मौजूद है. कोई चालीस पचास सेकेण्ड की इस छीना झपटी की सनसनी ऐसी कि गृहमंत्री को असम के डीजीपी को डांट पिलानी पड़ गई. लेकिन क्या सचमुच उस लड़की की इज्जत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया गया? या कहानी कुछ और है?

असल कहानी क्या है यह तो बहुत बाद में पता चलेगा. और शायद जब तक पता चलेगा तब तक हमें फुर्सत नहीं होगी कि हम पलटकर उसकी सच्चाई को जान समझ सकें. लेकिन जिस 3 मिनट 22 सेकेण्ड के एक विडियो से यह खबर सनसनी की तरह फैली वह एक स्थानीय पत्रकार द्वारा बनाया गया विडियो है. नार्थ ईस्ट के इस न्यूजलाइव टीवी के रिपोर्टर जो "संयोग" से उस वक्त वहां मौजूद थे उन्होंने विडियो शूट किया है. फिर बाइट भी ली है.

इस विडियो को शूट करने के बाद मसालेदार खबर तैयार की गई. बढ़िया बैकग्राउण्ड म्यूजिक देने के अलावा उन चेहेरों पर लाल निशान भी लगाया गया है जो उस लड़की के साथ बदसलूकी कर रहे हैं. कुछ कुछ उसी स्टाइल में जैसे इधर हमारे दिल्ली के चैनलवाले करते हैं. अगर आप विडियो ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे कि इसमें एक दो अधेड़ उम्र के आदमी भी है जो सिर्फ खड़े है लेकिन विडियो में उनके ऊपर भी लाल निशान लगाकर उसे गुनहगार बताया जा रहा है. कुछ आनेजाने वाले तो सिर्फ तमाशबीन बने हुए हैं. विडियो के आखिर में जब पुलिस उस लड़की को बचाकर ले जाने लगती है तो उसके साथ इस पत्रकार का एक संक्षिप्त सवाल जवाब भी है जिसने यह खबर ब्रेक की है. 

घटना सोमवार रात की है लेकिन दिल्ली पहुंचते पहुंचते शुक्रवार हो गया. इस न्यूज लाइव चैनल का मुख्यालय गुवाहाटी में ही है लेकिन इनका दिल्ली के हौजखास में भी एक आफिस है. आसाम से दिल्ली के बीच की इस दूरी को पूरा होने में करीब चार पांच दिन लग गये लेकिन जब दिल्ली में हंगामा हुआ तो इंसानियत की इस "दरिंदगी" को सामने लाने का सारा क्रेडिट न्यूजलाइव टीवी को चला गया.

ज्यादा तथ्य तो सामने अभी तक भी नहीं आ पाये हैं लेकिन न्यूज लाइव का विडियो ही कई तरह के संदेह पैदा करता है. अगर आप विडियो ध्यान से सुनेंगे तो पायेंगे कि उसमें उस लड़की से कोई पूछ रहा है कि तुमने पिया है. कहां पिया है. पी के आ रही हो. जो लोग उस लड़की से यह पूछताछ कर रहे हैं वे हिन्दी में बोल रहे हैं और उनका लहजा और शैली बता रहा है कि वे बिहार मूल के लोग हैं. असम में बड़ी संख्या में बिहारी रहते हैं और बिहारियों और असमियों के बीच पुरानी दुश्मनी है. अब यहां एक सच यह हो सकता है कि सचमुच बिहार मूल के इन लोगों ने उस लड़की से छेड़खानी की हो या फिर दूसरा सच वह भी हो सकता है जो हमें दिखाया या बताया नहीं जा रहा है.

उस लड़की को घसीटनेवाले लोग जिस अंदाज में उस मौसमी शर्मा नाम की लड़की का कहना है कि वह अपनी एक दोस्त के बर्थडे पार्टी में आई थी. उसके दोस्त की बर्थडेपार्टी कहां थी, यह उस विडियो में नहीं बताया गया है लेकिन सारा घटनाक्रम जिस मिन्ट क्लब के सामने फिल्माया गया है हो सकता है यह जन्मदिन पार्टी उसी मिन्ट क्लब में रखी गई हो. तो क्या मौसमी शर्मा सचमुच एक नाबालिग, मासूम और अबला लड़की है जिसकी इज्जत पर आधी रात को डाका डालने की कोशिश की गई है? उसके हाव भाव शक पैदा करते हैं. मिस्टर होम मिनिस्टर को तो सबसे पहले उस लड़की की सच्चाई का ही पता करना चाहिए कि क्या वह जो कह रही है वही है? जिस अंदाज में उसने वहां मौजूद पत्रकार से बात की और बात करते वक्त अपने बालों से अपने चेहरे को ढंक लिया वह किसी नाबालिग और मासूम लड़की को सूझ भी नहीं सकता. फिर भी, यह तो जांच का विषय होना चाहिए कि उस लड़की के साथ जो हुआ उसकी सच्चाई क्या है?

अगर सच्चाई वही है जो बताई जा रही है तो निश्चित रूप से उन सारे विद्वत जनों के विचारों का स्वागत किया जाना चाहिए जो उस घटना को नारी अस्मिता की रक्षा और कानून व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं. लेकिन खुदा न करें, सच्चाई कुछ और हुई तो क्या होगा? जिस तरह से इस घटना के बाद असम के नौजवानों ने असम से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन शुरू किया है वह कहीं और संकेत भी करता है. जिन लोगों को लाल घेरे में लिया जा रहा है वे बिहार मूल के लोग हैं. तो क्या इसके बाद एक बार फिर असम में असमिया बनाम बिहारी की लड़ाई को आग लगाई जाएगी? टीवीवालों का क्या है. उनके पास तो एक बाइस्कोप है जिसमें उन्हें किसिम किसिम का तमाशा दिखाना होता है. इस घटना की ईमानदार पड़ताल करने की हिमायत भला क्यों करेंगे? अगर आधी रात को ग्यारहवी में पढ़नेवाली लड़की के साथ छेड़छाड़ होती है तो यह औरत की इज्जत पर सरेआम डाका है. "वहशीपन और दरिंदगी" की इंतहा है. लेकिन टीवी के तमाशाई यह क्यों नहीं पूछते कि आधीरात वह नाबालिग लड़की अकेली किसी बार में किस दोस्त का जन्मदिन मनाकर लौट रही है कि लोगों ने उस पर कुछ और ही शक कर लिया. 

अगर वह लड़की मासूम नहीं है तो भी उसके साथ पूरी सहानुभूति होनी चाहिए. किसी भी लड़की को पूरा हक है कि वह जैसे जीना चाहे वैसे जिए. जैसे पीना चाहे वैसे पिये. लेकिन अगर आधे सच के साथ किसी घटना को तमाशा और तमाशे को इज्जत के मुंह पर तमाचा बना दिया जाए तो क्या कहेंगे? गुवाहाटी में "इज्जत" उतारने की कोशिश तो हुई लेकिन किसकी? उस लड़की की इज्जत के साथ कौन खेल कर रहा है? वे लोग जो उस वक्त सड़क पर खाली हाथ उस लड़की के साथ छीना झपटी कर रहे थे या फिर वे जो चुपचाप इस छीना झपटी को फिल्माने में लगे थे. क्या बीस तीस लोग बीच सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही और सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में एक लड़की के साथ बलात्कार करने की कोशिश कर रहे थे? क्या सच्चाई सचमुच इतनी फिल्मी है? जज्बाती होकर मत सोचिए. शुकुन से सोचिए. सच्चाई और तमाशे के बीच फर्क के कई सारे पहलू सामने आ जाएंगे

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