BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Monday, October 24, 2011

Fwd: दिल्ली दरबार में नीतीश को याद आयी बिहार की गरीबी, कहा- बिहार विशेष राज्य के दर्जे का हकदार



---------- Forwarded message ----------
From: nawal kumar <nawal.buildindia@gmail.com>
Date: 2011/10/23
Subject: दिल्ली दरबार में नीतीश को याद आयी बिहार की गरीबी, कहा- बिहार विशेष राज्य के दर्जे का हकदार
To: secy@prdbihar.org


respected sir,

please read this report only on www.apnabihar.org

with regards,
दिल्ली दरबार में नीतीश को याद आयी बिहार की गरीबी, कहा- बिहार विशेष राज्य के दर्जे का हकदार
Text Box: आईये हम सब मिलकर अपने बिहार को विकसित बिहार बनायें।

बिहार का एकमात्र दैनिक हिंदी न्यूज पोर्टल

खबरें बिहार के सतत विकास की

Text Box: Special  Reports

क्या राष्ट्रपति के रुप में राजेंद्र बाबू ने तोड़ी थी पद की मर्यादा?

पूरी रिपोर्ट पढने के लिये यहां क्लिक करें

बिहार में अपराध

अपना बिहार और राज्य में प्रकाशित विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार कल दिनांक23 अक्टूबर सितम्बर  2011 को घटित घटनाओं की संख्या

 

 

 

Text Box: सोमवार, 24 अक्तूबर 2011 Text Box: Your Ad Here

आज की खबरें

· भारत में भी "वाल स्ट्रीट" जैसे हालात – दीपांकर

· सीएम ने कहा- राइट टू रिकाल तो ठीक, लेकिन राइट टू रिजेक्ट पल्ले नहीं पड़ता

· इरोम के समर्थन में पटना पहूंचा एक कारवां

· पुरानी रंजिश में मासूम बालक की निर्मम हत्या

· मछली मारने के विवाद में किशोर की पीट-पीटकर हत्या

· पत्रकार को गोली मारी

· कटघरे में है नीतीश सरकार – दीपांकर

· एक स्कूल की कहानी, छात्र की जुबानी, छात्र ने अपना बिहार को लिखा पत्र

· दिल्ली दरबार में नीतीश को याद आयी बिहार की गरीबी, कहा- बिहार विशेष राज्य के दर्जे का हकदार

· किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये की अनियमितता

· होटल के कमरे में मिली एक ही परिवार के पांच सदस्यों की लाश

· आरटीआई को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की अनुशंसा

· भड़क गईं जे डी वीमेंस कालेज की छात्रायें

· दानापुर में युवक को दिनदहाड़े गोली मारी

· अस्तित्व के लिये तरस रहा सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय

· सीधी बात- नीतीश जी अब भीख मांगने का समय नहीं रहा

· श्याम रजक ने भी माना, सूबे में नहीं है सुशासन, डिलीवरी ब्वाय की होगी नियुकित

· विजय माल्या की बीयर फ़ैक्ट्री का जनता ने किया विरोध

· स्टील कंपनी में दिनदहाड़े डाका

· पुलिसिया मुन्नीबाई के फ़ेर में हाजत पहुंचे 10 मनचले

· विशेष रिपोर्ट - 1073 लोगों के यहां नहीं मनेगी दीपावली

· अनसुलझी पहेली साबित हो रही है राहुल गौतम की हत्या

· ठेकेदार हत्याकांड मामले में पुलिस को मिली संदिग्ध सफ़लता

· डान बास्को स्कूल के छात्र के अपहरण की आशंका

· आखिरकार राजीव ही निकला अपनी पत्नी का हत्यारा

· गया में पैक्स अध्यक्ष को गोलियों से भूना

· अपनी बात – जश्न मनाइये, गद्दाफ़ी का अंत हो गया

· हिंसक और बेकाबू हुई सूबे की जनता, डीजीपी ने रोया रोना

· चलनी चाहिये मेरी दूकानदारी – शाही

· जनता सरकार बदल सकती है, संविधान नहीं – खुर्शीद

· अधिवक्ता पुत्र की हत्या

· सासाराम में पत्थर व्यवसायी की गोली मारकर हत्या

· नियुक्त होंगे 12 हजार डाक्टर

· पीएमसीएच में कर्मचारियों से फ़िर भिड़े मरीज के परिजन

· पुलिसिया मुन्नीबाई के लटके-झटके में फ़ंस गये दस मनचले

· साक्षात्कार के लिये रुपम पाठक ने किया अनुरोध

· पटना डेयरी की तानाशाही के आगे लाचार हुए गौपालक

· कूड़े में बम विस्फ़ोट से तीन बच्चे घायल

· वैशाली में महादलित मजदूर की पीट-पीटकर हत्या]

· पुलिस-पब्लिक मुठ्भेड़ में 5 मरे

· बिहार का नया डान बना बिन्दू सिंह

· जेनेवा में नीलाम हो रही राजेन्द्र बाबू की अनमोल घड़ी

· कानोंकान – सुशासन बाबू देख रहे हैं आजकल डरावने सपने

· हाईकोर्ट ने भी माना बियाडा मामले में हुई गड़बड़ी

· जे पी सम्मान पेंशन मामले में हलफ़नामा दायर करने का निर्देश

· लालू-नीतीश करेंगे सूबे में यात्रा

· शिक्षा की कहानी, टापर्स की जुबानी, पी के शाही के पैरों तले जमीन खिसकी

· सूबे में चलेंगे सीएनजी वाहन – मोदी

 विशेष रिपोर्ट

भ्रष्टाचार की नई मिसाल

नीतीश मेहरबान तो गोपा बनीं पहलवान

स्थापना के पहले ही नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में मची है करोड़ों की लूट

विशेष रिपोर्ट – सुशासक के चेहरे पर करारा तमाचा है जीडीपी ग्रोथ और इसकी सच्चाई

संपादकीय – दलितों और पिछड़ों की एकजूटता आवश्यक

अपनी बात – सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है टीम अन्ना के खिलाफ़ हमला

· बिहार में भ्रष्टाचार उन्मूलन यानी खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा 40 करोड़ रुपये का

· नगर विकास एवं आवास विभाग में जारी है एक महाघोटाला

· सीधी बात – बिहार को चीन बनाने के लिये आपको माओवादी बनना होगा नीतीश जी

· बिहार के विकास के सारथि- The changing agents of Bihar

· नवल की बतकही – बिहार से गरीबी दूर करने के सात अचूक उपाय

· सम्पूर्ण क्रांति की कहानी, तीन दोस्तों की जुबानी

· छोटे राजा की मजबूरी और चालाकी

पत्रकार को मारी गोली

सहरसा (अपना बिहार, 24 अक्टूबर 2011) – सहरसा के सोनबरसा राज प्रखंड में दैनिक जागरण के स्थानीय पत्रकार राजेश रंजन उर्फ़ मुन्ना को अपराधियों ने उस समय गोली मार दी, जब वे समाचार संकलन का कार्य कर रहे थे। मिली जानकारी के अनुसार सशस्त्र अपराधियों ने मुन्ना पर 6 गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली मुन्ना के जांघ में लग गया और वे घटनास्थल पर गिर पड़े। बाद में स्थानीय निवासियों ने मुन्ना को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। फ़िलहाल मुन्ना का जीवन खतरे से बाहर बताया गया है। इधर पुलिस ने भी पूरे मामले की तहकीकात शुरु कर दी है।

 

Text Box: सच और यथार्थ में अंतर होता है। उसका सच यह है कि वह कभी डाकू हुआ करता था। आज का यथार्थ है कि जम्मू-कश्मीर के लोग उसे गांधी मानकर अलगाववाद की राह त्यागकर राष्ट्रनिर्माण में जूट गये हैं। वह कोई औपन्यासिक चरित्र नहीं, बल्कि करीब 75 वर्ष के भाई सुरेश चंद्र हैं। इनके अपने प्रदेश यानी उत्तरप्रदेश में लोग इन्हें भाई सुरेश चंद्र सर्वोदयी के नाम से जानते हैं तो जम्मू-कश्मीर के लोग इन्हें अपना गांधी मानते हैं। भाई सुरेश चंद्र के डाकू से गांधी बनने की कहानी भी अत्यंत दिलचस्प है। स्नातक तक की शिक्षा अर्जित करने वाले भाई सुरेश चंद्र का जन्म उत्तरप्र्देश के महोबा जनपद के सूपा नामक गांव में हुआ। युवावस्था में शहीदे आजम भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने गांव में व्याप्त सामंतशाही व्यवस्था के खिलाफ़ हिंसक विद्रोह का बिगूल फ़ूंक दिया। इस दौरान इन्होंने अनेकों बार डकैतियां की और कई मामलों में हत्या के आरोपी भी रहे। एक बार भाई सुरेश चंद्र गिरफ़तार कर जेल भेजे गये। लेकिन जेल की दीवारें उन्हें रोक न सकीं। वे जेल से फ़रार हो गये। फ़िर कुछेक सालों तक जेल बाहर रहने के बाद दुबारा पकड़े गये और अदालत ने उन्हें उम्र कैद की सजा दी। वे जेल से भागने की तैयारी में जूटे थे, लेकिन जेल में बंद एक कैदी के पास डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा लिखित पुस्तक

नवल की पांच कवितायें

(1)

ठुंठे पेड़ के शिखर पर,

एक नया पीपल उग आया है,

पेड़ का ठुंठापन अब दूर हो गया है,

अखबारों ने ऐसा दावा किया है,

पेड़ की शिकायत है कि,

उसकी जड़ें अब उखड़ने लगी हैं।

(2)

गांव में दो मन्दिर है,

एक में लोग पूजा करते हैं,

दूसरे का इस्तेमाल बच्चे करते हैं,

लोगों का मन्दिर भव्य है,

आकर्षक है,

भारी चढावा भी जमा होता है,

बच्चों का मंदिर बदहाल है,

सुना है वहां,

निर्जीव मूर्दे नहीं रहते।

(3)

बीच सड़क कपड़ा बदलने,

अर्द्धनग्न हो स्नान करने,

सार्वजनिक रुप से हमबिस्तर होने वाली,

गरीब महिलायें अधिक इज्जतदार हैं,

उन महिलाओं से,

जो अट्टालिकाओं में,

रोज अपना पार्टनर बदलती हैं।

(4)

मरते समय उसने कहा था,

वह जिन्दगी का मुख चूमना चाहता है,

जिन्दगी उसके पास आयी,

लेकिन दरवाजे से ही लौट गई,

क्योंकि,

मरने वाले ने पहले ही मूंह फ़ेर लिया था।

(5)

इक्कीसवीं सदी के कुरुक्षेत्र में,

सारथि बने पार्थ,

महान धनुर्धर कृष्ण को,

धर्मयुद्ध की शिक्षा दे रहे हैं,

कृष्ण लाचार, पार्थ भी लाचार,

गीता भी अब असरकारक नहीं रही,

सुना है,

अब लड़ाई के मायने बदल गये हैं।

कुछ कही कुछ अनकही सी लगती है

दिन सूने रातें सूनीं,

ये जिन्दगी सूनी सूनी सी लगती है,

व्क्त की बेरहमी है,

कुछ कही कुछ अनकही सी लगती है।

इमारतों के पिछवाड़े ,

एक श्मशान और एक कब्रिस्तान भी है,

सुना है वहां आजकल,

बेचारी मौत भी बुझी बुझी सी रहती है।

जिन्दगी को युं ही प्यार करना,

आसान नहीं होता हरदम,

कभी कभी अपनों की,

पाक वफ़ा भी भीतरघात सी लगती है।

सुपूर्द-ए-खाक हो जाना मजबूरी है,

जीते जी जिनके लिये,

सुना है उनके टूटे कब्र में भी,

पेट में एक आग सी जलती है।

गढने वालों ने गढ दिये हैं,

नाटक में कुछ और अनजने किरदार,

अपनी हालत अब हाशिये पर,

सोई बेजान ठठरियों सी लगती है।

लोग कहते हैं सुबह के सपने,

अक्सर सच हो जाया करते हैं,

सपने टूटते हैं तो,

टूटने की आवाज कुछ अपनी सी लगती है।

नदी में बह रहा अथाह पानी,

अब जिनकी आंखों में उतर आया है,

जीवन जीना या फ़िर मर जाना,

सब एक ही बात सी लगती है।

"नवल" अच्छा है कि समय रहते,

तुमने कांटों से दोस्ती कर ली,

फ़ूलों के सहारे जिन्दगी,

कभी अपनी कभी बेगानी सी लगती है।

अस्तित्व के लिये तरस रहा सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय

जमुई (अपना बिहार, 23 अक्टूबर 2011) – एक साल पहले बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार ने उग्रवाद प्रभावित जमुई जिले में सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय की स्थापना की। सरकार की मुहिम यह थी कि इसे नेतरहाट और नवोदय के रुप में स्थापित किया जाये। लेकिन अपनी स्थापना के एक साल के बाद भी कथित तौर पर हाइटेक आवासीय विद्यालय उपेक्षित है। इसकी उपेक्षा इसलिये भी उल्लेखनीय है कि इस स्कूल में गरीबों के बच्चे नहीं पढते। इस स्कूल में पढने वाले अधिकांश बच्चे नौकरशाहों की संतान हैं।

स्कूल की उपेक्षा की बात करें तो स्कूल द्वारा एक साल पूरा होने पर एक स्मारिका का प्रकाशन किया गया है। इस स्मारिका के संपादकीय में स्कूल के प्रिंसिपल डा शंकर कुमार ने स्कूल की बदहाली का जिक्र किया है। इन्होंने अपने संपादकीय में लिखा है कि अभी तक सिमुलतल्ला आवासीय स्कूल किराये के मकान में चल रहा है और स्कूल कैंपस के निर्माण के लिये कोई कोशिश शुरु नहीं की गई है। इन्होंने इसका जिक्र भी किया है कि स्कूल के सभी शिक्षक प्राइवेट स्कूलों के जैसे अनुबंध पर बहाल किये गये हैं, जिनका मानदेय भी सम्मानजन्क नहीं है। एक साल पूरा होने के बावजूद भी अभी तक शिक्षकों की सेवा शर्तों का निर्धारण नहीं किया गया है। हालांकि डा शंकर ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त किया है कि तमाम प्रतिकुलताओं के बावजूद स्कूल के शिक्षकों की लगन के बूते बच्चों ने एक मिसाल पेश किया है। बताते चलें कि स्कूल में प्रत्येक वर्ष 60 लड़कों और 60 लड़कियों का चयन कर उन्हें निशुल्क स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराया जाना है। स्कूल में आधारभूत संरचनाओं की कमी के कारण दूसरे वर्ष में बच्चों का प्रवेश नहीं लिया जा रहा है। वैसे खास बात यह है कि स्कूल के पास अपना कोई वाहन भी नहीं है जो आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को अस्पताल भी ले जा सके।

बहरहाल, खास खबर यह है कि सिमुलतल्ला आवासीय स्कूल के नाम पर 7 करोड़ रुपये की लूट हो चुकी है। इस संबंध में एक मामला सीएजी की रिपोर्ट में भी उल्लेखित है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस लूट की जांच करवाने का साहस करेगी। मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा के नाम पर होने वाले इस लूट में स्कूल प्रबंधन से लेकर मुख्यमंत्री तक शामिल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिमुलतल्ला आवासीय स्कूल में पढ रहे बच्चों का भविष्य क्या होगा?

परम सौभाग्यक विषय थीक जे बिहार शताब्दी वर्ष में राज्य सरकार द्वारा मैथलीक लुप्तप्राय गीत एवं धुन केर दस्तावेजीकरणक स्वीकृति देल गेल। एहि दस्तावेज में मैथलीक विविध प्रकारक संस्कार गीत, व्यवहार गीत, ॠतु प्रधान गीत आ पाबनि तिहारक गीत भंडार सौं 50 अलग-अलग धुन में मिथिलाक लोक कण्ठ में रचल बसल किन्तु लुप्तप्राय गीत आ धुन के संकलन एमपीथ्री आ ओहि गीतक पुस्तिका प्रकाशित करबाक लक्ष्य निर्धारित अछि। ई दस्तावेज मिथिलाक भावी पीढीक लेल मैथिली गीत परंपराक बहूमूल्य धरोहर बनए तें सर्वोत्तम तैयारी हेतु गीत, आपन स्वर एवं संगीत संबंधी अपनेक सुझाव सादर आमंत्रित करै छी।

हृदय नारायण झा

कलाकार( मैथिली लोकगीत), आकाशवाणी, पटना

पता- सांस्कृतिक संवाददाता, "आज" हिन्दी दैनिक,

फ़्रेजर रोड, पटना,, मोबाइल नं- 9308765099, ईमेल –hridaysaroj26@gmail.com

यूपी का डाकू बना कश्मीर का गांधी

(नवल की विशेष  रिपोर्ट)

पिछले डेढ दशक में चार गुणी हुई खुले बाजार में चावल की न्यूनतम कीमत

बिहार स

nawal

No comments:

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...