BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Monday, April 28, 2008

चीयरलीडरों का ताजा जलवा। भारत को अमेरिकी उपनिवेश बनाने वाली सरकार को बचाने की हर कोशिश, पर परमाणु समझौते पर वामदलों का पारा गरम।

चीयरलीडरों का ताजा जलवा। भारत को अमेरिकी उपनिवेश बनाने वाली सरकार को बचाने की हर कोशिश, पर परमाणु समझौते पर वामदलों का पारा गरम।
पलाश विश्वास

वामपंथी तिब्बत के मसले पर चीन के साथ हैं पर नेपाल में माओवादियों की जीत पर खामोश है माकपा का जेएनयू पलट पोलिट ब्यूरो।
नवउदारवादी आर्थिक नीतियों को गले लगाकर बुद्धदेव भट्टाचार्य और जार्ज बुश के गठजोड़ के जरिए वामशासित राज्यों में पूंजीवादी विकास की अंधी दौड़ में शामिल वामपंथी मुसलिम वोटबैंक के खातिर जब तब अमेरिकी साम्राज्यवाद के विरोध में शोर शराबा तो करती है , पर मनुस्मृति रंगभेद आधारित वैश्विक सत्तावर्ग के हितो के मद्देनजर नंदीग्राम और सिंगुर में मूलनिवासियों के सफाये से परहेज नही करती। दलित एजंडा और अंबेडकर, आरक्षण और ओबीसी के मुद्दे तो उछालती है माकपा, पर दर हकीकत मरीचझांपी में देशभर में बसे दलित शरणार्थियों को बंगाल में बसाने की लालच देकर कत्लेआम करने वाली माकपा उन्हें बांग्लादेशी करार देकर पास कि जाने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू करने में प्रणव मुखर्जी के साझीदार है। केंद्र में समर्थन के बदले तीन राज्यों में वाम सरकारे बनाये रखने के लिए किसी भी स्तर पर सौदेबाजी करने वाले वामपंथी चाहे जितना पारा गरम का दिखावा करें, दरअसल विदेशी पूंजी और विदेशी संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में शक की गुंजाइश नहीं है।
१० नवंबर, १९५४ को जन्मे जय गोस्वामी प्रसिद्ध बांग्ला कवि हैं। उनके राजनीतिक पिता ने उन्हें साहित्य के प्रति उत्साहित किया। इनका पहला कविता संग्रह था-क्रिसमस ओ शीतेर सोनेटगुच्छ था। इन्हें १९८९ में 'घुमियेछो झौपता` पर प्रतिष्ठित आनंद पुरस्कार मिला था और २००० में 'पगली तोमारा संगे` पर साहित्य अकादमी सम्मान। जय ने केवल लेखन तक ही अपने को सीमित नहीं किया। वे लगातार जनता के संघर्षों के साथ जुड़े रहे हैं। उसकी आवाज में आवाज मिलाते रहे हैं। अभी हाल ही में जब नंदीग्राम में किसानों का निर्मम नरसंहार हुआ तो वह अपनी कविताओं के साथ सड़कों पर आ गये।

यहां प्रकाशित तीन कविताएं जय गोस्वामी ने नंदीग्राम की घटना के विरोध में हुई एक सभा में पढ़ी थीं। इनके साथ बांग्ला के प्रसिद्ध कवि द्युतिमान चौधरी की भी एक कविता प्रकाशित की जा रही है। इन मूल बांग्ला कविताओं का अनुवाद किया है बांग्ला कवि विश्वजीत सेन ने।

शासक के लिए


आप जो कहेंगे-मैं वही करूंगा
वही सुनूंगा, वही खाऊंगा
उसी को पहन कर खेत पर जाऊंगा
एक शब्द नहीं बोलूंगा

आप कहेंगे
गले में रस्सी डाल
झूलते रहो सारी रात
वही करूंगा
केवल
अगले दिन
जब आप कहेंगे
अब उतर आओ
तब लोगों की जरूरत पड़ेगी
मुझे उतारने के लिए
मैं खुद उतर नहीं पाऊंगा

सिर्फ इतना भर मैं नहीं कर पाऊंगा
इसके लिए आप मुझे
दोषी न समझें



स्वेच्छा से

उन्होंने जमीन दी है स्वेच्छा से
उन्होंने घर छोड़ा है स्वेच्छा से
लाठी के नीचे उन्होंने
बिछा दी है अपनी पीठ

क्यों तुम्हें यह सारा कुछ
दिखायी नहीं देता?

देख रहा हूं, सब कुछ देख रहा हूं
स्वेच्छा से
मैं देखने को बाध्य हूं
स्वेच्छा से/कि मानवाधिकार की लाशें
बाढ़ के पानी में बहती जा रही हैं

राजा के हुक्म से हथकड़ी लग चुकी है
लोकतंत्र को
उसके शरीर से टपक रहा है खून
प्रहरी उसे चला कर ले जा रहे हैं
श्मशान की ओर

हम सब खड़े हैं मुख्य सड़क पर
देख रहा हूं केवल
देख रहा हूं
स्वेच्छा से ।




हाजिरी बही

पहले छीन लो मेरा खेत
फिर मुझसे मजदूरी कराओ
मेरी जितनी भर आजादी थी
उसे तोड़वा दो लठैतों से
फिर उसे
कारखाने की सीमेंट और बालू में
सनवा दो

उसके बाद/सालों साल
मसनद रोशन कर
डंडा संभाले बैठे रहो।



अजीब अंधेरा

द्युतिमान चौधरी

वे इस बंगाल में ले आए हैं आज
एक अजीब अंधेरा
जिन्होंने कहा था 'अंधेरे को दूर भगाएंगे हम`
वही आज सारी रोशनी का लोप कर रहे हैं,
अंधेरे के राजाओं के हाथ
सुपुर्द कर रहे हैं जमीन और चेतना-
'तेभागा`१ की स्मृतियों को दफन कर रहे हैं
कह रहे हैं 'जाओ, पूंजी के आगोश में जाओ`

नन्दिनी२ अपने दो हाथों से
हटा रही है अंधेरा, पूकारती 'रंजन कहां हो तुम!`
जितने रंजन हैं सभी घुसपैठिए, यह मानकर
जारी हुआ है वारंट
फिर भी वे आ खड़े हो रहे हैं
किसानों के कंधों से कंधा मिलाकर
'तेभागा` के नारे पुन: सुनाई दे रहे हैं
उनकी प्रतिध्वनि जगा रही है संकल्प के पर्वत सी मानसिकता,
विरोध चारों ओर, कोतवाल त्रस्त हैं

जंगे-मैदान में नई रेखाएं खींची जा चुकी हैं
तय कर लो तुम किधर जाओगे,
क्या तुम भी कदम बढ़ाओगे व्यक्तिस्वार्थ की चारदिवारी की ओर
जैसे पूंजी की चाकरी करनेवाले 'वाम` ने बढ़ाए हैं
या रहोगे मनुष्य के साथ
विभिन्न रंगों में रंगे सेवादासों ने
षड़यंत्रों के जो जाल बूने हैं
उसे नष्ट करते हुए
नए दिवस का, नए समाज का स्वप्न
देखना क्या नहीं चाहते तुम?


१. तेभागा : स्वतंत्रता पूर्व अविभाजित बंगाल का किसान आन्दोलन, जिसने भू-व्यवस्था पर आधारित शोषण की जडों हिलाकर रख दिया था।
२. नंदिनी : रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित 'रक्तकरबी` (लाल कनेर) नाटक की नायिका। रंजन उसके प्रेमी एक युवक का नाम है।
महंगाई पर चौतरफा घिरी सरकार मौजूदा संकट से उबरने के रास्ते अभी तलाश ही रही है कि कामरेड परमाणु करार पर एक बार फिर उसे घेरने की तैयारी में जुट गए हैं।संसद के मुख्य द्वार के निकट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना देने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि कमजोर सार्वजनिक वितरण प्रणाली [पीडीएस] और आवश्यक वस्तुओं को वायदा कारोबार के दायरे में लाने से महंगाई बेतहाशा बढ़ी है। शनिवार को इस मुद्दे पर सरकार की समर्थक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रकाश करात ने संसद भवन के बाहर गिरफ्तारी दी। समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह ने भी इस मुद्दे पर गिरफ्तारी दी। इधर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार महंगाई नियंत्रित नहीं होती तो उनकी पार्टी यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लाक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी एवं तेलुगू देशम पार्टी के सांसदों ने संसद भवन के मुख्य द्वार पर धरना दिया। संसद के दोनों सदनों में भी महँगाई को लेकर हंगामा हुआ जिस कारण दोनों सदनों की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक देश भर में खुदरा दुकानों का विरोध करने वाले कम्युनिस्टों के शासन वाले राज्यों में देशी खुदरा कम्पनियों को मंजूरी मिलने जा रही है। पश्चिम बंगाल और केरल में रिलायंस की खुदरा योजनाओं को धक्का पहुंचने के महीनों बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) ने कांग्रेस में फैसला किया गया है कि संगठित खुदरा क्षेत्र की भारतीय बहुदेशीय कम्पनियों को राज्य में कारोबार करने की इजाजत दे दी जाए।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भूमि उच्छेद परिषद के सदस्यों के बीच शनिवार सुबह हिंसा भड़क गई। खबरों मेंं बताया जा रहा है कि महिला से बलात्कार के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी की गई है, जिसमें कई घायल हो गए हैं। पूरे इलाके में इस ताजा घटनाक्रम के बाद तनाव उत्पन्न हो गया है। नंदीग्राम के हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा करने गईं तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की कार पर रविवार को माकपा के कथित समर्थकों ने हमला किया। ममता ने नंदीग्राम थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यपाल, गृह सचिव, केन्द्रीय गृह सचिव, समेत अन्य केन्द्रीय एजेसिंयों से भी इसकी शिकायत की है। यह तय है कि नंदीग्राम और सिंगुर विवादों के साए में अगले माह होने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के इन चुनावों पर माकपा की राजनैतिक हैसियत की घट-बढ़ टिकी हुई है। खास तौर पर पार्टी महाधिवेशन के बाद होने वाले पहले ग्रास रूट स्तर के चुनावों में माकपा का खराब प्रदर्शन उसकी राजनीति को और गहरी चोट पहुंचाएगा। इस लिहाज से माकपा पूरी सावधानी बरत रही है। तृणमूल महिला कांग्रेस की सभा में सुश्री बैनर्जी ने कहा, बंगाल की महिलाओं ने कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को प्रेरित किया था। आज समय आ गया है जब वे आगे बढ़कर पंचायती चुनावों में अपने हाथ में बागडौर लेकर सत्ताधारी दल को सबक सिखाएं। यह सिंगुर और नंदीग्राम में हुई हिंसा का करारा जवाब होगा।
अमेरिका के साथ नाभिकीय ऊर्जा संधि पर सरकार की खिंचाई करने का यह मौका कामरेडों को पांच मई को मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक वामदलों के दबाव में सरकार ने संप्रग-वाम सुलह समिति की आठवीं बैठक इस दिन बुलाने का फैसला किया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भारत तथा अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु सहयोग के संबंध में 123 समझौते का हाइड कानून से कोई ताल्लुक नहीं होने के अमेरिकी दावे को ' भाषा की बाजीगरी' बताते हुए खारिज कर दिया है।भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु करार के विरोध के बाद माकपा ने फिर यूपीए सरकार पर हमला बोला. करार के बाद अब सैन्य समझौते को लेकर लेफ्ट लाल है. माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि हमारी पार्टी अमेरिका के साथ सैन्य समझौते को समाप्त करने और अमेरिकी रणनीतिक चाल से भारत को मुक्त कराने पर ध्यान देगी. अमेरिका अपने लाभ के लिए भारत को रणनीतिक चाल में उलझाकर रखना चाहता है.येचुरी और सोनिया के बीच चर्चा के दौरान अमेरिका के साथ परमाणु करार का मसला भी उठा। येचुरी ने सोनिया को कोयंबटूर में हाल ही हुई माकपा कांग्रेस में करार के विरोध को लेकर पारित किए गए संकल्प के बारे में भी अवगत कराया। महाधिवेशन के दौरान करात के बयान का हवाला देते हुए माकपा सांसद ने कह दिया कि करार पर सरकार को कदम बढ़ाने पर वामदलों की सहमति नहीं मिल पाएगी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने यूपीए सरकार को दो टूक कहा है कि भारत-अमेरिकी असैन्य परमाणु करार पर उसे आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। अपनी ताजा धमकी में पार्टी नेताओं यह भी कहा कि अब वे अमेरिका के साथ 2005 जुलाई में हुआ सामरिक समझौता भी विफल करेंगे। पार्टी की 19वीं कांग्रेस को संबोधित करते हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि एटमी करार को रोकने से ही हमारा काम पूरा नहीं हुआ है। हमें अपना आंदोलन जारी रखना है।अपने चौंतीस साल के इतिहास में पहली बार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो में उसका कोई संस्थापक सदस्य नहीं है। ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत पार्टी की स्थापना के बाद बने पहले पोलित ब्यूरो के सदस्य थे और उम्र और बीमारी के चलते वे अब पोलित ब्यूरो में नहीं हैं। माकपा के पोलित ब्यूरो में हुए परिवर्तन को एक नई पीढ़ी का उदय कहा जा सकता है। ...प्रकाश करात को एक बार फिर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का महासचिव चुन लिया गया है. कोयंबटूर में हुई पार्टी की 19वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो का भी पुनर्गठन किया गया है. पोलित ब्यूरो में अब वरिष्ठ नेता ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत की जगह नए नेताओं को शामिल किया गया है. दोनों नेताओं के ख़राब स्वास्थ्य को देखते हुए ऐसा किया गया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की उन्नीसवीं कांग्रेस महज एक सियासी जलसा बन कर रह गई। पार्टी के लिए यह सिद्धांत, संगठन और संघर्ष के सवालों पर खुलकर अपनी समीक्षा करने का अहम मौका हो सकता था। लेकिन जो हुआ, वह सिर्फ खानापूरी है। पार्टी संगठन में सुधार लाने के लिए कदम उठाने का ऐलान किया गया है। इसी तरह कैडरों में बढ़ते करप्शन पर रोक लगाने तथा हिंदी प्रदेश में अपना विस्तार करने की बातें कही तो गई हैं, लेकिन ये मुद्दे नए नहीं हैं ...प्रकाश कारत ने देश में तीसरे मोर्चे के गठन की ज़रूरत बताई है लेकिन कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से दूर रखना उसकी पहली प्राथमिकता है. सीपीएम के छह दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन प्रकाश कारत ने कहा कि वाम दलों के दबाव के कारण ही अब तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता नहीं कर पाई है.पार्टी महाधिवेशन में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि आगामी चुनाव में भाजपा को हर स्तर पर परास्त करने की सभी तरकीबें अपनाई जाएंगी। साथ ही यह भी खुलासा किया गया कि कांग्रेस के साथ कोई चुनावी मोर्चा या गठबंधन नहीं बनाया जाएगा। पार्टी की नजर में कांग्रेस बुर्जुवा-पूंजीवादी पार्टी है, जो सांप्रदायिक ताकतों के सिर उठाने पर घुटने टेक देती है। ... भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी .भाकपा. के महासचिव ए. बी. बर्द्धन ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी .भाजपा. के विकल्प के तौर पर ..तीसरा मोर्चा.. तैयार करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों से संधि वार्ता करने की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी .माकपा. से आज अपील की1
अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश से मिलकर लौटे विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने परमाणु करार के लिए भले ही कुछ और मोहलत हासिल कर ली हो लेकिन कामरेडों की आपत्ति दूर करने के मकसद से हाइड कानून पर बुश प्रशासन की सफाई का आश्वासन हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाए। इतना जरूर तय हो गया कि परमाणु करार से जुड़े इस कानून की बाध्यता को लेकर अमेरिकी अधिकारी कोई भी कड़ा बयान देने से बचेंगे। अमेरिका के साथ असैनिक परमाणु करार पर भाजपा के विचारों से विरोधाभास जताते हुए पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने कहा है कि भारत को करार पर आगे बढ़ना चाहिए और विफल रहने पर देश की छवि बुरी तरह प्रभावित होगी तथा उसके परमाणु कार्यक्रम को झटका लगेगा। परमाणु करार पर लगातार जारी अनिश्चितता के बावजूद संप्रग और इसके वाम सहयोगी छह मई को इसे लेकर मुलाकात करेंगे। समन्वय समिति की इस बैठक के दौरान सुरक्षा मानक समझौते पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से बातचीत तथा परमाणु करार को लागू करने पर चर्चा की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में उम्मीद की जा रही है कि मई के शुरू में या दो जून को होने वाली एजेंसी के गर्वनिंग बोर्ड की बैठक में भारत केद्रिंत परमाणु समझौते की दिशा में ठोस प्रगति हो सकती है। भारत की और से भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोकदर वार्ताकार हैं। आईएईए में भारत संबंधी वार्ता की प्रगति पर नजदीकी निगाह रख रहे सूत्रों के अनुसार दो जून को एजेंसी के संचालन मंडल की बैठक होनी है...अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु करार के भविष्य पर मंडराती अनिश्चितता व बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने कहा कि वह करार को लेकर अब भी आशान्वित है. भारत ने संकेत दिया कि वह अन्य देशों के लिए इंटरनेशनल न्यूक्लियर फ्यूल बैंक के गठन में सहयोग करेगा. ब्रिटेन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज द्वारा आयोजित सेमिनार में विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा कि हमें परमाणु करार के शीघ्र अस्तित्व में आ जाने की उम्मीद है. ...
अमेरिका ने भारत के साथ असैन्य परमाणु करार के बारे में कहा है कि इस डील के प्रावधानों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता सियान मैक्कोरमार्क ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बताया कि समझौते के बारे में भारत को अगला कदम बढ़ाना है। अमेरिका ने कहा है कि परमाणुु समझौते के क्रियान्वयन के बारे में अब भारत को आगे कदम बढ़ाना है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि भारत अपने आंतरिक मसलों को सुलझाने में विफल रहा तो असैन्य परमाणु करार अगली सरकार के पाले में जा सकता है। अमेरिका ने कहा है कि कांग्रेस के लिए समय बीतता जा रहा है, हालांकि इस दिशा में आगे बढ़ने की अभी भी संभावनाएं हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टाम कैसी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि हम चाहेंगे कि यह सौदा जितना जल्द संभव हो सके, पूरा हो जाए।
भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार को सफल अंजाम तक पहुंचाने के संबंध में कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि इसके लिए कोई भी समय सीमा तय नहीं कर सकता और करार के लिए सरकार की बलि देना बिना शहादत की मौत के समान होगा। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस बात पर जोर देना बेहद महत्वपूर्ण है कि भारत और अमेरिका संबंध बहुकोणीय, बहुस्तरीय और बहुपक्षीय हैं।
माकपा के संसदीय नेताओं ने कहा कि 123 समझौते का मूल आधार अमेरिकी हाइड कानून है और दोनों को अलग-अलग बताना भाषाई कलाबाजी के अलावा कुछ नही है।उन्होंने इस परमाणु करार की अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए जाने से पहले इस पर संसद को विश्वास में लेने के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के आश्वासन को भी गैर जरूरी बताया और कहा कि संसद का बहुमत इस करार के खिलाफ अपनी भावना व्यक्त कर चुका है।
भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत राबर्ट ब्लैकविल ने कहा है कि परमाणु करार की विफलता से भारत-अमेरिका संबंधों में बहुत फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। ब्लैकविल ने एक कार्यक्रम में कहा कि यदि असैन्य परमाणु समझौता नहीं होता है तो इसकी कीमत अमेरिका को नहीं चुकानी पड़ेगी।
राज्यसभा में माकपा के नेता सीताराम येचुरी ने दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के प्रभारी अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर के संबंधित दावे के बारे में कहा कि हाइड कानून भारत अमेरिकी परमाणु करार का मूल आधार है और यह करार जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस पर भारत की विदेश नीति के अमेरिकी हितों के अनुरूप होना सुनिश्चित करने तथा भारतीय परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति पर वार्षिक प्रमाणन जैसी कई शर्तों का प्रस्ताव करता है।
जापान के नगानो में ओलिंपिक मशाल रिले के दूसरे दौर में तिब्बत समर्थक प्रदर्शनकारियों के विरोध में सैकड़ों चीनी छात्रों ने लाल झंडों के साथ ही 'एक विश्व एक सपना' वाले पोस्टर लहराए। मशाल रिले भारतीय समयानुसार प्रातॅ पांच बजे आयोजित होनी थी लेकिन इसके कुछ ही देर पहले बारिश होने लगी। दोनों पक्ष एक दूसरे से भिड़ने को बेताब थे। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने के लिए तारबंदी और ट्रकों का प्रयोग किया।
तिब्बत पर वार्ता की पेशकश के बाद लगातार पैंतरा बदल रहा चीन रविवार को भी दलाई लामा पर हमलावर रहा। उसका कहना है कि तिब्बती धर्म गुरु शब्दों की बाजीगरी कर रहे हैं। चीन के अनुसार दलाई लामा की यह सारी कवायद तिब्बत की आजादी के लिए विश्व का समर्थन जुटाना है।
सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'द पीपुल्स डेली' के मुताबिक दलाई लामा द्वारा मध्यम मार्ग और अधिक स्वायत्तता जैसे शब्दों का प्रयोग कुछ और नहीं बल्कि तिब्बत की आजादी की बात कहना है। अखबार ने 'अटेम्प्ट टू स्पिलिट द मदरलैंड..' शीर्षक से एक लेख पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है। इसमें लिखा गया है कि दलाई लामा तिब्बत को चीन से अलग करने के अपने अंतिम लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर तरह का प्रयास जारी रखे हुए हैं।
लेख में कहा गया कि दलाई लामा की चीन को तोड़ने की साजिश कभी कामयाब नहीं होगी। अखबार ने इस लेख के साथ ही दलाई लामा का वह बयान भी छापा है जिसमें तिब्बती धर्म गुरु ने अपने दूत के साथ वार्ता की पेशकश का स्वागत किया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तिब्बती नेता के प्रति सरकार की नीति यथावत रहेगी। बातचीत के लिए हमारे दरवाजे पहले की तरह खुले हैं बशर्ते वह हमारी बात मान लें।
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत तथा नेपाल में भारत के राजदूत रहे श्याम सरन ने कहा कि निश्चित तौर पर नेपाल में सभी राजनैतिक ताकतों को प्रोत्साहन दिया जाएगा कि वे नेपाल की राष्ट्रीय सरकार में शामिल होने के प्रचंड के आह्वान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दें। इसमें मधेसी जैसी नई राजनैतिक ताकतें भी शामिल हैं। नेपाल के चुनावों में माओवादियों के हाथों नेपाली कांग्रेस (एनसी) और नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) की पराजय के बाद प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और माओवादी नेता प्रचंड के बीच सत्ता संघर्ष का नया दौर शुरू हो गया है। माओवादियों ने 601 सदस्यों वाली असेंबली में 220 सीटें जीती हैं।
संविधान सभा चुनाव में दो बड़ी पार्टियों की हार और मओवादियों की आश्चर्यजनक जीत के साथ नेपाल में एक बार फिर सत्ता को लेकर रस्साकशी शुरू होती नजर आ रही है। इस रस्साकशी में शामिल है प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला की पार्टी नेपाली कांग्रेस और माओवादी।
601 सदस्यों के लिए हुए चुनाव में 220 माओवादी जीते हैं। नेपाली कांग्रेस के सदस्यों की संख्या माओवादियों से करीब आधी है। माओवादियों के नेता प्रचंड के नेतृत्व में यहां गठबंधन की सरकार बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद माओवादियों का कहना है कि उन्हें नई सरकार का नेतृत्व और संविधान सभा का प्रारूप तैयार करने का जनादेश मिला है। लेकिन नेपाली कांग्रेस इसके खिलाफ खड़ी होने लगी है।
नेपाली कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि कोइराला को प्रधानमंत्री पद पर बने रहने देना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और पूर्व योजना व कार्यमंत्री गोपाल मान श्रेष्ठ ने प्रधानमंत्री के रूप में कोइराला की जोरदार वकालत करनी शुरू कर दी है। इन दोनों वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि माओवादियों को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री नामित करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। श्रेष्ठ का तो यहां तक कहना है कि प्रचंड प्रधानमंत्री नहीं हो सकते, क्योंकि वह माओवादी गुरिल्ला सेना के सुप्रीम कमांडर भी हैं। जाहिर है कि नेपाली कांग्रेस की यह बात माओवादियों का गुस्सा बढ़ाने के लिए काफी है।
माओवादी न तो हथियार डालना चाहते और न ही अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को भंग करना चाहते हैं। माओवादियों के निर्वाचित सदस्य प्रभाकर का कहना है कि शांति समझौते के तहत पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को सरकारी सेना में शामिल करने का प्रावधान किया गया है, उसे छिन्न-भिन्न करने का नहीं।
गिरते स्वास्थ्य और परिवार के बीच, यहां तक कि अपनी बेटी का विरोध झेल रहे कोइराला भी प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिखते। संविधान सभा का चुनाव संपन्न हो जाने के बाद राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करने वाले कोइराला ने नए सिरे से सत्ता में बने रहने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वह गठबंधन के लिए छोटी पार्टियों से मशविरा करने में जुटे हैं।
कांग्रेस की तर्ज पर ही एक और बड़ी पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने भी माओवादियों के खिलाफ कमर कसनी शुरू कर दी है। इस पार्टी ने कहा है कि नई सरकार के गठन से पहले माओवादी अन्य पार्टियों के कार्यकर्ताओं को धमकाना, आतंकित करना बंद करें।
नेपाल में भारत के नए राजदूत राकेश सूद ने शनिवार को प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला से मुलाकात कर ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की।
सूद ने अभी प्रधानमंत्री को अपना नियुक्ति पत्र नहीं सौंपा है। मुलाकात के दौरान सूद ने नेपाल में संविधान सभा के सफल चुनाव के लिए प्रधानमंत्री कोइराला को बधाई दी। बैठक के दौरान दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
सूद ने सुबह नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा से भी मुलाकात कर हाल के राजनीतिक हालात पर विचार-विमर्श किया। देउबा ने कहा है कि माओवादियों को दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने की दशा में नेपाली कांग्रेस को ही नई सरकार का नेतृत्व करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि माओवादी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जरूर उभरे हैं, लेकिन उनके पास सरकार बदलने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं है। कोइराला ने शांति की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई है और संविधान सभा के चुनाव भी सफलतापूर्वक संपन्न कराए हैं। इसलिए हमारा मानना है कि उन्हें ही भावी सरकार का नेतृत्व करना चाहिए। जब कोइराला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम आम सहमति के आधार पर सरकार चलाने पर सहमत हैं। आगे मैं कुछ नहीं जानता। नेपाली कांग्रेस के महासचिव विमलेंद्र निधि ने कहा है कि आम सहमति की सरकार आज भी अस्तित्व में है और सभी पार्टियां इसी सरकार को संविधान सभा चुनाव के बाद भी चलाने को राजी हैं। माओवादियों को स्पष्ट बताना चाहिए कि क्यों सरकार का नेतृत्व बदला जाए।
भाजपा की अगुवाई में राजग ने मंहगाई का मुद्दा छीन लिया तो खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचने लगी। भारत-अमेरिकी परमाणु करार का विरोध कर रही भाजपा ने रविवार को कहा कि कोई भी देश यह लिखित गारंटी नहीं दे सकता कि वह भविष्य में परमाणु परीक्षण नहीं करेगा।
पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने एशियानेट चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि कोई देश ऐसी गारंटी नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि क्या किसी देश ने ऐसा कहा कि इसके बाद वह कोई और परमाणु परीक्षण नहीं करेगा। क्या अमेरिका ने ऐसा कोई वादा किया है। क्या किसी भी ऐसे देश ने, जिसके पास पहले से परमाणु हथियारों का बड़ा ज़खीरा है, लिखित में ऐसी गारंटी दी है। उन्होंने कहा कि स्वयं की ओर से इसका त्याग [परीक्षण] किया जाना एक बात है। समझौते के रूप में लिखित तौर पर ऐसा कहना दूसरी बात है।
कांग्रेस के नेताओं द्वारा राहुल गांधी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किए जाने के संबंध में आडवाणी ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वंशगत राजनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अधिकतर दलों में यह प्रवृत्ति है लेकिन भाजपा में ऐसा नहीं है।
वाम दलों के भाजपा विरोध के संबंध में किए गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका दल अछूत करार दिए जाने की राजनीति में विश्वास नहीं करता है। वाम दल ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के नाम पर कांग्रेस का दामन पकड़ना वाम दलों के पाखंड को दर्शाता है।
केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि सरकार ने मुद्रा स्फीति रोकने के लिए जो कदम उठाए हैं। उनसे आने वाले समय में महँगाई कम होने की उम्मीद है।
चिदम्बरम ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान शुक्रवार कहा कि सरकार ने महँगाई रोकने के कदम उठाए हैं तथा रिजर्व बैंक ने भी मौद्रिक कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री ने भी 2007-08 में गेहूँ सहित विभिन्न खाद्यान्नों का रिकार्ड उत्पादन होने और मानसून के बेहतर होने की बात कही है जिससे कृषि जिन्सों की सरकारी खरीद भी अच्छी रहने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने से महँगाई बढ़ी है पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं उससे महँगाई कम होगी लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारियों ने उनके गोदामों पर छापे मारे जाने का विरोध किया है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राजनीतिक दल भी परोक्ष रूप से उनका समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्पात कंपनियों ने भी कच्चे माल का दाम बढ़ने के बावजूद स्टील के दाम और नहीं बढ़ाने पर सहमति दी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रा स्फीति सितम्बर 2002 से दिसम्बर 2007 तक चार प्रतिशत से नीचे थी पर वह जनवरी 2008 में बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई। फरवरी 2008 में 6.4 प्रतिशत हो गई। उन्होंने बताया कि गत पाँच अप्रैल को समाप्त सप्ताह में यह बढ़कर 7.14 प्रतिशत हो गई। इसका कारण थोक मूल्य सूचकांक में 25.9 प्रतिशत वजन वाली 33 वस्तुओं ने कुल मुद्रास्फीति में 80 प्रतिशत का योगदान दिया।

चाहे ओबामा बने राष्ट्रपति , चाहे हिलेरी- सत्तावर्ग की अमेरिकीपरस्ती में कोई फर्क नहीं
शुरुआती जीत के कारण बराक ओबामा भले ही हिलेरी क्लिंटन से आगे चल रहे हैं लेकिन अब दोनों के बीच अंतर की खाई तेजी से पट रही है। पेंसिलवेनिया की जीत के बाद हिलेरी अब ओबामा को बराबर की टक्कर दे रही हैं। इंडियाना में छह मई को प्राइमरी के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार यहां पर हिलेरी और ओबामा बराबरी पर हैं। इंडियाना में 187 प्रतिनिधियों के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के दोनों दावेदारों में भिड़ंत है।
इंडियाना चुनाव के लिए सीएनएन, एआरजी और इंडियाना पोलिस स्टार ने अलग-अलग सर्वे कराया था। सभी सर्वेक्षणों के आधार पर यही निष्कर्ष निकला है कि क्लिंटन और ओबामा के हिस्से में 45-45 फीसदी मत आ रहे हैं। दस प्रतिशत मतदाता अभी अनिश्चय की स्थिति में हैं। मौजूदा समय में ओबामा प्रतिनिधियों की गिनती में हिलेरी के मुकाबले 130 अंकों से आगे चल रहे हैं। ओबामा के पास कुल 1705 प्रतिनिधि हैं जबकि हिलेरी के खाते में 1575 हैं। पेंसिलवेनिया चुनाव से पहले यह अंतर दो सौ के करीब था। 22 अप्रैल को यहां पर हिलेरी को मिली जीत से यह अंतर कम हुआ। अगर इंडियाना में मुकाबला बराबरी पर छूटा तो यह अंतर और कम होगा। इसके बाद नार्थ कैरोलिना में दोनों के बीच मुकाबला है। यहां भी दोनों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। अब केवल नौ राज्यों में चुनाव होना है। दोनों दावेदारों के बीच जिस तरह का मुकाबला चल रहा है, उसके आधार पर फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता है कि दोनों में से कौन टिकट हासिल करने के लिए जरूरी 2025 प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल कर सकेगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के अगस्त में डेनेवर में होने वाले सम्मेलन में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया जाएगा।
इस बीच अपनी साख और मजबूत करने के लिए हिलेरी ने एक बार फिर ओबामा को आमने-सामने बहस के लिए ललकारा है। इंडियाना में शनिवार को हिलेरी ने कहा कि पीठ पीछे आरोप-प्रत्यारोप मढ़ने से बेहतर है एक बार फिर 90 मिनट के लिए बहस कर लें और सभी मुद्दों को मतदाताओं के समक्ष स्पष्ट कर दें। ओबामा और हिलेरी में अब तक 21 बार सार्वजनिक बहस हो चुकी है।
परमाणु करार [123 समझौता] के मौजूदा मसौदे में किसी बदलाव से इनकार कर अमेरिका ने भारत सरकार की सांसत बढ़ा दी है। नाभिकीय ऊर्जा संधि को परवान न चढ़ने देने की कसम खाए वामदलों ने अमेरिकी अधिकारी के बयान के बाद इस मुद्दे पर सरकार की एक न सुनने का फैसला कर लिया है।
ऐसे में परमाणु करार पर वामदलों को किसी तरह मना लेने की सरकार की रही सही उम्मीद भी जाती नजर आ रही है। करार पर वामदलों की हरी झंडी पाने के लिए संप्रग-वाम सुलह समिति की 6 मई को होने वाली बैठक से चंद रोज पहले वाशिंगटन में विदेश विभाग के प्रवक्ता मैक्कारमेक के इस बयान ने भारत को तो सकते में डाल ही दिया है, वामदलों को भी अपने सुर तेज करने का मौका दे दिया है।
कामरेड कुनबे का पारा चढ़ाने का पूरा इंतजाम करते हुए अमेरिकी प्रवक्ता ने शनिवार को कह दिया कि परमाणु करार की गेंद अब भारत के पाले में है। उसे 123 समझौते के मौजूदा मसौदे के आधार पर ही वामदलों को राजी करना है। यानी संकेत साफ हैं कि करार की शर्तो में भारी बदलाव की वाम मोर्चा की मांग तो दूर, अमेरिका इसमें एक शब्द की भी हेर-फेर करने के खिलाफ है। सूत्रों के अनुसार अमेरिका के इस संकेत के बाद कामरेडों ने भी अपनी आस्तीनें चढ़ा ली हैं।
अंदरखाने चल रही तैयारी के अनुसार उन्होंने अब तो सरकार को सफाई का भी मौका नहीं देने की ठान ली है। एक बड़े माकपा नेता ने कहा द्घस्त्र अब जब अमेरिका ने ही साफ कर दिया कि भारत के पास करार को जस का तस स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वाम मोर्चा नेताओं के प्रश्नों की बात कहां रह जाती है। सरकार भी अब लाचार है। ऐसे में तो उसे कदम पीछे लेने ही होंगे।' ऐसे में सुलह समिति की चर्चा समय नष्ट करने के अलावा कुछ भी नहीं होगी।
स्पष्ट है कि कामरेडों की आपत्ति खास तौर से 123 समझौते पर ही रही है जिससे अमेरिकी घरेलू कानून 'हाइड एक्ट' सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसमें भारी संशोधनों की मांग वाम मोर्चा सरकार से करता रहा है। कामरेडों के रुख से पहले ही हताश दिख रही सरकार अमेरिकी अधिकारी की तल्ख टिप्पणी के बाद बगलें ही झांक सकती है। विदेश नीति पर बहस के दौरान पिछले दिनों राज्यसभा में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सरकार की इस मसले पर निराशा स्पष्ट जाहिर कर दी थी।
हाइड ऐक्ट को लेकर माकपा सांसद सीताराम येचुरी के सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध कर संकेत दे दिए थे कि सरकार इस पर पूरी तरह लाचार है। यह संकेत देकर कि इस मसले पर भारत में मौजूदा राजनैतिक गतिरोध से अमेरिका का कोई लेनादेना नहीं है, मैक्कारमेक ने सरकार की निराशा बढ़ाने का ही काम किया है। खास तौर पर तब जबकि प्रणब ने वाशिंगटन में विदेश मंत्री कोंडलीजा राइस से अपील की थी कि उनके देश की तरफ से ऐसा कोई बयान न आए जिससे कामरेडों को मनाने की कोशिश को झटका लगे।

महँगाई के कारण विपक्ष और जनता के तानों को झेल रहे प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के लिए भारतीय वायु सेना ठंडी बयार जैसी खबर ला रही है।
-भारतीय वायु सेना के लिए 42 हजार करोड़ रुपए की लागत से खरीदे जाने वाले 126 लड़ाकू विमानों के सौदे को हासिल करने के लिए काँटे की जंग प्रस्ताव भेजने की आखिरी तारीख समाप्त होने से पहले ही गुरुवार से शुरू हो गई।
इस सौदे की होड़ में शामिल होने जा रही चार प्रमुख यूरोपीय देशों की विमान कम्पनी ईएडीएस ने गुरुवार को जर्मन, ब्रिटेन, स्पेन और इटली के राजदूतों और वहाँ की वायु सेना के अधिकारियों को प्रचार अभियान के मैदान में उतारा।
वायु सेना के लिए बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीददारी का अंतरराष्ट्रीय टेंडर छह कम्पनियों को पिछले साल अगस्त में जारी किया गया था और प्रस्ताव भेजने की अंतिम तारीख समाप्त होने पर उसे आठ सप्ताह बढ़ाकर 28 अप्रैल कर दिया गया था।
ईएडीएस के मुख्यकार्यकारी अधिकारी ने गुरुवार को घोषणा की कि उनकी कम्पनी सोमवार को अपना प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपने जा रही है और इससे चार दिन पहले इस कम्पनी ने गुरुवार को यह आयोजन कर भारत को संदेश दिया है कि वह यह संबंध कायम करने के लिए कितनी उत्सुक है।
इस सौदे की होड़ में अमेरिका की दो दिग्गज कम्पनियाँ लॉकहीड मार्टिन और बोइंग भी शामिल हैं। इनके अलावा इसराइल के राफेल, स्वीडन के ग्रिपन और रूस के मिग 35 को सौदे की होड़ में आमंत्रित किया गया है। पाँचों देश अपने दावे को मजबूती देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ईएडीएस कम्पनी इस बार भारतीय कहावत दूध का जला छाछ भी फूंक मार कर पीता है' की तर्ज पर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती क्योंकि सेना के लिए 197 हेलीकॉप्टरों की खरीददारी में ऐन मौके पर उसका सौदा रद्द हो गया था।
नेपाल में संविधान सभा की 601 सीटों के लिए हुए चुनाव के शुक्रवार को घोषित परिणामों में माओवादी 29.28 प्रतिशत वोटों के साथ 220 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरे हैं।
माओवादियों की पार्टी को प्रत्यक्ष चुनाव में 240 में से 120 सीटें मिली हैं जबकि उन्हें समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से 100 सीटें हासिल हुई हैं। माओवादियों के पक्ष में 31 लाख 44 हजार 204 वोट पड़े।
नेपाली काग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी को समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 22 लाख 69 हजार 823 वोट मिले। कांग्रेस को 110 सीटें मिली हैं जबकि संयुक्त मार्क्सवादी-लेनिनवादी को 103 सीटों के साथ 21 लाख 83 हजार 370 वोट मिले।
एम पी आर एफ चौथी बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। उसे 52 सीटों के साथ छह लाख 78 हजार 300 वोट मिले हैं।
तेराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी ने 20, सदभावना पार्टी ने नौ और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने आठ सीटें जीती हैं लेकिन इन्हे प्रत्यक्ष चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी है।
चुनाव में 16 ऐसी पार्टियाँ हैं जिन्हें प्रत्यक्ष चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली हैं। उन्हें समानुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत सीटें मिली हैं।
एक महीने के भीतर वायुसेना के पास 734 करोड़ रुपए की लागत से खरीदे गए तीन बोइंग बिजनेस जेट (बीबीजे) में से पहला विमान आ रहा है जिसमें प्रधानमंत्री के लिए पूरा दफ्तर आकाश में खुल जाएगा। गलीचों, सोफासेट और तमाम तरह की सुविधाओं से लैस इस उड़न खटोले में धरती से 41 हजार फुट तक की ऊँचाई पर सफर करते हुए प्रधानमंत्री बैठकें और प्रेस काँफ्रेंस भी कर सकेंगे। थकान होने पर वह चैन से सो सकेंगे और अपने विमान में ही ऑडियो विजुअल माध्यम से हमेशा नई दिल्ली कार्यालय के सम्पर्क में बने रहेंगे।
बीबीजे अगले महीने के आखिर तक वायु सेना के वीवीआईपी कम्युनिकेशन स्क्वेड्रन में शामिल हो रहा है जिसका जिम्मा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों की हवाई यात्राओं का होता है। इस समय विमान की भीतरी सज्जा अमेरिका के डेलवेयर में पैट्स एयरक्राफ्ट कम्पलीशन सेंटर में चल रही है। वहाँ इसमें अत्याधुनिक स्टेटरूम, मीटिंग रूम, कम्युनिकेशन सेंटर और 48 यात्रियों के बैठने की सुविधा बनाई जा रही है। वहीं पर भारतीय वायु सेना इसकी परीक्षण उड़ान भी आयोजित कर रही है। यह विमान मई के आखिर में या जून के पहले सप्ताह में पालम हवाई अड्डे को स्पर्श करेगा।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए इस विमान में अत्यंत गोपनीय मिसाइल बचाव प्रणाली लगाई जा रही है तथा इसे राडार चेतावनी प्रणाली एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोधी उपायों से लैस किया जा रहा है। विमान में इंफ्रा रेड सेंसर और मिसाइल को काफी दूरी से भांपने वाले जैमर लगे होंगे।
वायु सेना के सूत्रों के अनुसार यह विमान एक बार में 14 घंटे की उड़ान में ग्यारह हजार से अधिक किलोमीटर का सफर तय कर सकता है और 807 वर्ग फुट का यह प्रधानमंत्री आवास एवं कार्यालय हवा में 890 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है।

महँगाई की दर में वृद्धि से बेफ्रिक देश के शेयर बाजारों ने बैकिंग, धातु, रियलटी तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों को मिले समर्थन से शुक्रवार को लंबी छलाँग लगाई। बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 404.90 अंक के उछाल के साथ पचपन दिन के अंतराल के बाद 17 हजार अंक को पार करने में सफल रहा। निफ्टी ने तेजी का सैंकड़ा अर्थात 111.85 अंक की बढ़त पाई।
सत्र की शुरुआत से ही बाजार मजबूती में दिखा। मोबाइल टेलीफोन सेवा वर्ग की अग्रणी कंपनी भारती एयर टेल के शानदार परिणाम से शुरुआत से ही सुधार का रुख था। महँगाई के एक सप्ताह की गिरावट के बाद फिर से बढ़ने का बाजार पर कोई असर नहीं दिखा और वह निरंतर मजबूत होता रहा।
सेंसेक्स गुरुवार के 16721.08 अंक की तुलना में 16781.97 अंक पर मजबूत खुला और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऊँचे में 17150.92 अंक तक चढ़ने के बाद समाप्ति पर सेंसेक्स कुल 404.90 अंक अर्थात 2.42 प्रतिशत की बढ़त से 17125.98 अंक पर बंद हुआ। उन्नतीस फरवरी के बाद सेंसेक्स फिर 17000 अंक के पार निकला है।
निफ्टी 111.85 अंक बढ़कर 5111.70 अंक पर पहुँच गया। एशियाई शेयर बाजारों में जापान का निक्केई 2.4 प्रतिशत ऊँचा रहा, जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसैंग 0.64 प्रतिशत नीचे रहे।
सेंसेक्स में जोरदार बढ़त के बावजूद छोटी कंपनियों में बिकवाली का दबाव रहने से बीएसई का रुख नकारात्मक रहा। मिडकैप सूचकांक 51.81 अंक ऊपर रहा तो स्मालकैप में 13.29 अंक की गिरावट थी। बीएसई में कुल 2762 कंपनियों के शेयरों में कामकाज हुआ। इसमें से 53.08 प्रतिशत अर्थात 1466 में नुकसान तथा 45.08 प्रतिशत अथवा 1245 के शेयर फायदे में रहे, जबकि 51 में स्थिरता थी। सेंसेक्स के तीस शेयरों में 22 फायदे ओर आठ नुकसान में थे।
बीएसई के अन्य सूचकांकों में बैंकेक्स 286.03 अंक, धातु 370.75 अंक, ऑयल एंड गैस 179.23 अंक तथा रियलटी में 112.64 अंक का सुधार हुआ। बीएसई का कोई भी सूचकांक आज गिरावट में नहीं रहा।
शानदार नतीजों की बदौलत भारती एयर टेल का शेयर सेंसेक्स में सर्वाधिक बढ़त हासिल करने वाला रहा। इसमें 9.61 प्रतिशत अर्थात 81.10 रुपए का उछाल आया। शुरु में 850 रुपए पर खुलने के बाद ऊँचे में 941.90 रुपए तथा नीचे में 845 रुपए तक गिरकर यह 925.30 रुपए पर बंद हुआ। रिलायंस कम्युनीकेशंस में 577.05 रुपए पर 8.31 प्रतिशत अर्थात 39.75 रुपए का लाभ रहा।
आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस एनर्जी, एसबीआई, विप्रो लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, एचडीएफसी, ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटीसी लिमिटेड, सत्यम कंप्यूटर, एनटीपीसी, एलएंडटी, भेल, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज, टाटा मोटर्स और ग्रासिम इंडस्ट्रीज सेंसेक्स के फायदे वाले पहले बीस शेयरों में थे।
एसीसी का शेयर आज लगातार दूसरे दिन घाटे में रहा। इसमें 782.75 रुपए पर 1.92 प्रतिशत अर्थात 15.35 रुपए निकल गए। अम्बूजा सीमेंट, डीएलएफ, सिप्ला लिमिटेड, मारुति सुजूकी, इन्फोसिस टेक, जयप्रकाश एसोसिएट्स और टीसीएस घाटे में बंद हुए।
बढ़ती लागत का दबाव झेल रही घरेलू कंपनियाँ अपने माल की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं जिससे अप्रैल-सितंबर 08 की छमाही में महँगाई की मार और कड़ी होने का खतरा बढ़ा है। यह बात भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की के ताजा व्यावसायिक मनोबल सर्वेक्षण से सामने आई है।
मार्च में कराए गए इस सर्वेक्षण की रविवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है, ' कच्चे माल और उत्पादन के अन्य संसाधनों की बढ़ती लागत के कारण विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के लिए कारोबार में मुश्किलें बढ़ गई हैं। सर्वेक्षण के अनुसार लागत का दबाव बढ़ने के कारण कारण 31 प्रतिशत कंपनियाँ अगले छह माह के दौरान कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इनमें भारी उद्योग क्षेत्र की कंपनियाँ भी शामिल हैं। छह माह पूर्व केवल 15 प्रतिशत कंपनियों ने कहा था कि वे कीमत बढ़ाने की योजना बना रही है।
यह बदलाव तब आया है जबकि वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने महँगाई का दबाव कम करने के लिए इस बार बजट में उत्पाद शुल्क में दो प्रतिशत की कमी कर दी है ताकि कारखानों में बनने वाले सामानों की कीमतें कम हो सकें।
महँगाई के दवाब की प्रमुख सूचक थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रा स्फीति की वार्षिक दर 12 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 7.14 प्रतिशत से बढ़कर 7.33 प्रतिशत हो गई। पिछले वर्ष इसी दौरान मुद्रा स्फीति 6.34 प्रतिशत थी। मुद्रा स्फीति का दबाव एक बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने शनिवार को वाम दलों के साथ एक बैठक के बाद जारी बयान में राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे महँगाई पर राजनीति न करें और इसका भय न खड़ा करें क्यों कि इससे जमाखोरी और सट्टा बाजारी बढ़ती है।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के बारे में फिक्की की विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2008-09 के बजट में उद्योगों को दो उत्पाद शुल्क में दो प्रतिशत की सामान्य रियायत का लाभ भी लागत के दबाव में काफूर हो सकता है। ज्यादातर कंपनियों का कहना है कि उत्पाद शुल्क की रियायत की बदौलत अपनी चीजों के दाम को थोड़े समय तक ही थाम सकती हैं।
फिक्की के इस सर्वेक्षण में एक करोड़ रुपए से 50 हजार करोड़ रुपए तक का सालाना कारोबार करने वाली 392 कंपनियों से व्यवसाय के वातावरण के बारें में उनकी राय ली गई थी। इनमें कपड़ा, चमड़ा से लेकर लोहा, इस्पात और दवा से लेकर वाहन तक बनाने वाली कंपनियाँ शामिल हैं।
फिक्की की विज्ञप्ति के अनुसार ब्याज की महँगी दरों, रुपए की विनिमय दर में तेजी और कच्चे माल की लागत और मुद्रा स्फीति के दवाव के कारण उनका विश्वास डिगा हुआ है। इस सर्वेक्षण में 50 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि पिछले छह माह में व्यावसायिक वातावरण खराब हुआ है। छह माह पूर्व इस तरह की बात करने वाली कंपनियों का हिस्सा 19 प्रतिशत था। 38 प्रतिशत ने कहा कि अगले छह माह तक यही माहौल रहेगा जबकि 33 प्रतिशत ने कहा कि माहौल और खराब हो सकता है। पर 54 प्रतिशत अब भी निवेश बढने की उम्मीद रखती है जो फिक्की की राय में आशा की लौ के बने रहने का पर्याय है।
फिक्की सर्वेक्षण का सकल व्यावसायिक विश्वास सूचकांक छह माह पूर्व के 61.2 अंक से घट कर 55.3 अंक पर आ गया है। केवल 36 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि पिछले छह माह में उनके उद्योग का कामकाज सुधरा है। 38 प्रतिशत ने कहा कि अगली छमाही में उनका लाभ घट सकता है।
देश के शेयर बाजारों में पिछले दो सप्ताह से चली आ रही तेजी आगामी हफ्ते विदेशी शेयर बाजारों की चाल पर निर्भर करेगी। छब्बीस अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 644.78 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 153.30 अंक की जोरदार बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार विश्‍लेषकों का कहना है कि वैसे तो बढ़त का सिलसिला बने रहने की अधिक संभावना है किंतु इसका काफी कुछ दारोमदार विदेशी बाजारों की चाल पर निर्भर करेगा।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोककुमार अग्रवाल के अनुसार फिलहाल जो परिस्थितियाँ है उसे देखते हुए बाजार का मूड अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के परिणामों को लेकर बाजार को जैसी उम्मीद थी, नतीजे उससे कहीं बेहतर निकले।
अग्रवाल का कहना है कि महँगाई को लेकर थोड़ी बहुत चिंता जरूर है किंतु गेहूँ के दामों में नरमी का रुख है और आगे मानसून अच्छा रहने की उम्मीद से आवश्यक जिसों के दामों में उतार आ सकता है जो बाजार के लिए अच्छा रहेगा।
शुक्रवार को अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा। माइक्रोसाफ्ट कॉर्पोरेशन के निराशाजनक परिणामों और कच्चे तेल की रिकार्ड कीमतों से बाजार पर असर दिखा। इसका सोमवार को यहाँ के बाजार पर कुछ प्रभाव देखा जा सकता है।
रिजर्व बैंक 29 अप्रैल को चालू वित्त वर्ष के लिए रिण एवं मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा। बाजार की नजर इस पर टिकी हुई है कि रिजर्व बैंक महँगाई को रोकने के लिए क्या ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। बैंक पहले ही आश्चर्यजनक ढंग से नगद सुरक्षित अनुपात..सीआरआर.. में आधा प्रतिशत बढ़ोतरी कर चुका है। दो चरणों में लागू की जाने वाली बढ़ोतरी की पहली किस्त छब्बीस अप्रैल को शुरू हो गई। दूसरे चरण की वृद्घि 10 मई से लागू होगी। रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंकिग तंत्र से साढ़े अट्ठारह हजार करोड़ रुपए निकल जाएँगे।
छब्बीस अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में सेंसेक्स 644.78 अंक अर्थात 3.91 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पचपन दिन के बाद 17 हजार अंक को पार करने में सफल रहा। यह 17125.98 अंक पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 153.3 अंक अर्थात 3.09 प्रतिशत की छलांग के साथ 5111.70 अंक पर पहुँच गया।
कंपनियों के बेहतर परिणामों की बदौलत विदेशी निवेशकों की सक्रियता फिर से दिखी। बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप भी तेजी की दौड़ में पीछे नहीं रहे। इनमें क्रमश: 219.82 अंक अर्थात 3.22 प्रतिशत तथा 196.36 अंक अथवा 2.30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बीते सप्ताह के पहले दो दिनों में तेजी पाने के बाद बुधवार को शेयरबाजारों को झटका लगा। गुरुवार को वायदा एवं विकल्प कारोबार का अंतिम दिन होने के कारण सीमित गतिविधियों के बीच शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख रहा किंतु शुक्रवार को शेयर बाजारों ने अच्छी छलांग लगाई।
सप्ताह के दौरान सेंसेक्स से जुडी कंपनियों में बढ़त पाने वाले शेयरों आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 9.69 प्रतिशत बढ़कर 916.15 रुपए पर पहुँच गया। समाप्त वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में शुद्ध लाभ में गिरावट के समाचारों के बीच अग्रणी यात्री कार कंपनी मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड का शेयर 2.99 प्रतिशत गिरकर 737.25 रुपए का रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 2624.50 रुपए पर 0.47 प्रतिशत का नुकसान हुआ।
इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी लार्सन ऐंड ट्रुबो का शेयर 7.03 प्रतिशत की छलांग से 2971.35 रुपए पर पहुँच गया। सत्यम कंप्यूटर का शेयर 444.60 रुपए पर 5.19 प्रतिशत नीचे आए। विप्रो में 466.20 रुपए पर 1.52 प्रतिशत की बढ़त थी।
नेपाली कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि माओवादी प्रमुख प्रचंड के नेतृत्व में सरकार का गठन करने से पहले माओवादियों को अपने हथियार सार्वजनिक तौर पर नष्ट कर देने चाहिए अथवा उन्हें अधिकारियों के हवाले कर दिया जाना चाहिए।
नेपाल में हाल ही में संपन्न संविधान सभा के चुनाव में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी [माआवोदी] सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। नेपाली कांग्रेस के उप प्रमुख गोपाल मान श्रेष्ठ ने कहा कि नेकपा [माओवादी] प्रमुख प्रचंड को अगर अगली सरकार का नेतृत्व करने की इच्छा है तो उन्हें माओवादियों की जनमुक्ति सेना [पीएलए] के सुप्रीम कमांडर का पद छोड़ देना चाहिए। श्रेष्ठ ने कहा कि पीएलए और नेपाल सेना का प्रमुख एक ही समय में एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता। सरकार बनाने से पहले पूर्व विद्रोहियों को अपने हथियार या तो सार्वजनिक रूप से नष्ट कर देने चाहिए अथवा उन्हें अधिकारियों के हवाले कर देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि आज से दो साल पहले नेपाल की बहुदलीय सरकार के समय माओवादियों ने जब शांति प्रक्रिया में भाग लेते हुए मुख्यधारा में प्रवेश किया था तो लगभग साढ़े तीन हजार हथियार संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सौंप दिए थे। प्रचंड ने इससे पहले कहा था माओवादियों की अगुवाई में जल्दी ही सरकार का गठन किया जाएगा। इस सरकार में वह प्रधानमंत्री बनेंगे। नेपाल के अंतरिम संविधान के अनुसार देश का प्रधानमंत्री ही सेना का सर्वोच्च कमांडर होता है। यह पद पहले नेपाल के राजा के पास था।
नेपाली कांग्रेस और नेकपा [एमाले] ने माओवादियों से कहा है कि वह सरकार बनाने से पहले दूसरे दलों के कैडरों को आतंकित करना तथा डराना धमकाना छोड़ें। नेकपा [एमाले] की स्थायी समिति के नेता झालानाथ खनाल ने माओवादियों से कहा कि वह अपने यंग कम्यूनिस्ट लीग को भंग कर दे। माओवादियों की यह युवा शाखा कथित रूप से पूरे देश में लोगों को डराने, धमकाने, प्रताडि़त करने तथा अपहरण करने के मामलों में संलिप्त है।
दूसरी तरफ संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिम संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। उनका कहना है कि नई सरकार के गठन के लिए माओवादियों को महत्वपूर्ण दलों से समर्थन हासिल करना आवश्यक होगा। संविधान विशेषज्ञों को कहना है कि संविधान उन लोगों को सरकार गठन करने की अनुमति नहीं देता जिनके पास साधारण बहुमत है। नेपाल की संविधान सभा में 601 सीट है। हाल ही में हुए संपन्न चुनाव के बाद माओवादियों के पास 220 सीटें हैं जो कुल सीट की 36 फीसदी है। सदन में नेपाली कांग्रेस और नेकपा [एमाले] ने क्रमश: 110 और 103 सीटें जीती हैं। संवैधानिक अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि संविधान के अनुसार नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए राष्ट्रीय सहमति की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बदलने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इस प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों को एक साथ काम करना चाहिए ताकि सहमति से नए संविधान का मसौदा तैयार किया जा सके।
पहाड़ के समग्र विकास के लिए अलग गोर्खालैंड राज्य होना जरूरी है। उक्त मंतव्य आल झारखंड स्टूडेंट पार्टी के केंद्रीय महासचिव अजय व रांची शाखा के अध्यक्ष जेम्सू खाल्गू ने शनिवार को व्यक्त की। आझा स्टूडेंट पार्टी के महासचिव अजय ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को विकास की काफी उम्मीदें हैं। इसके लिए पहाड़ व समतल को मिलाकर जातिगत नहीं बल्कि विकास के मद्देनजर अलग गोर्खालैंड राज्य का गठन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग गोर्खालैंड राज्य बनने से पहाड़, समतल के मारवाड़ी,बिहारी, बंगाली, आदिवासी समेत क्षेत्र में रहने वाले सभी वर्ग के लोग विकास से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि अलग गोर्खालैंड राज्य के लिए आगसू समर्थन करेगा और इसके लिए सभी कदम उठाने को तैयार है। पार्टी महासचिव ने कहा कि डुवार्स क्षेत्र में पार्टी ने अलग राज्य के समर्थन में जनसभा व रैली आयोजित करनी शुरु कर दी है। उन्होंने कहा कि गोर्खाओं ने झारखंड राज्य गठन की मांग में सहयोग दिया था जिसे हम लोग भूले नहीं हैं। इसलिए गोर्खालैंड राज्य गठन करने के लिए पहाड़ तराई से लेकर दिल्ली तक के संघर्ष होगा। उन्होंने कहा कि अलग राज्य गोर्खालैंड गठन होने से मात्र पहाड़ और तराई क्षेत्र का विकास होगा। जब तक गोर्खालैंड नहीं होगा तब तक विकास होना संभंव नहीं है। आगासू नेताओं को गोजमुमो टाउन कमेटी के अध्यक्ष दिनेश गुरुंग और पार्षद तेजिंग खाम्बाचे ने स्वागत किया इन नेताओं को विभिन्न स्थानों में स्वागत किया है।
गोर्खाओं को विदेशी कहना कतई बर्दाश्त नहीं उक्त बातें गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग ने शनिवार को सुनकोश में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहीं। अलग गोर्खालैंड राज्य के समर्थन में आग्सू द्वारा विगत 13 अप्रैल से दार्जिलिंग पार्वत्य क्षेत्र से प्रारंभ हुई पदयात्रा 26 अप्रैल शनिवार को सुनकोश पहुंचकर सभा के रुप में तब्दील हुई। श्री गुरुंग ने कहा कि गोर्खालैंड राज्य के मानचित्र में दार्जिलिंग पार्वत्य क्षेत्र से लेकर सुनकोश तक का भूभाग है। उक्त क्षेत्र मिलाकर ही गोर्खालैंड राज्य देना होगा। श्री गुरुंग ने कहा कि हम अपनी मांग के लिए जनतांत्रिक तरीके से कदम आगे बढ़ायेंगे। श्री गुरुंग ने कहा कि गोर्खालैंड के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में मार्च तक गोर्खालैंड राज्य अवश्य होगा। गोर्खालैंड राज्य की मांग का विरोध करने वालों के संबंध में श्री गुरुंग ने कहा कि वह चाहे जितने विरोधी नारे लगायें सभी सहन कर लेंगे मगर गोर्खाओं को विदेशी कहना कतई बर्दाश्त न होगा। गोजमुमो सुप्रीमो श्री गुरुंग ने कहा कि गोर्खाओं ने देश को आजादी दिलाने से लेकर अब तक देश की सुरक्षा में किसी तरह की कोताही नहीं बरती है इसलिए भारत सरकार को गोर्खाओं के त्याग व बलिदान का उचित मूल्यांकन कर गोर्खालैंड देना होगा। श्री गुरुंग ने कहा कि अलग गोर्खालैंड राज्य के लिए बलि की वेदी पर चढ़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैं जनता को धोखा न दूंगा। उन्होंने कहा कि डुवार्स वासियों को अब कोई धोखा न होगा। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी ,डुवार्स समेत जितनी भी भूमि है उसमें से एक इंच भी भूमि छोड़ी न जायेगी। उक्त सारी जमीन गोर्खालैंड के मानचित्र के अन्तर्गत है। गोजमुमो सुप्रीमो ने विगत 13 अप्रैल से आग्सू द्वारा प्रारंभ हुई पदयात्रा में शामिल लोगों को बधाई दी। वहीं दूसरी ओर आग्सू के पदयात्रियों ने सुनकोश पहुंचकर वहां अलग गोर्खालैंड राज्य की मांग के समर्थन में आग्सू का झंडा लहराया। समारोह में आग्सू अध्यक्ष रविशंकर शर्मा, उपाध्यक्ष शंकर छेत्री समेत केपीपी के नेता भी उपस्थित थे। दूसरी ओर कर्सियांग से मिली जानकारी के अनुसार अलग राज्य गोर्खालैंड के मानचित्र व सीमांकन की पहचान को लेकर विगत 13 अप्रैल से दार्जिलिंग से प्रारंभ पदयात्रा शनिवार को सफलता पूर्वक सुनकोश पहुंचने की जानकारी मिलते ही आज गोजमुमो आग्सू के सदस्यों ने आतिशबाजी कर खुशी व्यक्त की। गौरतलब है कि पदयात्रियों ने सुनकोश पहुंचकर गोजमुमो का झंडा फहराया है। इसी तरह गोसाईगांव से मिली जानकारी के अनुसार आग्सू सदस्यों द्वारा सुनकोश नदी के किनारे झंडा फहराने की सूचना मिलते ही गोजमुमो अध्यक्ष विमल गुरुंग व महासचिव रोशन गिरि के नेतृत्व में शनिवार को हजारों समर्थको ने गगनभेदी नारेबाजी करते हुए गोर्खालैंड की सीमा रेखा तय की। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 न.रंभी बाजार गोर्खालैंड के सचिव नरबू लामा ने कहा कि पूर्व इतिहास के दौरान ही हमने यह फैसला लिया है जिसे हम हासिल करके रहेंगे।श्री लामा ने कहा कि संकोश नदी के उसपार बोड़ोलैंड है और इस पार सिलीगुड़ी, डुवार्स, इस्लामपुर व चोपड़ा तक का क्षेत्र गोर्खालैंड के मानचित्र में है। हम अलग गोर्खालैंड राज्य की समस्त सीमाओं पर झंडा फहरायेंगे।

Thursday, April 17, 2008

पवित्र ओलिंपिक मशाल रिले समाप्त

पवित्र ओलिंपिक मशाल रिले समाप्त
http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0804/15/1080415085_1.htm

नई दिल्ली (वेबदुनिया/भाषा), गुरूवार, 17 अप्रैल 2008( 17:29 IST )






ओलिंपिक मशाल बुधवार रात भारतीय सरजमीं पर उतरी। रंगारंग वस्त्र पहने बच्चों ने कड़ी सुरक्षा के बीच यहाँ मशाल की अगवानी की। समाचार लिखे जाने तक राष्ट्रपति भवन से पवित्र ओलिंपिक मशाल को रवाना किया, जो बाद में विजय पथ पर जाकर खत्म हुई।

राजपथ पर इस मशाल को थामने वाले हाथ थे महाबली सतपाल, निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा, अंजू बॉबी जॉर्ज, कुंजरानी देवी, सैफ अली खान, धनराज पिल्ले, विकलांग एथलीट राजिन्दर सिंह, असलम शेरखान, गुरचरणसिंह रंधावा, चक दे इंडिया की सागरिका घाटगे, कर्णम मल्लेश्वरी, पीटी उषा, लिएंडर पेस, महेश भूपति।

कुल 40 भारतीय खेल हस्तियों के हाथों से यह मशाल गुजरी। मशाल कुल 3 किलोमीटर का सफर तय किया और जो भी हाथ इस मशाल को थाम रहे थे, वे खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।

कड़े सुरक्षा घेरे में मशाल : जब ओलिंपिक रिले को भारतीय हस्तियाँ अपने मुकाम पर पहुँचा रहीं थी, तब मशाल की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मशाल वाहक के आसपास वॉलेंटियर्स मौजूद थे। इस रिले में हिस्सा लेने के लिए चीन से 5 एथलीट भी आए थे।

विजय पथ से जब मशाल का कारवाँ गुजर रहा था, तब इंडिया गेट पर सिख रेजिमेंट का बैंड संगीत की स्वर लहरियाँ बिखेरते हुए माहौल को और गरिमामय बना रहा था।

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी पहुँची : मशाल को निर्धारित स्थल (राजपथ) पर लिएंडर पेस और महेश भूपति ने पहुँचाया। यहाँ पर एक विशाल पात्र में मशाल प्रज्जवलित की गई। इस ऐतिहासिक मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित, केन्द्रीय खेलमंत्री गिल, भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी मौजूद थे। ओलिंपिक आंदोलन को भारत में फैलाने में कलमाड़ी का अहम योगदान रहा है।



PTI

इससे पहले 72 सेंटीमीटर लंबी और 985 ग्राम वजन वाली यह मशाल इस्लामाबाद से विशेष विमान से यहाँ पहुँची थी। विमान पालम तकनीकी इलाके में देर रात एक बजकर 10 मिनट पर उतरा। मशाल की अगवानी के लिए रंगारंग परिधान धारण किए हुए करीब 30 भारतीय एवं चीनी बच्चे हवाई अड्डे पर मौजूद थे।
सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त : ओलिंपिक मशाल रिले के आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए गए हैं तथा तिब्बती प्रदर्शनकारियों के आयोजन को बाधित करने के किसी भी प्रयास को नाकाम करने के लिए पूरे मध्य दिल्ली क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया। मशाल रिले की सुरक्षा के लिए 15 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।

मध्य दिल्ली स्थित पंचतारा होटल ली मैरीडियन में मशाल को रखा गया था और उसके समीप बड़ी संख्या में त्वरित कार्रवाई बल समेत राइफलों से लैस सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था।

मशाल रिले के निर्धारित मार्ग राजपथ पर अवरोधक लगाए गए हैं और इस मार्ग पर ओलिंपिक मशाल रिले को बाधित करने के तिब्बती प्रदर्शनकारियों के किसी भी प्रयास को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बल कड़ी नजर रख रहे हैं।

इसी बीच खबर यह है कि अकबर रोड़ पर प्रदर्शन कर रहे 13 तिब्बतियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में एक महिला भी शामिल थी।

तिब्बतियों ने किया विरोध प्रदर्शन


नई दिल्ली (भाषा), गुरूवार, 17 अप्रैल 2008( 10:47 IST )






तिब्बती प्रदर्शनकारियों ने बुधवार आधी रात में ओलिंपिक मशाल के भारत पहुँचने पर विरोध प्रदर्शनों के साथ उसकी अगवानी की। तिब्बतियों ने यहाँ उस पंचतारा होटल के समक्ष भी प्रदर्शन किया जहाँ मशाल को रखा गया है।

तिब्बतियों ने यहाँ ली मैरिडियन होटल के साथ ही धौला कुआँ इलाके में भी तड़के प्रदर्शन किया। पंचतारा होटल के बाहर से करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।

ओलिंपिक मशाल के बीती रात एक बजकर दस मिनट पर पालम हवाई अड्डा पहुँचने के बाद रात्रि साढ़े तीन बजे करीब 30 तिब्बती राजपथ से करीब आधा किलोमीटर दूर जनपथ पर स्थित होटल के सामने आए। राजपथ से ही मशाल की दौड़ होगी।

पीली जैकेट पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने 'तिब्बत के लिए न्याय' और 'हम आजादी चाहते हैं' जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को भी तोड़ने की कोशिश की।

बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों ने उनके प्रयास को नाकाम कर दिया और उनमें से करीब छह लोगों को हिरासत में ले लिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तत्काल सड़क से हटा दिया और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया गया।

बिरंची की पत्नी ने लगाई गुहार


भुवनेश्वर (भाषा), गुरूवार, 17 अप्रैल 2008( 17:40 IST )






बाल मैराथन धावक बुधियासिंह के दिवंगत पूर्व कोच की पत्नी ने अपने पति की हत्या के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग की। इस बीच मामले का मुख्य अभियुक्त अभी तक फरार है।

प्रदेश के बड़ागड़ा पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद बिरंची की विधवा गीतांजलि ने यहाँ संवाददाताओं से कहा कि जिस समय गोलीबारी की यह घटना हुई, उस समय वे जूडो हॉल में थीं। उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनके पति गुहार कर रहे थे- 'राजा मुझे गोली मत मारो।' गीतांजलि भी एक जूडो कोच हैं।

मेघालय व असम में भूकंप के झटके


शिलाँग (वार्ता), गुरूवार, 17 अप्रैल 2008( 12:05 IST )






मेघालय की राजधानी शिलांग और असम के कुछ भागों में आज सुबह भूकंप के हलके झटके महसूस किए गए।

सेन्ट्रल सेस्मोलॉजिकल आर्ब्जवेटरी (सीएसओ) के अधिकारियों ने बताया कि सुबह छह बजकर 42 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 मापी गई। भूकंप का केन्द्र असम के मॉरिगाँव जिले में 26.3 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 92.5 डिग्री पूर्वी देशान्तर में था।

अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

कुपवाड़ा में सैन्य पोशाक पहनने पर प्रतिबंध


श्रीनगर (भाषा) , बुधवार, 16 अप्रैल 2008( 22:30 IST )






कुपवाड़ा जिला प्रशासन ने आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आम लोगों के सेना की पोशाक पहने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कुपवाड़ा के जिला अधिकारी ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि सेना की पोशाक बेचने वाली दुकानों और इसकी सिलाई करने वाले दर्जियों के ठिकाने पर समय-समय पर छापा मारकर सख्ती के साथ इस आदेश का पालन किया जाए।

सावधानी बरतने के लिए यह आदेश पारित किया गया, ताकि जिले में आतंकी गतिविधियों पर अंकुश पाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि आतंकवादी सेना की पोशाक पहनकर कश्मीर घाटी में आतंकी कारवाईयों को अंजाम दिया करते हैं।
इसी तरह का प्रतिबंध पिछले महीने बारामूला और बांदिपोरा जिले में भी लगाया गया था।

इस बीच जिला अधिकारी ने जिले में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक धारा 144 लगाए जाने के आदेश की अवधि को अगले साठ दिनों के लिए और बढ़ा दिया है।
प्रियंका से मिलकर नलिनी के पाप धुले!


चेन्नई (भाषा), गुरूवार, 17 अप्रैल 2008( 11:00 IST )






राजीव गाँधी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही नलिनी मुरुगन वेल्लूर जेल में पिछले महीने प्रियंका वढेरा से मुलाकात के बाद काफी राहत महसूस कर रही है।

यह बात उसके भाई पीएस भाग्यनाथन ने कही। उसने कहा कि नलिनी ने महसूस किया कि अनजाने में किए गए उसके पाप धुल गए हैं। गौरतलब है कि पहले इस मामले में भाग्यनाथन भी आरोपी था, लेकिन बाद में वह निर्दोष साबित हो गया।

भाग्यनाथन ने अपनी बहन के हवाले से बताया कि प्रियंका से मिलने के बाद वह महसूस करती है कि उसके पाप धुल गए हैं, जो उसने अनजाने में किए थे।

भाग्यनाथन ने कहा कि यह बेहद निजी मुलाकात मीडिया में आ जाने से और इस पर चल रही अटकलों से उसको और उसकी बड़ी बहन को दु:ख पहुँचा। उसने बताया कि इस मुलाकात के बाद मेरी बहन काफी उत्साहित थी, लेकिन मीडिया में चल रही अटकलों से उसकी खुशी को झटका लगा है। उसने बताया कि मेरी बहन इस तरह की नहीं है, जो सुर्खियों में रहना पसंद करे।

भाग्यनाथन ने यह भी कहा कि नलिनी ने दोनों के बीच हुई बातचीत के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया है। गौरतलब है कि नलिनी को उसके पति मुरुगन और दो अन्य के साथ मृत्युदंड दिया गया था तथा सोनिया गाँधी के हस्तक्षेप के बाद उसकी सजा उम्रकैद में बदल दी गई। इन्हें लिट्टे कार्यकर्ता बताया गया था।

नलिनी के सलाहकार एस. दुरईसामी ने बताया कि नलिनी की रिहाई की एक याचिका मद्रास उच्च न्यायालय में दी गई थी, जिस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

इस बीच प्रियंका वढेरा से मुलाकात के बाद सुर्खियों में आई नलिनी मुरुगन ने स्थानीय पत्रकारों के मिलने और बातचीत करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

जेल अधिकारियों ने बताया कि जेल अधीक्षक ज्ञानन सौंदरी को सौंपे लिखित बयान में नलिनी ने कहा कि वह पत्रकारों से नहीं मिल सकती क्योंकि वह बीमार है।

ये खाने लगे खेत, इन्हें पहुँचाओ विदेश!


शिमला, बुधवार, 16 अप्रैल 2008( 16:35 IST )






हिमाचल प्रदेश की सरकार ने केंद्र सरकार से कहा है कि बंदरों के निर्यात को प्रतिबंध से तत्काल मुक्त किया जाए। फिलहाल हो यह रहा है कि हिमाचल में बंदरों की सेना फसलों को खराब कर रही है। इससे सरकार को खासा नुकसान हो रहा है।

वन विभाग की ओर से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि बंदरों के निर्यात पर पिछले ढाई दशक से लगे प्रतिबंध को समाप्त किया जाए। वन विभाग के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

दरअसल 1982 में केंद्र सरकार ने पशुओं के अधिकारों की आवाज उठाने वाले लोगों की बात मानते हुए बंदरों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। तब से यह पूरे देश में लागू है।

बंदरों का निर्यात अमेरिका और ब्रिटेन के लिए प्रतिबंधित किया गया है। दरअसल इन देशों में बंदरों पर प्रयोग किए जाते हैं, इसके लिए जमकर पैसा दिया जाता है।

हिमाचल में अभी करीब 3.5 से 4 लाख बंदर मौजूद हैं। इसीलिए प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से बार-बार निवेदन कर रही है कि वह अपने ढाई दशक पुराने फैसले पर फिर से सोचे।

बैतूल सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार


बैतूल (मप्र), बुधवार, 16 अप्रैल 2008( 15:54 IST )






मध्यप्रदेश की बैतूल संसदीय सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखते हुए भाजपा ने उपचुनाव जीत लिया है।

जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण भट्‍ट के अनुसार भाजपा के हेमंत खंडेलवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के सुखदेव पाँसे को 35 हजार 440 मतों के अंतर से परास्त कर दिया।

बैतूल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में गत 12 अप्रैल को उपचुनाव हुआ था तथा मतों की गिनती का काम आज किया गया। यह सीट भाजपा सांसद विजय खंडेलवाल के निधन से रिक्त हुई थी और उपचुनाव में पार्टी ने उनके पुत्र हेमंत को टिकट दिया, जबकि कांग्रेस ने मासौद के विधायक सुखदेव पाँसे को मैदान में उतारा था।
कैलाश मानसरोवर यात्रा एक जून से


पिथौरागढ़ (भाषा), बुधवार, 16 अप्रैल 2008( 12:24 IST )






इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा नई दिल्ली से एक जून को आरंभ होगी और इसका समापन 24 सितंबर को होगा। यात्रा की नोडल एजेंसी कुमाऊ मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने यह जानकारी दी।

केएमवीएन के प्रबंध निदेशक अमित नेगी ने एक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बताया कि इस साल कैलाश और मानसरोवर की यात्रा पर कुल 16 जत्थे जाएँगे।

प्रत्येक जत्थे में 40 से 60 श्रद्धालु होंगे। इनके लिए आवश्यक प्रबंध करने के लिए संबद्ध विभागों को आदेश दे दिए गऍं है।
फिर खुलेगा भुतहा रेलवे स्टेशन


पुरुलिया (भाषा), मंगलवार, 15 अप्रैल 2008( 22:33 IST )






पुरुलिया जिले के 43 किलोमीटर दूर स्थित उस रेलवे स्टेशन को रेल मंत्रालय दोबारा खोलने की योजना बना रहा है जिसके बारे में कई भुतहा कहानियाँ प्रचलित हैं। इस स्टेशन पर आखिरी बार 1972 में रेलगाड़ी चली थी।

स्थानीय लोग इस रेलवे स्टेशन को भुतहा मानते हैं और अँधेरा होने के बाद यहाँ आने से बचते हैं। उनका कहना है कि स्टेशन पर रेलगाड़ी ने एक महिला को कुचल दिया था, जिसके बाद से उसकी आत्मा यहाँ पर भटकती है।

वरिष्ठ संभागीय व्यावसायिक प्रबंधक काली शंकर मुखर्जी कहते हैं कि ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिसमें भारतीय रेलवे ने किसी स्टेशन को मात्र इसलिए बंद कर दिया क्योंकि वहाँ पर आत्माएँ रहती हैं।

मुखर्जी के अनुसार हो सकता है कि स्टेशन के कर्मचारियों को यह स्थान पसंद न हो और स्थानांतरण करवाने के लिए उन्होंने ही भुतहा कहानियाँ फैला दी हों।

एक स्थानीय निवासी निलाधज ने बताया कि यहाँ पर रेलवे के एक कर्मचारी ने भूत को देखा था जिसके कुछ दिन बाद रहस्यमय परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद स्टेशन मास्टर यहाँ से भाग गया था।

सांसद और संसद की रेलवे संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष बासुदेव आचार्य का कहना है कि सँकरे गेज ट्रेक के कारण स्टेशन को बंद किया गया था। पूरे दिन में यहाँ के केवल एक गाड़ी ही जाती थी इसलिए अधिकारियों को इसे बंद करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि स्टेशन को दोबारा प्रारंभ करवाने के लिए हम पूरे प्रयास कर रहे हैं। राँची संभाग के एक अधिकारी ने स्टेशन को दोबारा प्रारंभ करने के रेलवे मंत्रालय के प्रयासों की पुष्टि करते हुए कहा है कि सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है।

अब देवी-देवता भी ब्रांडेड!


नई दिल्ली (भाषा), मंगलवार, 15 अप्रैल 2008( 15:43 IST )






कपड़ों और उपभोक्ता सामग्रियों की तरह देवी- देवता भी अब ब्रांडेड हो गए हैं तथा महँगाई की मार झेल रही जनता को अब ये कई गुना ज्यादा दामों में बाजार में उपलब्ध हैं।

ये देवी-देवता अब डी-मार्ट कंपनी के ब्रांड के तहत इटली और जर्मनी में बनाए जा रहे हैं तथा इनकी कीमत का दायरा 15 हजार रूपए से लेकर सात-आठ लाख रूपए तक है। डी-मार्ट कंपनी के प्रबंध निदेशक प्रवीण राव ने कहा कि ये उच्चवर्गीय उपभोक्ताओं ध्यान में रखकर निर्मित किए गए हैं तथा इसमें स्टर्लिग चाँदी का इस्तेमाल किया जाता है, जो कभी काला नहीं पड़ता।

इसके अलावा इसमें स्वारवोस्की क्रिस्टल लगे होते हैं तथा कभी-कभी इनमें सोने की भी पॉलिश का इस्तेमाल किया जाता है। डी-मार्ट में दुर्गा की मूर्ति की कीमत लगभग एक लाख 71 हजार रूपए है, जबकि कृष्ण की मूर्ति की कीमत 41 हजार पाँच सो रुपए, साईंबाबा की मूर्ति की कीमत 31 हजार रूपए तथा सबसे छोटे गणेशजी की मूर्ति की कीमत 12 हजार 500 रूपए है।

डी-मार्ट की मूल कंपनी डॉल्फिन मार्ट लिमिटेड है, जिसका सालाना कारोबार 150 करोड़ रूपए है। इसमें घरेलू सज्जा और उपहार खंड के लिए वस्तुएँ बनाने वाली कंपनी डी-मार्ट का सालाना कारोबार लगभग 18 करोड़ रूपए का है।

शेयर बाजार की सार्थक बाजीगरी



कमल शर्मा





शेयर बाजार के निवेशकों ने पिछले ढाई महीने में जिस तरह अपने निवेश को धुलते हुए देखा है, उसने अधिकतर निवेशकों की कमर तोड़ दी है। इस समय कोई भी निवेशक नया निवेश करने के मूड में नहीं है, लेकिन कुछ बातों को ध्‍यान में रखा जाए तो हर दशा में इस बाजार का बाजीगर बना जा सकता है।

बाजीगर निवेशक हमेशा बेहतर कंपनियों की सूची बनाने में लगे रहते हैं जिनमें सही समय और सही भाव पर निवेश किया जा सके। शेयर बाजार की हर गिरावट शेयर खरीदने का मौका देती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ऐसी मंदी के समय फंड पास हो। इसलिए अपने पिछले निवेश में उचित भाव पर मुनाफावसूली करते रहना जरूरी है। वारेन बफेट का कहना है कि वे किसी कंपनी में निवेश के लिए बेहतर समय का इंतजार बरसों तक कर सकते हैं।

बेहतर कंपनियों के चयन से पोर्टफोलियो उम्‍दा बनता है। जिस तरह बगैर ठोस परिकल्‍पना के एक परियोजना खड़ी नहीं की जा सकती वैसे ही बेहतर और मजबूत कंपनियों के अभाव में मजबूत पोर्टफोलियो नहीं बनाया जा सकता। कमजोर फंडामेंटल और अफवाहों या कानाफूसी के आधार पर चलने वाले शेयर मंदी में पानी पानी हो जाते हैं, जिससे आम निवेशक अपने को पूरी तरह साफ पाता है।

प्रतिकूल लांग टर्म बिजनैस भविष्‍य, कमजोर लेखा-जोखा और खराब संचालन वाली कंपनियाँ शार्ट टर्म में तारे तोड़ने की बात कहती हैं जिससे यह मजेदार लग सकती हैं, लेकिन मंदी का दौर आते ही इन कंपनियों के भाव औंधे मुँह दिखते हैं। ऐसी स्थिति में मजबूत आधार पर पोर्टफोलियो खड़ा करना चाहिए।

यदि आपको किसी छिपे खजाने की जानकारी हो तो क्‍या आप उसे आम आदमी को बताना चाहेंगे। नहीं ना, तो फिर शेयर टिप्‍स पर भरोसा क्‍यों। जिन कंपनियों के शेयरों में आप निवेश करना चाहते हैं उनके बारे में खुद पढ़ें और उन्‍हें समझें। बाजार में चल रही टिप्‍स को आप एक टूल के रूप में उपयोग कर सकते हैं, लेकिन केवल उसी पर पूरा आधार न रखें। ऐसी चलने वाली टिप्‍स आपके निवेश को साफ कर सकती है।

कहावत है कि जो जितनी बड़ी जोखिम लेता है, उतना ही मोटा मुनाफा कमाता है। तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए बड़ी रिस्‍क लेना जरूरी है, लेकिन ऐसी रिस्‍क लेते समय सावधान रहें। हरेक निवेशक को अपनी रिस्‍क प्रोफाइल को समझने और अस्थिरता के समय किस तरह आगे बढ़ाने की कला आनी चाहिए। बगैर इस कला के एक निवेशक बाजीगर नहीं बन सकता।

पोर्टफोलियो खड़ा करते समय जो बात सबसे ज्‍यादा ध्‍यान में रखी जानी चाहिए, वह है समूची निवेश राशि का उपयोग एक बारगी ही न करें। अपनी निवेश राशि को टुकड़ों में निवेश करें, ताकि आपकी खरीद लागत कम रहे और कई बार अपनी सूची में छूट गए बेहतर शेयर सस्‍ते में मिलने पर खरीदे जा सकें। भारी मंदी के समय अर्थव्‍यवस्‍था में अहम भूमिका निभाने वाली कंपनियों के शेयर पानी के भाव खरीदे जा सकते हैं। इसलिए अपने निवेश राशि को चरणबद्ध तरीके से निवेश करें।

पोर्टफोलियो खड़ा करने के लिए जो निवेश किया जा रहा है, उसमें उधारी का पैसा नहीं होना चाहिए। मौजूदा मंदी में जिस तरह अनेक निवेशक, हेज फंड्स और बैंक बुरे हालात में पहुँचे हैं उसका मुख्‍य कारण उधार के पैसे होना है। तेजी के समय उधार का पैसा आपको मालामाल बना सकता है, लेकिन मंदी के समय यह गले की हड्डी बन जाता है। याद रखें कि बुरे दिन मेल या ई-मेल भेजकर नहीं आते। उधार के पैसे तेजी के बीच में ही लगाएँ और तत्‍काल मुनाफा वसूली कर उस पैसे को चुकता कर दें।

अंत में, वित्‍त वर्ष 2008-09 के आम बजट में वित्तमंत्री पी. चिदम्‍बरम ने शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स में बढ़ोतरी कर लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्‍साहन दिया है, वह कोई नया नहीं है। निवेशक वही सफल हुए हैं, जिन्‍होंने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है।

दुनिया में नंबर वन बने अमीर वॉरेन बफेट का तो यही उसूल है कि निवेश करो और भूल जाओ। लंबी अवधि का निवेश बाजार में रोज-रोज होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता और गंभीर निवेशकों पर इसका असर भी नहीं पड़ता। बस थोड़ा-सा अनुशासन आपके पोर्टफोलियो को हर स्थिति में मजबूत रख सकता है एवं लंबी अवधि में आपको बेस्‍ट बाजीगर बना सकता है।

• य‍ह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।
शेयर लेवाली का बेहतर समय



कमल शर्मा





भारतीय शेयर बाजार के लिए वित्तवर्ष 2007-08 का अंतिम सप्‍ताह अच्‍छा रहा और जिस तरह के भारी बिकवाली दबाव की जो आशंका थी, वह आशंका ही रह गई।

अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था में आए मंदी के संकेत मिटे नहीं हैं, बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था जापान के बुरे हाल होने की खबरें बेचैनी बढ़ा सकती हैं।

देश में भी महँगाई की दर ने सिर उठा लिया है, बावजूद इसके पिछले शुक्रवार को बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में 356 अंक का उछाल देखने को मिला, जो यह संकेत देता है कि बाजार एक बार फिर कई कारकों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ता रहेगा।

लोकसभा चुनाव के इस वर्ष में खुद सरकार भी नहीं चाहती कि शेयर बाजार में अब कोई बड़ी गिरावट आए, जिससे उसे आक्रोश का सामना करना पड़े, लिहाजा बाजार का सेंटीमेंट सकारात्‍मक रखने के लिए अब अनेक घोषणाएँ होती रहेंगी।

मोतीलाल ओसवाल सिक्‍युरिटीज के इक्विटी वाइस प्रेसीडेंट मनीष सोंथलिया का मानना है कि शेयर बाजार ने बॉटम से उठना शुरू कर दिया है और उसने उच्‍च मुद्रास्‍फीति को भी डिस्‍काउंट कर लिया है। अगले सप्‍ताह से शेयर बाजार में मजबूती दिखने की उम्‍मीद है एवं चौथी तिमाही के लिए आने वाले कॉरपोरेट नतीजे इसे और बढ़ाएँगे।

एसबीआई कैप सिक्‍युरिटीज के संस्‍थागत बिक्री के प्रमुख जिग्‍नेश देसाई का कहना है कि कमोडिटी के दाम नीचे आ रहे हैं, जिससे अगले सप्‍ताह मुद्रास्‍फीति में कमी की आस है।

इस बीच, चुनाव आयोग ने अगस्‍त के बाद देश में आम चुनाव और चार राज्‍यों आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, उड़ीसा एवं सिक्‍कम में विधानसभा चुनाव की तैयारी दिखाई है।

आम चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार यह कतई नहीं चाहती कि आर्थिक मोर्चे पर ऐसे कोई कदम उठाए जाएँ जिससे उसे दिक्‍कतों का सामना करना पड़े, बल्कि अब शेयर बाजार को भी गर्म बनाए रखने के लिए अनेक सकारात्‍मक घोषणाएँ सुनने को मिल सकती हैं।

वित्तमंत्री पी. चिदंबरम कह ही चुके हैं कि आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के साथ महँगाई को नियंत्रण में रखने के पूरे प्रयास किए जाएँगे, जिसकी वजह से ही पिछले सप्‍ताह मुद्रास्‍फीति के जोरदार ढंग से बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में नया जोश दिखा।

अब बड़े और छोटे निवेशक शेयर बाजार में आए जोश को देखते हुए लौटने का मूड बना रहे हैं। वित्तवर्ष 2008-09 के पहले सप्‍ताह से घरेलू म्यूच्युअल फंड और विदेशी संस्‍थागत निवेशक शेयरों की खरीद की तैयारी कर चुके हैं।

नए वित्तवर्ष में कैपिटल गुड्स ऑटोमोबाइल, फार्मा और आईटी क्षेत्र की कंपनियों में बड़ा निवेश दिखाई दे सकता है। नए सप्‍ताह में फार्मा के साथ आईटी शेयरों में वेल्‍यू बाइंग देखने को मिलेगी। चौथी तिमाही के नतीजों से पहले यह खरीद होगी। बाजार विश्‍लेषकों पर भरोसा करें तो चौथी तिमाही के नतीजे बेहतर रहेंगे। इसके बाद मानसून फैक्‍टर बाजार को चलाने के लिए भूमिका अदा करेगा।

असल में मौजूदा समय शेयरों में ट्रेडिंग का सही समय बन रहा है। हर गिरावट पर खरीद एवं हर बढ़त पर बाहर होना मौजूदा स्थिति में कमाई का उचित समय है। केवल आपको उस कंपनी का चयन करना है, जहाँ कमाई का मौका मौजूदा है।

फर्स्‍ट कॉल इंडिया इक्विटी एडवाइजर्स के कंट्री हैड डॉ. वीवीएलएन शास्‍त्री का कहना है कि अनेक कंपनियों की वेल्‍यूएशन खूब आकर्षक है और इसका लाभ म्‍युच्युअल फंड और एफआईआई ले रहे हैं।

अमेरिका में ब्‍याज दर का स्‍तर वर्ष 2003 के स्‍तर पर पहुँच गया है। उभरते बाजारों में तेजी का दौर वर्ष 2003 से शुरू हुआ था। इस तरह मौजूदा भावों पर खरीद का अच्‍छा मौका सामने आया है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स 31 मार्च से शुरू हो रहे सप्‍ताह में 16863 अंक से ऊपर बंद होने पर 17188 अंक तक जा सकता है। बीएसई सेंसेक्‍स को 15883 अंक पर स्‍पोर्ट मिलेगा। निफ्टी 5083 अंक से ऊपर बंद होने पर 5188 अंक तक जाने की उम्‍मीद है। निफ्टी को स्‍पोर्ट 4782 अंक पर मिलेगा।

तकनीकी विश्‍लेषक हितेंद्र वासुदेव का कहना है कि सेंसेक्‍स के लिए अगला ट्रिगर 16683 है। सेंसेक्‍स इस स्‍तर को पार करता है और 16923 अंक से ऊपर बंद होता है तो तेजी एकदम बढ़ेगी एवं सेंसेक्‍स के अगले स्‍तर 17177, 17947 और 18717 अंक होंगे। यानी शेयर सेंसेक्‍स में खासा सुधार और रौनक लौटने के दिन।

इस सप्‍ताह निवेशक कोटक महिंद्रा बैंक, लार्सन एंड टूब्रो, भेल, ओएनजीसी, गोदरेज इंडस्‍ट्रीज, लैनेक्‍स एबीएस, केएस ऑयल, एसकेएफ इंडिया, ग्‍लैक्‍सो स्मिथ फार्मा, लॉयड इलेक्ट्रिक, मारुति सुजुकी, एबीजी शिपयार्ड, सन फार्मा और क्‍युमिंस इंडिया पर ध्‍यान दे सकते हैं।

• य‍ह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।
बेहतर रिटर्न मिलेगा अस्‍त्र-शस्‍त्र कंपनियों में









-कमल शर्मा
भारत सरकार ने अब हथियारों की बढ़ती माँग को देखते हुए इस क्षेत्र को भी निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने की जो घोषणा की है, वह बेहतर निवेश और रिटर्न चाहने वालों के लिए अच्‍छा मौका है। असल में सफल निवेशक वह है जो आने वाले समय के उन उद्योगों में निवेश करता रहे जहाँ रिटर्न अधिक मिलने की उम्‍मीद हो।

शेयर बाजार में एक खास बात यह देखने को मिलती है की हर नई तेजी के समय पिछली तेजी की कुछ कंपनियाँ छूट जाती हैं और कुछ ऐसी कंपनियाँ अगली तेजी में चमक जाती हैं जिनके बारे में हर निवेशक अनुमान नहीं लगा पाता। यही हालत उद्योगों की होती है। मसलन कुछ अरसे पहले पावर सेक्‍टर की ओर किसी का ध्‍यान नहीं था, लेकिन अब हर निवेशक पावर सेक्‍टर से जुड़ी कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में रखना चाहता है।

शेयर बाजार में अगली तेजी की अब जो लहर चलेगी, उसमें दो उद्योग उभरकर आएँगे। ये हैं शीपयार्ड और हथियार उद्योग। भारत में अब तक हथियार उद्योग पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहा है, लेकिन अब इसमें बढ़ती निवेश जरूरत की वजह से निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरू हो रही है। समूची दुनिया में हथियार की बढ़ रही दौड़ से हथियार बनाने वाली कंपनियों में किया गया निवेश आने वाले दिनों में बेहद फायदेमंद होगा।

अर्नस्‍ट एंड यंग ने दुनियाभर में हो रहे सैन्‍य खर्च पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2040 तक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा बाजार होगा, जबकि चीन एशिया में सेना पर खर्च करने वाला प्रमुख देश होगा जबकि इसराइल जो कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा भागीदार है, के रूस से आगे निकल जाने की संभावना है। वर्ष 2010 तक भारत और रूस के बीच प्रतिरक्षा कारोबार दस अरब अमेरिकी डॉलर का रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया में मिलेट्री हार्डवेयर का आयात करने वाला सबसे बड़ा देश होगा। रिपोर्ट में उम्‍मीद जताई गई है कि भारत रक्षा उत्‍पादन और घरेलू उत्‍पादन क्षमताओं को विकसित करने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

अर्नस्‍ट एंड यंग के साझीदार कुलजीत सिंह का कहना है कि हथियार के मामले में भारत में चीन के बाद बड़ी कारोबारी संभावनाएँ हैं। भारत का रक्षा खर्च वर्ष 2004-05 से वर्ष 2007-08 के बीच प्रतिरक्षा खर्च की सालाना औसत वृद्धि दर आठ फीसदी रही। भारत का वर्ष 2007-08 में प्रतिरक्षा बजट 960 अरब रुपए का था, जिसमें 44 फीसदी हिस्‍सा नए हथियार, प्रणालियाँ और इक्विपमेंट खरीदने के लिए रखा गया।

भारत ने वर्ष 2005-06 में छह अरब डॉलर से अधिक के मिलेट्री हार्डवेयर आयात किए। भारत के बाद दूसरे विकासशील देशों में सबसे ज्‍यादा हथियार खरीदने वालों में सउदी अरब और चीन रहे। इन दोनों देशों ने दो से तीन अरब डॉलर के सौदे किए। रूस भारत को हर साल डेढ़ अरब डॉलर के हथियार बेचता है और इसराइल एक अरब डॉलर के हथियार बेचता है। यानी इसराइल रूस से ज्‍यादा पीछे नहीं है।

भारत रक्षा के क्षेत्र में अपनी 70 फीसदी जरूरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है और केवल 30 फीसदी जरूरत निजी क्षेत्र के माध्‍यम से पूरी करता है। सरकार का इरादा वर्ष 2010 तक अपनी 70 फीसदी प्रतिरक्षा जरूरतों को घरेल स्रोतों से पूरा करने का है। देश में हथियारों के मामले में निजी क्षेत्र की भागीदारी को तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

देश में इस समय निजी क्षेत्र के लिए रक्षा बाजार 70 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है। भारत में रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की बढ़ाई जा रही भागीदारी के बाद इस बाजार में बढ़ोतरी हो रही है। भारत मिलेट्री हार्डवेयर के निर्यात पर भी ध्‍यान दे रहा है। इनमें रशियन-भारतीय क्रूज मिसाइल्‍स सहित राइफल्‍स, रॉकेट और राडार का निर्यात शामिल है। यह निर्यात पड़ोसी देशों के साथ तीसरी दुनिया के देशों को किया जाएगा। हालाँकि भारत हथियारों का निर्यात अपनी पसंद के देशों को ही करना चाहता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2006 में दुनियाभर का सैन्‍य खर्च 1204 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पूर्व वर्ष की तुलना में 3.5 फीसदी अधिक था। इस खर्च में अमेरिका की हिस्‍सेदारी सर्वाधिक थी, जिसने आतंक के खिलाफ युद्ध के नाम पर बड़ी राशि खर्च की।

अमेरिका का यह खर्च इराक और अफगानिस्‍तान के पीछे हुआ है। हमारे देश में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा सहित अनेक औद्योगिक घराने रक्षा क्षेत्र में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। अत: इन कंपनियों में निवेश करना लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए फायदेमंद होगा।

*यह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।

शेयर बाजार में बड़ा चमत्‍कार संभव नहीं



कमल शर्मा





अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्‍याज दर में 0.75 फीसदी की कटौती से दुनिया भर के शेयर बाजारों में थोड़ी राहत महसूस की गई है, लेकिन यह कदम शेयर बाजारों के लिए बड़ा चमत्‍कारी साबित नहीं होगा। भारतीय शेयर बाजार में असली समस्‍या लिक्विडिटी नहीं है बल्कि सेंटीमेंट की है। जब तक निवेशकों के सेंटीमेंट में परिवर्तन नहीं होगा, शेयरों में बड़े सुधार की उम्‍मीद नहीं की जानी चाहिए। हालाँकि इस सेंटीमेंट से उबरने में अभी भी चार से पाँच महीने लग सकते हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्‍याज दर कटौती पर शेयर बाजार में झूमने का यह समय नहीं है बल्कि निवेशकों को आने वाले दिनों में और बुरे समाचार सुनने पड़ सकते हैं। वॉल स्‍ट्रीट में पाँचवें नंबर के मुख्‍य निवेश घराने बेयर स्‍टीयर्न्‍स का जिस तरह पतन हुआ है उससे सभी अचंभित है। जेपी मार्गन ने इस घराने को केवल 24 करोड़ डॉलर यानी एक हजार करोड़ रुपए से कम पर खरीद लिया है।

इस सौदे के खिलाफ बेयर स्‍टीयर्न्‍स के शेयरधारी अदालत में गए हैं, जिनका कहना है‍ कि उन्‍हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया है। अब सिंगापुर स्थित डीबीएस ने अपने ट्रेडर्स को लेहमैन ब्रदर्स के साथ कारोबार नहीं करने को कहा है। जब येन, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नित नई ऊँचाई छू रहा है, जापान अपने सेंट्रल बैंक के प्रमुख के बारे में फैसला नहीं ले पा रहा है। यदि जापानी अर्थव्‍यवस्‍था में गिरावट के समाचार आते हैं तो यह सबसे बुरा समय होगा।

भारत में व्‍यापार घाटा दस अरब डॉलर महीना चल रहा है जो देश से वित्‍त प्रवाह को बाहर धकेल रहा है। इस वजह से रुपए में आकर्षण कम हो रहा है। दलाल स्‍ट्रीट में एक बड़े ऑपरेटर द्धारा चलाई जा रही पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्‍कीम बड़े रिडम्‍पशन का सामना कर रही है। साथ ही चार बैंक जिनमें से दो विदेशी हैं, उन निवेशकों से मार्जिन के रूप में लिक्विड स्‍टॉक की माँघ कर रही हैं, जो बाजार से पैसा उधार लेकर खेलते हैं। पूँजी बाजार नियामक जो भी कदम उठा रहे हैं उन्‍हें हताशा का कदम माना जा रहा है।

ब्रिक्‍स सिक्‍युरिटीज के इक्विटी प्रमुख आनंद टंडन का कहना है कि शेयर बाजार में अभी और गिरावट संभव है। मौजूदा अर्निंग के आधार पर बाजार का मूल्‍यांकन सही है, लेकिन अर्निंग के संबंध में कुछ भी ठोस आँकड़े नहीं है, जिससे कमोडिटी और डेरीवेटिव्‍स में नुकसान है।

विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की बारे में देखें तो उनकी बिकवाली अधिक आक्रामक नहीं है। जनवरी से अब तक इन निवेशकों ने चार अरब डॉलर की बिकवाली की है, जो वर्ष 2007 में इनकी निवेश राशि का केवल 20 फीसदी है। एफआईआई के पास इस समय 150 अरब डॉलर का पोर्टफोलियो है, जिसमें से केवल तीन फीसदी को ही इन्‍होंने दूसरी जगह ट्रांसफर किया है। असली समस्‍या केवल सेंटीमेंट की है, जिसे सुधरने में समय लगेगा।

सेंटीमेंट बदलने की वजह से शेयर ब्रोकर इस समय अपने निवेशकों को बाजार से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। सेंसेक्‍स अपनी ऊँचाई से 30 फीसदी टूटा है, जिससे केवल 47 कारोबारी दिवसों में आम निवेशक का दो वर्ष का निवेश पूरी तरह धुल गया है। हालाँकि म्‍युच्‍यूअल फंड के निवेशकों की ओर से रिडम्‍पशन दबाव नहीं देखा जा रहा है, जो अच्‍छी खबर है।
म्‍युच्‍यूअल फंड के प्रबंधक एनएवी स्थिर रखने की व्‍यूहनीति में लगे हुए हैं। क्रिस सिक्‍युरिटीज के निदेशक अरुण केजरीवाल का कहना है कि मौजूदा समय शेयरों में निवेश का सुरक्षित समय है। वे कहते हैं कि इस समय माहौल घबराहट का है, जिसकी वजह से निवेशक कतरा रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्‍युरिटीज के एक विशेषज्ञ का कहना है कि शेयर बाजार में गिरावट की वजह से निवेशक कमोडिटी बाजार की ओर मुड़ रहे हैं, जबकि मौजूदा स्‍तर पर इक्विटी में वेल्‍यू दिखती है, लेकिन सेंटीमेंट ने सब कुछ चौपट कर दिया है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स को 24 मार्च से शुरू हो रहे सप्‍ताह में 14544 अंक पर स्‍पोर्ट मिलने की उम्‍मीद है। यदि यह 15445 अंक से ऊपर बंद होता है, तो इसके 15763 अंक तक जाने की आस है। निफ्टी 4711 अंक से ऊपर बंद होने पर 4823 अंक पहुँचने की उम्‍मीद है। इसे 4423 अंक पर स्‍पोर्ट‍ मिलने की उम्‍मीद की जा सकती है।

कांग्रेस भारत अमेरिका परमाणु करार पर अमल करने के पूरे मूड में दिखाई दे रही है और इस संबंध में वामपंथियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने जिस तरह वामपंथियों को कोसा है उससे लगता है कि कांग्रेस और वामपंथियों के बीच संबंधों में दरार बढ़ सकती है, जिससे बाजार पर नकारात्‍मक असर दिख सकता है। साथ ही वित्त वर्ष का अंत होने से निवेशक और बड़े ऑपरेटर घाटा बुक करते दिखाई देंगे।

इस सप्‍ताह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और मारुति सुजूकी फ्रंटरनर की भूमिका में दिखाई देंगे। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीरेणुका शुगर, बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, केसीपी शुगर, बजाज हिंदुस्‍तान, अशोक लीलेंड, गॉडफ्रे फिलिप, बारटोनिक्‍स, कोटक गोल्‍ड ईटीएफ, ज्‍योडिक क्‍लोदिंग, एआईए इंजीनियरिंग और अभिषेक मिल्‍स पर ध्‍यान दे सकते हैं।

* य‍ह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।

शेयरों में बदलनी होगी निवेश रणनीति



कमल शर्मा





अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था के बढ़ते बंटाढार से भारतीय शेयर बाजार में सुधार के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने कर्ज नीति में सुधार के साथ दो सौ अरब डॉलर का पैकेज जरूर घोषित किया है, लेकिन इस बीच कार्लाइल फंड का डिफाल्‍टर होना और बेयर स्‍टनर्स को कठिन परिस्थिति में से उबारने के लिए फैडरल रिजर्व, जेपी मार्गन की सहायता यह बताती है कि सबप्राइम का संकट लंबा चलेगा। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के फंडामेंटल मजबूत होने के बावजूद शेयर बाजार में तेजी अभी दूर रहेगी। निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि वे अपनी निवेश रणनीति बदले और शॉर्ट सेलिंग का सहारा ले।

घरेलू औद्योगिक उत्‍पादन के आँकड़े जनवरी महीने के लिए कमजोर आने के बावजूद वित्तमंत्री को जीडीपी साढ़े आठ फीसदी से अधिक रहने की उम्‍मीद है। वित्तमंत्री के इस भरोसे के बावजूद निवेशकों का विश्‍वास नहीं लौटता दिख रहा है। आम निवेशक अब यह मानने लग गया है कि शेयर बाजार के अच्‍छे दिन लौटने में कम से कम छह से आठ महीने का समय लगेगा।

शेयर बाजार के लिए यह वर्ष जितना बुरा वर्ष साबित हो रहा है उसकी उम्‍मीद शायद ही किसी ने की होगी। इस वर्ष अब तक दुनिया भर के निवेशकों के 3.3 खरब डॉलर साफ हो चुके हैं। एशिया में पिछले साल बेहतर प्रदर्शन करने वाले चीन और भारतीय बाजार इस साल अपनी 20 फीसदी कीमत खो चुके हैं। इस साल के पहले 75 दिनों में विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से 3.2 अरब डॉलर वापस खींच चुके हैं।

पिछले पाँच दिनों में देसी और विदेशी निवेशकों ने दस करोड़ डॉलर की शुद्ध बिकवाली की है। भारतीय म्‍युच्‍युअल फंडों पर अब रिडम्‍पशन के दबाव की आहट सुनाई दे रही है जिसकी वजह से अब वे नई खरीद आक्रामक ढंग से नहीं कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका के बीच परमाणु संधि पर 17 मार्च को यूपीए की बैठक है, जिसमें कांग्रेस व वामपंथियों के बीच खटराग बढ़ा तो शेयर बाजार को संभालना कठिन हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक से कमजोर पड़ी कंज्‍यूमर माँग को बढ़ाने के लिए ब्‍याज दर में कटौती की उम्‍मीद की जा रही है। अमेरिकी फैड रिजर्व की बैठक 18 मार्च को होगी, जिसमें ब्‍याज दर में आधा से पौना फीसदी कटौती की उम्‍मीद की जा रही है, लेकिन ब्‍याज दर में कटौती रामबाण इलाज नहीं है।

भारतीय शेयर बाजार के लिए 17 मार्च से शुरू हो रहा सप्‍ताह केवल तीन दिन का है। गुरुवार 20 मार्च को ईद और 21 मार्च को होली की छुट्टी है। इस तरह यह सप्‍ताह केवल तीन दिन का है। इस सप्‍ताह रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और ओएनजीसी फ्रंटरनर की भूमिका में दिखाई देंगे। इसके अलावा मारुति सुजूकी, कोलगेट पामोलिव इंडिया, कार्बोरेंडम यूनिवर्सल, कालिंदी रेल निर्माण, लयका लैब्‍स, पीएसएल, मैक्‍स इंडिया, पावर ग्रिड कार्पोरेशन, ओनमोबाइल ग्‍लोबल, तुलसी एक्‍सट्रुशन, रुचि सोया पर ध्‍यान दे सकते हैं।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज यानी बीएसई सेंसेक्‍स के इस सप्‍ताह 15222 अंक से नीचे आकर बंद होता है तो यह 14866 अंक तक जा सकता है। सेंसेक्‍स के ऊपर में उठने पर 16367 अंक की संभावना है। निफ्टी यदि 4585 अंक से नीचे बंद होता है तो यह 4511 अंक तक जा सकता है। ऊपर में इसकी संभावना 4934 अंक की है।

• य‍ह लेखक की निजी राय है। किसी भी प्रकार की जोखिम की जवाबदारी वेबदुनिया की नहीं होगी।

कार्पोरेट गतिविधियाँ


रविवार, 13 अप्रैल 2008( 18:31 IST )






* आर्चिड केमिकल्स एंड फार्मास्युटिक लि. ने जापान में पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी के गठन की घोषणा की है। आर्चिड फार्मा जापान केके का मुख्य कार्यालय टोक्यो में स्थापित किया गया है। इस कंपनी के माध्यम से जापान के तेजी से विकास करते एवं बेहतर संभावनाओं वाले जेनरिक मार्केट में कंपनी अपनी उपस्थिति दर्ज करेगी।

* प्रोवोग इंडिया लि. ने 314 करोड़ रु. जुटाने के उद्देश्य से 1100 रु. प्रति शेयर के भाव पर 28.50 लाख शेयर्स वरीयता आधार पर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये शेयर्स अल्टीमा पार्टनर्स, टी रो प्राइज, जेनेसिस, न्यू वर्नोन, एकासिया पार्टनर्स, लिबर्टी इंटरनेशनल, धर्मयुग इंवेस्टमेंट तथा सीएनबीसी को जारी किए जाएँगे। इसके साथ ही बोर्ड ने 14.84 लाख कंवर्टिबल वारंट जारी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। ये वारंट 1100 रु. प्रति शेयर के भाव से इक्विटी शेयर में परिवर्तित हो सकेंगे।

* माइक्रो टेक्नालॉजिस लि. ने माइक्रो एलएनटीएस (लोस्ट नोटबुक ट्रेडिंग सिस्टम) नाम के नए सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को बाजार में पेश किया है। इसके माध्यम से चोरी गए लेपटॉप को खोजना संभव है। यह सिस्टम नोटबुक की हार्र्ड ड्राइव में लगा दिया जाता है तथा चोरी हुए लेपटॉप के इंटरनेट से कनेक्ट होते ही इसका पता लग जाता है।

* विशाल रिटेल लि. ने शिलोंग तथा कर्नाटका के हुबली जिले में दो नए स्टोर्स की शुरुआत की है। इसके साथ ही कंपनी द्वारा अब तक खोले गए स्टोरों की संख्या 102 पर पहुँच गई है।
बीएसई-एनएसई समाचार


रविवार, 13 अप्रैल 2008( 18:23 IST )






* स्पेशियालिटी पेपर्स लि. के शेयर 15 अप्रैल को एक्स-बोनस होंगे। कंपनी ने 1 पर 1 के अनुपात में बोनस घोषित किया है। रिकॉर्ड-डेट 16 अप्रैल है।

* कंटेनर कार्पोरेशन लि. के शेयर 15 अप्रैल को एक्स बोनस होंगे। कंपनी ने 1 पर 1 के अनुपात में बोनस घोषित किया है। रिकार्ड-डेट 17 अप्रैल है।

\* अनिल केमिकल्स एंड इंडस्ट्रीज लि. में 16 अप्रैल से ट्रेडिंग सस्पेंड होगी। कंपनी अपने केमिकल्स एंड एक्सप्लोसिव्स डिवीजन को अनिल एक्सप्लोसिव्स लि. के पक्ष में डी-मर्ज करेगी। इसके साथ ही इक्विटी केपिटल रिडक्शन प्रक्रिया भी होगी। कंपनी ने रिकार्ड-डेट 30 अप्रैल तय की है।

* एस. कुमार्स नेशनवाइड लि. अपने रिटेल डिवीजन को ब्रांड हाउस रिटेल लि. के पक्ष में डी-मर्ज करेगी। इसके बदले में एस. कुमार्स के शेयर होल्डर्स को प्रत्येक 5 शेयर के बदले 1 शेयर ब्रांड हाउस का मिलेगा। एक्स-डेट 24 अप्रैल है। फ्यूचर ऑप्शन सेगमेंट में एस. कुमार्स के अप्रैल, मई एवं जून कांट्रेक्ट 23 अप्रैल को समाप्त हो जाएँगे तथा 24 अप्रैल से नए कांट्रेक्स शुरू हो जाएँगे।

* सुंदरम क्लेटान लि. में 24 अप्रैल से ट्रेडिंग सस्पेंड होगी। कंपनी अपने ब्रेक्स डिवीजन को वाब्को-टीवीएस इंडिया लि. के पक्ष में डी-मर्ज करेगी। इसके बदले में सुंदरम के शेयर होल्डर्स को 1 पर 1 के अनुपात में वाब्को का 5 रु. फेस वेल्यू वाला शेयर मिलेगा। डी-मर्जर प्रक्रिया के बाद सुंदरम अपनी इक्वटी केपिटल को घटाने के लिए 10 रु. फेस वेल्यू के बदले 5 रु. फेस वेल्यू का शेयर 1 पर 1 के अनुपात में देगी। आज की तारीख में 100 शेयर्स रखने वाले निवेशक के पास पुनर्गठन पश्चात 5 रु. फेस वेल्यू वाले 100 शेयर्स वाब्को टीवीएस के एवं 5 रु. फेस वेल्यू वाले 100 शेयर्स सुंदरम क्लेटान लि. के होंगे।

* यूएस-64 बांड्स की मियाद 31 मई 2008 को पूरी हो रही है। बांड होल्डर्स के रिकार्ड को अपडेट करने के लिए बुक क्लोजर 1 मई से 31 मई 2008 तक है। 200 से ज्यादा बांड रखने वाले निवेशक अपने बांड सर्टिफिकेट को डिस्चार्ज करके अपने बैंक खाते की जानकारियाँ देते हुए यूटीआई फाइनेंशियल सेंटर्स या यूटीआई टीएसएम के ऑफिस में 25 मई 2008 के पहले जमा करा सकते हैं। 200 से कम बांड रखने वाले निवेशकों को बांड सरेंडर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 2 जून 2008 को धनराशि दे दी जाएगी। हालाँकि बैंक खाते की जानकारी यूटीआई के रिकार्ड में होना जरूरी है। यदि निवेशक ने जानकारी नहीं दी है तो 15 मई 2008 तक देना चाहिए।

36 लाख में बिकी ब्रूनी की नग्न तस्वीर


शुक्रवार, 11 अप्रैल 2008( 23:09 IST )






फ्रांस की प्रथम महिला और पूर्व मॉडल कार्ला ब्रूनी की नग्न तस्वीर की नीलामी में उम्मीद से बीस गुना ज्यादा दाम मिले हैं। गुरुवार को इसकी नीलामी 91 हजार डॉलर यानी करीब 36 लाख रुपयों में हुई।



BBC

नीलामकर्ता संस्था 'क्रिस्टीज' का कहना था कि इस तस्वीर की कीमत तीन से चार हजार डॉलर के आसपास आँकी गई थी। साल 1993 में ली गई इस तस्वीर को मिशेल कोमट नाम की फोटोग्राफर ने उस वक्त खींचा था, जब मॉडलिंग की दुनिया में कार्ला ब्रूनी एक बड़ा नाम था।

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में 'क्रिस्टीज' की इस नीलामी में कौन विजेता रहा, इसका विवरण अभी नहीं दिया गया है।

ऊँची कीमत : 'क्रिस्टीज' के प्रवक्ता रिप पाईक का कहना था कि ऊँची कीमत की मुख्य वजह मीडिया और अंतरराष्ट्रीय जगत की इस तस्वीर में बहुत ज्यादा रुचि को माना जा सकता है।

'क्रिस्टीज' का कहना था कि इस नीलामी से प्राप्त हुई रकम को परोपकारी कामों से जुड़ी हुई स्विस संस्था सोडीज को दिया जाएगा। सोडीज विकासशील देशों में साफ पानी मुहैया कराने का काम करती है।

कार्ला ब्रूनी की नीलाम होने वाली नग्न तस्वीर संग्रहकर्ता जर्ट एल्फरिंग के संग्रह का हिस्सा थी।

जर्ट एल्फरिंग के संग्रह में मॉडल लॉरेन हटन, जिसेल बंडचेन और केट मॉस की नग्न तस्वीरों के साथ-साथ अमेरिकी फोटोग्राफर रिचर्ड ऐवडॉन की खींची हुई अभिनेत्री ब्रिजेट बार्डोट की एक तस्वीर भी थी।

ब्रिजेट बॉडॉट की तस्वीर की नीलामी से एक लाख 81 हजार डॉलर यानी करीब 73 लाख रुपए मिले। हालाँकि इस नीलामी में सबसे ज्यादा चर्चा कार्ला ब्रूनी की तस्वीर की ही रही।

कार्ला ब्रूनी का विवाह करीब चार महीने पहले फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के साथ हुआ है। सरकोजी की 11 साल पत्नी रहीं सेसीला सिगेनर-अलबेनिज से तलाक के बाद यह विवाह हुआ।

विकिरण के बुरे असर से बचाने वाली दवा


शुक्रवार, 11 अप्रैल 2008( 16:04 IST )






रेडियोथेरेपी के दौरान विकिरण के बुरे असर से बचाने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक दवा बनाई है। इस दवा का इस्तेमाल कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथेरेपी की प्रक्रिया को सुरक्षित बना सकता है।



BBC BBC

उम्मीद की जा रह है कि इस दवा का इस्तेमाल खतरनाक विकिरण पैदा करने वाले बमों या परमाणु आपदा के समय भी किया जा सकेगा। इस दवा का नाम सीबीएलबी 502 रखा गया है और जानवरों पर इसका परीक्षण किया जा चुका है।

यह दवा आदमी के अंदर एक ऐसा जैव-वैज्ञानिक तंत्र तैयार कर देता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं (सेल) को विकिरण के धमाकों से बचाता है।

कोशिका मानव शरीर की सबसे छोटी इकाई है। कई कोशिकाएँ मिलकर उत्तक (टिसू) बनाती हैं और उत्तकों का समूह अलग-अलग अंग बनाता है।

निशाने पर ट्यूमर : विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित वैज्ञानिकों के शोध नतीजे छपे हैं और जल्दी ही इसका मानव परीक्षण होने वाला है। विकिरण से कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है और वे मृत हो जाती हैं।

कैंसर के मरीजों में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दूसरी घातक कोशिकाएँ भी निगलती हैं। एक खतरा ये भी होता है कि ट्यूमर कोशिकाओं के आसपास की स्वस्थ कोशिकाएँ भी रेडियोथेरेपी के दौरान मारी जा सकती हैं, इसीलिए इलाज के दौरान जहाँ तक संभव होता है रेडियोलॉजिस्ट सीधे ट्यूमर को ही निशाने पर लेने की कोशिश करते हैं।

शोधकर्ताओं ने दवा बनाने से पहले इस बात का गहराई से अध्ययन किया कि किस तरह कुछ कैंसर कोशिकाएँ रेडियोथेरेपी के बावजूद बची रह जाती है।

जानवरों में इसके प्रयोग से पता चला कि यह अस्थि मज्जा और आहार नली की स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के दुष्प्रभाव से बचाता है, लेकिन ट्यूमर कोशिकाओं को इस दवा से कोई फायदा नहीं होता और ये कोशिकाओँ रेडियोथेरेपी में निशाना बना ली जाती हैं।

दूसरा पहलू : कोशिकाओं को मरने से बचाने का एक खतरा यह है कि ख़राब कोशिकाएँ भी ज्यादा रह सकती हैं और आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। हालाँकि शोधकर्ताओं को चूहे पर इस दवा के परीक्षण के दौरान इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला।

साथ ही शोधकर्ताओं को साफ तौर पर इस दवा का कोई दूसरे तरह का असर (साइड इफेक्ट) भी नजर नहीं आया। स्वस्थ कोशिकाओं को विकिरण के प्रभाव से बचा लेने के कारण इस दवा का इस्तेमाल करके कैंसर के रोगी ज्यादा मात्रा और लंबे समय तक रेडियोथेरेपी का भी लाभ उठा सकेंगे।

यह दवा परमाणु आपदा या नाभिकीय बमों के विकिरण से भी लोगों को बचाने में मददगार हो सकता है। क्लीवलैंड के लेर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. एंड्रेई गुडकोव कहते हैं हमने दिखाया है कि विकिरण से पहले और विकिरण के बाद इस्तेमाल करने पर यह दवा प्रभावशाली है।

संक्षेप में कहें तो सीबीएलबी 502 ट्यूमर कोशिका को बिना सुरक्षा दिए विकिरण के बुरे असर को कम करती है और विकिरण के कारण पैदा होने वाले कैंसर के कारकों को कोई बढ़ावा नहीं देती है।














और भी

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Thursday, April 10, 2008

उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण को मंज़ूरी

उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण को मंज़ूरी
http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/04/080410_obc_sc.shtml

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इस मामले को संविधान पीठ के हवाले कर दिया था
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण को वैध ठहराया है, लेकिन संपन्न लोगों को यानी 'क्रीमी लेयर' इस दायरे से बाहर होंगे.
कई छात्र संगठनों और समूहों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को आरक्षण देने के सरकार के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट की पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने गुरुवार को दिए अहम फ़ैसले में कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) और एम्स जैसे केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फ़ैसले से संविधान का उल्लंघन नहीं होता है.

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी के वैसे छात्र-छात्राओं को आरक्षण की सुविधा नहीं देने को कहा है जो आर्थिक रुप से संपन्न हैं और 'क्रीमी लेयर' के दायरे में आते हैं.

क्रीमी लेयर

हालाँकि क्रीमी लेयर अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रा-छात्राओं के लिए लागू नहीं होगी.


ये फ़ैसला मील का पत्थर है. ये कांग्रेस और यूपीए सरकार की पहल थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत तौर पर सही ठहराया है


अभिषेक मनु सिंघवी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्रीमी लेयर की परिभाषा वर्ष 1993 में निर्धारित मानकों के आधार पर ही तय होगी.

अदालत ने सरकार से कहा है कि हर पाँच वर्ष के बाद ओबीसी सूची की समीक्षा की जाए.

ओबीसी के दायरे में सैंकड़ों जातियाँ आती हैं और समय के साथ-साथ इसकी संख्या बढ़ी है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के बजाए इनको सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग कहा जाना चाहिए.

कांग्रेस के प्रवक्ता और इस मामले में सरकारी वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, "ये फ़ैसला मील का पत्थर है. ये कांग्रेस और यूपीए सरकार की पहल थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत तौर पर सही ठहराया है."


उपनाम में पिता
मेघालय में पिता के उपनाम वाले जनजातीय नागरिकों को आरक्षण देने से मनाही.




नीचे वाले वंचित
'कार्पोरेट जगत सामाजिक जवाबदेही के प्रधानमंत्री के सुझावों का विरोध करेगा.'




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'ओबीसी को आरक्षण ऐतिहासिक क़दम’


मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताया है
भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी यानी अन्य पिछड़े वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है, और इसे ऐतिहासिक क़दम बताया है.
उन्होंने कहा कि इस कदम से ओबीसी श्रेणी में आने वाले सैकड़ों छात्रों को फ़ायदा होगा.


ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी

अर्जुन सिंह ने कहा कि वो अगले सत्र से इस फ़ैसले को क्रियान्वयन करने के लिए कोशिश करेंगे.

ज़्यादातर राजनीतिक दलो ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने सम्पन्न तबकों यानी क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं.

'ऐतिहासिक'

अर्जुन सिंह ने पत्रकारों से कहा कि बिना प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन के इतना आगे नहीं पहुंच पाए होते.

उन्होंने कहा, "हम उच्चतम न्यायालय के आदेश को पूरा पढ़ेंगे क्योंकि अलग अलग न्यायाधीशों ने टिप्पणियां की हैं, जिनको संज्ञान में लेना होगा. इस लिए हम आदेश की कॉपी का इंतज़ार कर रहे हैं."

उनका कहना था कि जहाँ तक उच्च शिक्षा संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो कुछ संस्थानों में ये सुविधा है, कहीं ये नहीं है.

जब अर्जुन सिंह से पूछा गया कि व्यक्तिगत रूप से उनके लिए ये पूरा सफ़र कितना संघर्षमय रहा है, तो उन्होंने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत कुछ नहीं होता, हाँ राजनीतिक संघर्ष ज़रूर रहा है.

उन्होंने कहा, "जहाँ तक आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाने की बात है, हम इस पर विचार कर रहे हैं और क्योंकि हमारी गठबंधन सरकार है, वे अपने सहयोगियों से विचार विमर्श करेंगे."

उल्लेखनीय अर्जुन सिंह उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी छात्रों को आरक्षण दिए जाने की वकालत करते रहे हैं और आरक्षण देने की घोषणा उनके ही कार्यकाल में हुई है.

प्रतिक्रिया

उधर वामपंथी दलों ने भी उच्चतम न्यायालय के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने आरक्षण कोटे से संपन्न लोगों को शामिल नहीं किये जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि वे चाहेंगे कि सरकार आगामी सत्र से ये फ़ैसला लागू करे.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने जाति को आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन का आधार मान लिया है.

पार्टी महासचिव डी राजा ने कहा है कि नौकरियों के मामले में संपन्न लोगों को आरक्षण देने की बात मान्य हो सकती है. शिक्षा में ऐसा नहीं हो सकता.

डी राजा ने कहा कि सरकार को अब ग़ैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के मुद्दे पर ज़ोर देना चाहिए.

फ़ॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस की सहयोगी पार्टी भारतीय मुस्लिम लीग ने भी इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

लेकिन यूपीए में शामिल लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि क्रीमी लेयर के लोगों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए.

उधर एनडीए के घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने भी सम्पन्न तबकों के लोगों को आरक्षण से बाहर रखने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा, "यह कोई आर्थिक विकास का कार्यक्रम नहीं है. यह एक नीतिगत फ़ैसला है और इसके लिए संसद ने एकमत से फ़ैसला किया था और इसका उद्देश्य सामाजिक समता था."

मुद्दा

सरकार ने वर्ष 2007 में यह उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया था.

साथ ही आश्वासन दिया था कि पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटें बढ़ाने के बावजूद सामान्य श्रेणी की सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं आएगी.

लेकिन इसके ख़िलाफ़ आंदोलन शुरु हो गए थे.

केंद्र सरकार के आरक्षण लागू करने के फ़ैसले का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में बहुत सी याचिकाएँ दायर की गई थीं.

इनमें यूथ फॉर इक्वालिटी रेज़िडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इक्विटी फ़ोरम, अशोक कुमार, शिव खेड़ा और पीवी इंद्रसेन शामिल थे.

केंद्र सरकार का कहना है कि क़ानून बनने के बाद कई केंद्रीय संस्थानों ने ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. लेकिन कानून पर स्थगन के बाद यह प्रक्रिया रुक गई थी.

उच्चतम न्यायालय ने सरकार के आरक्षण देने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी, और बाद में केंद्र सरकार के अनुरोध पर इस मामले को संविधान पीठ को सौंप दिया गया था.

न्यायालय ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि सरकार आरक्षण की नीति पर काम तो कर रही है पर उसके पास ओबीसी को आरक्षण देने के लिए कोई नया और मज़बूत आँकड़ा नहीं है.

बात ये भी उठी कि संपन्न तबकों यानी 'क्रीमी लेयर' को लेकर जो बहस शुरू हुई है उसे भी अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता है.

आरक्षण की व्यवस्था से असहमति व्यक्त करने वाले लगातार कहते रहे हैं कि 'क्रीमी लेयर' को आरक्षण की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए.

ओबीसी आरक्षण: फैसले से अर्जुन-लालू खुश
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10 अप्रैल 2008
वार्ता

नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय द्वारा सही ठहराए जाने का स्वागत किया है।

आज सुबह जब उच्चतम न्यायालय का अहम फैसला आया तो अर्जुन सिंह ने न केवल प्रसन्नता व्यक्त की बल्कि राहत की भी सांस ली।

गौरतलब है कि केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का जब केन्द्र सरकार ने फैसला किया था, तब उसके इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी और अदालत ने इस आरक्षण के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।

‘आरक्षण यानि योग्यता को नजरअंदाज करना’

अदालत के फैसले के बाद सिंह से जब पत्रकारों ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि अदालत ने उनके निर्णय को वैध ठहराया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में इस साल से ही यह आरक्षण लागू कर देगी, तो सिंह ने कहा कि इस शैक्षणिक सत्र से उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू हो जाएगा।

’क्रीमी लेयर’ को आरक्षण के दायरे से बाहर रखे जाने के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि सरकार अदालत का सम्मान करती है।

‘उच्च जाति के गरीबों को भी आरक्षण मिले’

रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर करारा तमाचा है, जो अप्रत्यक्ष रुप से आरक्षण का विरोध कर रही थी।

यादव ने ‘क्रीमी लेयर’ के सवाल पर कहा कि सरकार को यह तय करना है कि क्रीमी लेयर का दायरा क्या हो। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जरुरत पड़ने पर सरकार के साथ बातचीत करेगी।

रेल मंत्री ने इन आरोपों को खारिज किया कि ओबीसी का आरक्षण लागू होने से उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रतिभा का अनादर होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभा और योग्यता उच्चवर्ग का एकाधिकार नहीं है। पिछड़े और दलित वर्गों में भी काफी तेजस्वी लोग हैं।



सर्वोच्च न्यायालय की ओबीसी आरक्षण को हरी झंडी
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ओबीसी पर फैसले को चुनौती देगा वाईएफई Apr 10, 05:08 pm

नई दिल्ली। जाति के आधार पर आरक्षण देने के खिलाफ संघर्षरत संगठन [यूथ फॉर इक्विलिटी] ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग [ओबीसी] को 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी देने संबंधी सुप्रीमकोर्ट के फैसले को योग्यता को नजरअंदाज करना करार देते हुए कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देगा और जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगा।

संगठन के संस्थापक सदस्य कुमार हर्ष ने कहा कि न्यायालय का यह फैसला देश की भावी पीढ़ी के लिए अहितकारी होगा। इस फैसले से देश की योग्यता और भविष्य पर दुष्प्रभाव पडे़गा। उन्होंने कहा कि वाईएफई फैसले को चुनौती देगा और संघर्ष को आगे बढ़ाएगा।

कुमार ने कहा कि यह फोरम उन लोगों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगा जो देश को जाति और धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं। हम किसी जाति के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम केंद्र की पक्षपातपूर्ण नीतियों के विरुद्ध अवश्य हैं।
ओबीसी के खालीपद भरे जाएँगे नई दिल्ली-केन्द्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ावर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित कोटे के खाली पड़े पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

मंत्रिमंडल समूह की इस आशय की सिफारिश को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक राज्यमंत्री सुरेश पचौरी ने शनिवार को इस संबंध में आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।

सरकार के इस फैसले से ओबीसी के रिक्त पड़े 23000 पदों को विशेष अभियान चला कर भरा जा सकेगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार विशेष भर्ती अभियान के पहले सरकारी नियमों में एक संशोधन किया जाना है जिसके तरह अनुसूचित जाति एवं जनजाति के रिक्त पदों के लिए विशेष भर्ती अभियान की तरह ही ओबीसी के लिए विशेष भर्ती अभियान को भी उच्चतम न्यायालय की उस व्यवस्था के दायरे से बाहर किया जाएगा जिसमें आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की गई है।

सूत्रों ने बताया कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 22 दिसंबर 2005 को सरकारी नौकरियों में ओबीसी के रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने पर विचार के लिए गृहमंत्री शिवराज पाटिल की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह गठित किया था। मंत्रिसमूह ने चार बैठकें कीं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के साथ ओबीसी कोटे के रिक्त पदों की भर्ती के लिए भी विशेष अभियान चलाने की सिफारिश की।

इस मंत्रिसमूह में भी पचौरी तथा केन्द्रीय परिवहन मंत्री टी आर बालू भी शामिल थे। मंत्रिसमूह की सिफारिश प्राप्त होने पर कार्मिक मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री को भेजा था तथा एक दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री के इसे मंजूरी देने के बाद पचौरी ने शनिवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए।

गौरतलब है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने मई 2004 में केन्द्र में सत्ता संभालने के बाद अनुसूचित जाति एवं जनजाति के रिक्त पड़े करीब 60 हजार पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया था।

इस फैसले को लागू करने मे 1992 उच्चतम न्यायालय का इंदिरा साहनी मामले का फैसला अड़चन था जिसमें कहा गया है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। बाद में सरकार ने नियमों में संशोधन कर कोटे के तहत पहले से रिक्त पड़े पदों को उच्चतम न्यायालय की इस व्यवस्था के दायरे से बाहर कर दिया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार विशेष अभियान के तहत अब तक 53444 पद भरे जा चुके हैं जो कुल रिक्त पदों का 87 प्रतिशत हैं। संप्रग सरकार के इस नए फैसले से 23000 से ज्यादा पिछड़े वर्ग के लोग लाभान्वित होंगे।

ओबीसी कोटे को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडीनई दिल्ली-सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में पिछड़े तबके के छात्रों को 27 फीसदी आरक्षण मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है। हालाँकि कोर्ट ने क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा है। कोर्ट के फैसले के बाद इन संस्थानों में मिलने वाले आरक्षण की सीमा बढ़कर 49.5 फीसदी हो गई है।

कोर्ट ने पिछले साल नवंबर महीने में कोर्ट ने इस मामले पर फैसला रिजर्व रखा था। इस मामले की सुनवाई करने के लिए 5 जजों की बेंच का गठन हुआ था जिनमें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि 8 अगस्त 2007 को केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े तबके के छात्रों के लिए 27 फीसदी कोटा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति देने से इनकार कर दिया था।
ओबीसी से तौबा!
भास्कर न्यूजThursday, March 27, 2008 01:47 [IST]
जयपुर.राजस्थान में ओबीसी कोटे ने सारा ताना-बाना डावांडोल कर दिया है। दरअसल, मात्र 21 प्रतिशत सीटों के लिए राज्य की आधी जनसंख्या को मौका दिया गया है, जिससे आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि ओबीसी की बजाय सामान्य वर्ग का कम कट ऑफ मार्क्‍स में सलेक्शन हो रहा है। इससे हालात ये हो गए हैं कि ओबीसी के छात्र अब सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षा देना चाहते हैं।

ओबीसी छात्रों का मानना है कि सामान्य वर्ग में ५१ सीटों के लिए केवल ३४ प्रतिशत ही जनसंख्या होने से प्रतिस्पर्धा में कमी आ गई है, जबकि ओबीसी वर्ग में रहकर २१ प्रतिशत सीटों के लिए प्रदेश की आधी जनसंख्या से जूझना पड़ रहा है। विधि एवं जाति विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ओबीसी के छात्र अपना वर्ग छोड़कर सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षा देंगे तो आरक्षण की व्यवस्था बिगड़ जाएगी।

माना जा रहा है कि इस बार आरएएस-प्री के रिजल्ट में सामान्य से अधिक ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स आना भी आरक्षण की व्यवस्था बिगड़ने का संकेत है। आरएएस-प्री मे सामान्य वर्ग से अधिक कट ऑफ मॉर्क्‍स ओबीसी वर्ग के होने से इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि ओबीसी वर्ग का शैक्षणिक स्तर सामान्य वर्ग से बेहतर आ गया है।

>> पाला बदलेंगे ओबीसी छात्र :

आरएएस-प्री के रिजल्ट से 70 फीसदी ओबीसी वर्ग के छात्रों के दिमाग में यह बात घर कर गई है कि ओबीसी कोटे से फार्म भरना फायदे का सौदा नहीं होगा। राज्य लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जीएम खान का कहना है कि आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में ओबीसी वर्ग के छात्र निश्चित तौर पर सामान्य कोटे से ही परीक्षा देंगे। इससे आरक्षण की व्यवस्था पर फर्क पड़ेगा।

>> कहना है-

गुर्जर आंदोलन के पीछे भी यही

-गुर्जर आरक्षण आंदोलन का मुख्य कारण यह भी था कि गुर्जर समाज के लोगों को यह बात समझ में आ गई थी कि ओबीसी वर्ग की जनसंख्या आधी हो रही है, जबकि उनके लिए रिजर्व कोटा केवल 21 प्रतिशत का है। इसलिए गुर्जर समाज ने ओबीसी कोटे से निकलने के लिए आंदोलन किया। अगर आरक्षित वर्ग सामान्य कोटे में आकर प्रतियोगिता परीक्षा देता है तो कानूनन नहीं रोका जा सकता। इस स्थिति से निबटने के लिए कानून बनाने की जरूरत है।
जसराज चोपड़ा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश

>> आजादी के बाद जब ओबीसी वर्ग के आरक्षण का निर्धारण हुआ था, तब स्थिति अलग थी और अब अलग है। हालात सबके सामने हैं।

सामान्य कोटे से देंगे परीक्षा

>> आरएएस प्री में मेरे कट ऑफ मार्क्‍स २00 थे, लेकिन ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स २0६ रहने से मेरा सलेक्शन नहीं हुआ। अगर मैं सामान्य वर्ग से फार्म भरता तो मेरा आरएएस-प्री सलेक्शन हो जाता। मैंने तय किया है कि अगली बार आरएएस-प्री व अन्य परीक्षाएं सामान्य कोटे से दूंगा।
>> जितेंद्र सिंह, ओबीसी छात्र, भरतपुर
>> शशिकांत शर्मा, अध्यक्ष आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग


यह सच है कि ओबीसी वर्ग के छात्र सामान्य कोटे से परीक्षा देने की मंशा रखते हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो आरक्षण की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।
डॉ. राघव प्रकाश, निदेशक, परिष्कार

अनसोचा सच


ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण अब लाभ का विषय नहीं रह गया है। आरक्षण देते और लेते वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स सामान्य से ज्यादा भी जा सकते हैं। आज यह सच्चई बन चुकी है।

अनजाना भय

ओबीसी में आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इस वर्ग के छात्रों को पिछड़ने का भय है। वे सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षाएं देना चाहते हैं। आरएएस-प्री में कई छात्रों को ओबीसी वर्ग में होने का नुकसान उठाना पड़ा।

अनदेखा क्यों!

विधि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओबीसी छात्र सामान्य वर्ग से परीक्षाओं में शामिल होने लगे, तो न केवल सामान्य वर्ग प्रभावित होगा, बल्कि आरक्षण व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा जाएगी। इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

ओबीसी का भविष्य खतरे में

ओबीसी में आधी जनसंख्या पर केवल २१ फीसदी सीटें आरक्षित होने से ओबीसी वर्ग के छात्रों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। सामान्य कोटे की ५१ प्रश सीटों के लिए केवल ३४ प्रश जनसंख्या की प्रतिस्पर्धा को ओबीसी वर्ग के छात्र बेहतर मानने लगे हैं। जल्द ही रास्ता निकालना होगा।
-बीजी रावत, लॉ प्रोफेसर

ठोस कानून बनाने की जरूरत

आरक्षित वर्ग के लोग सामान्य वर्ग में दाखिल नहीं हो सकें, इसके लिए सरकार को ठोस कानून बनाने की जरूरत है। अगर सामान्य कोटे से ओबीसी वर्ग के छात्र प्रतियोगी परीक्षा देंगे तो सामान्य वर्ग बुरी तरह प्रभावित होगा और आरक्षण की व्यवस्था चरमरा जाएगी।
-पीके तिवाड़ी,अध्यक्ष, ओबीसी आयोग

सामान्य वर्ग से परीक्षा देने में लाभ

मैंने तय किया है कि अगली बार प्रतियोगी परीक्षा सामान्य वर्ग से देना उचित होगा। आरक्षण की व्यवस्था मे ओबीसी का २१ प्रतिशत कोटा है जबकि जनसंख्या आधे के करीब है। इसलिए सामान्य वर्ग की ३४ प्रतिशत जनसंख्या की प्रतिस्पर्धा में शामिल होना बेहतर होगा।
-धर्मेद्र सिंह,ओबीसी छात्र, जयपुर

Saturday, April 5, 2008

मोटेरा में भारत की शर्मनाक हार

मोटेरा में भारत की शर्मनाक हार


अहमदाबाद (एजेंसी/वेबदुनिया), शनिवार, 5 अप्रैल 2008( 18:59 IST )






पहली पारी में 76 रन पर सिमटने और दक्षिण अफ्रीका से 418 रन से पिछड़ने के बाद भारत दूसरे टेस्ट मैच में पारी और 90 रनों से पराजित हो गया। दूसरे टेस्ट में सौरव गांगुली (87) को छोड़कर सभी दिग्गज बल्लेबाज अफ्रीकी गेंदबाजों के सामने हथियार डालते ही नजर आए। घरेलू पिच पर भारत की यह चौथी सबसे बड़ी हार है।

मेहमान टीम ने अपनी पहली पारी कल के स्कोर सात विकेट पर 494 रन पर समाप्त घोषित कर दी। एबी डिविलियर्स ने नाबाद 217 रन बनाए। डिविलियर्स को 'मैन ऑफ द मैच' से नवाजा गया।

जवाब में भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पहले टेस्ट में 319 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग मात्र 17 ही बना पाए। वसीम जाफर (19), राहुल द्रविड़ (17), वीवीएस लक्ष्मण (35), महेन्द्रसिंह धोनी (52), अनिल कुंबले (5), हरभजन (4), एस. श्रीसंत (17) में से किसी का भी बल्ला नहीं चल पाया। इरफान पठान 43 रन बनाकर नाबाद रहे। दक्षिण अफ्रीका की ओर से स्टेन और एनटिनी ने 3-विकेट, मोर्कल ने 2 तथा कैलिस और हैरिस ने एक-एक विकेट लिया।

भारतीयों बल्लेबाजों के दिमाग पर बड़ी रन संख्या से पिछड़ने का दबाव था, जिसका दक्षिण अफ्रीका ने पूरा फायदा उठाया। सहवाग थोड़े समय के लिए क्रीज पर रहे और उन्होंने डेल स्टेन के पहले ओवर में दो छक्के जड़ने के अलावा एक चौका भी लगाया। उन्हें गेंदबाजी का आगाज करने वाले दूसरे गेंदबाज मखाया एनटिनी ने पगबाधा आउट किया।

द्रविड़ ने लंबे कद के मोर्कल की शार्ट गेंद पर डिविलियर्स को दूसरी स्लिप में आसान कैच थमाया। डिविलियर्स ने इसके अलावा जाफर को भी इसी पोजीशन पर कैच आउट किया। तब बल्लेबाज ने जैक कैलिस की गेंद पर ढीला शॉट खेला था।

जाफर तो शुरू से ही असहज होकर खेल रहे थे और वह किसी भी समय आत्मविश्वास से खेलते हुए नहीं दिखे। इससे पहले पिच के आसपास का क्षेत्र गीला होने के कारण खेल आधा घंटा देर से शुरू हुआ।
'सात विमानों को उड़ाने की थी तैयारी'


लंदन (भाषा), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 16:15 IST )






एक ब्रिटिश अभियोजक के अनुसार सात विमानों को बोतल बमों से उड़ाने के लिए आतंकवादियों ने एक योजना बना रखी थी और इसको अंजाम देने की तैयारी भी पूरी कर ली थी। इससे कई नागरिकों की जान जा सकती थी।

एक अदालत को दी गई जानकारी में बताया गया कि आठ ब्रिटिश युवकों पर लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से अमेरिका और कनाडा के लिए उड़ान भरने वाले विमानों पर हमले की योजना बनाने का आरोप है।

सरकारी वकील पीटर राइट ने वुलविच क्राउन अदालत को कल बताया कि इस आतंकवादी घटना का असर पूरी दुनिया में होता। राइट ने कहा कि ये लोग इस्लाम के नाम पर समन्वित और घातक बम विस्फोटों को अंजाम देने वाले थे जिनसे बड़ा नरसंहार हो सकता था।

कथित रूप से जिन सात विमानों पर हमले की योजना थी उनमें 241 से 285 यात्रियों के होने की संभावना थी। इन सभी विमानों ने एक-दूसरे से लगभग ढाई घंटे के अंतराल पर हीथ्रो से उड़ान भरी।

हमले की कोशिश की शुरुआत में ही सुरक्षाकर्मियों ने आठों को पकड़ लिया। इनमें सात लंदन के थे। इन सभी ने किसी भी विमान की सुरक्षा में सेंध लगाकर हत्या और हिंसा की किसी भी वारदात से इनकार किया है।

इनके नाम अब्दुल्ला अहमद, अली असद सरवर, तनवीर हुसैन और इब्राहीम सावंत (सभी 27 साल), मोहम्मद गुलजार और अराफात वहीद खान (दोनों 26 साल), वहीद जमाँ (23) और उमर इस्लाम (29) हैं। अली सरवर और गुलजार इनके सरगना थे।
शेख हसीना अदालत में बीमार


ढाका (वार्ता) , शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 13:34 IST )






बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम शेख हसीना अदालत में सुनवाई के दौरान अचानक बीमार पड़ गईं जिस कारण से अदालती कार्यवाही को टालना पड़ा।

अदालत के एक अधिकारी बताया कि अदालत में सुनवाई शुरू होने के कुछ समय बाद ही शेख हसीना बीमार पड़ गईं और सुनवाई को अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित करना पड़ा। गौरतलब है कि शेख हसीना घूसखोरी के एक मामले में पिछले एक साल से जेल में बंद हैं।

इसके पहले भी सुनवाई के दौरान बीमार होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उच्च रक्तचाप और कान तथा आंख के इलाज के बाद उन्हें कुछ दिन पहले ही अस्पताल से छुट्टी दी गई थी।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक अभियान के तहत देश के 170 प्रमुख राजनेताओं को हिरासत में रखा है।
खुद में बदलाव चाहती हैं मेडोना


वॉशिंगटन (एएनआई), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 18:56 IST )






अमेरिकी पॉप गायिका मेडोना ने हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान माना कि वे अब अपने स्वभाव में बदलाव चाहती हैं और ‘फेमिनिन’ गुणों को बढ़ाना चाहती हैं।

मेडोना का मानना है कि उनके भीतर हमेशा से ही पुरुषोचित गुणों की बहुलता रही है, मगर अब वे अपने स्वभाव में परिवर्तन लाना चाहती हैं और महिलाओं के गुणों को व्यवहार में अधिक लाना चाहती हैं।

कांटैक्टम्यूजिक.कॉम को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि मैं अब अपने भीतर परिवर्तन चाहती हूँ और अपने फेमिनिन गुणों को निखारना चाहती हूँ।

उन्होंने यह भी माना कि मैं हमेशा से ही व्यवहार में पुरुषोचित गुणों - आत्मविश्वास, साहस आदि को प्रधानता देती रही हूँ, मगर अब मैं एक नारी होने के अपने गुण - नम्रता, क्षमाशीलता आदि को निखारने पर बल दे रही हूँ, जिससे मेरे व्यवहार में थोड़ा परिवर्तन आ सके।
ब्रिटनी स्पीयर्स अभी भी अस्वस्थ?


वॉशिंगटन (एएनआई), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 18:55 IST )






पॉप गायिका ब्रिटनी स्पीयर्स भले ही अपनी जिंदगी को सही ट्रैक पर लाने के कितने ही दावे क्यों न कर रही हों, पर उनके पूर्व पति केविन फेडर लाइन के वकील मार्क विंसेट कैप्लेन अभी तक उन्हें बीमार ही मानते हैं।

कैप्लेन का मानना है कि भले ही ब्रिटनी अपने पिता जेमी की सहायता से अपनी स्थिति में सुधार कर रही हों, पर इससे यह बिल्कुल भी नहीं माना जा सकता है कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हो गई हैं।

पीपुल नामक पत्रिका को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने माना कि जेमी सच में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। वह एक परिस्थिति थी, जो अब सामान्य होती जा रही है, पर इससे हम यह नहीं मान सकते हैं कि ब्रिटनी पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी हैं।

वे यह भी मान रहे हैं कि वर्तमान में पैपराजी उनके नकारात्मक पहलू के बजाय उनकी सफलताओं पर अधिक जोर दे रहे हैं। शायद यही वजह है कि ब्रिटनी एक बार फिर अपने करियर को गंभीरता से ले रही हैं।

साथ ही उनका यह भी मानना है कि भले ही केविन हमेशा से ब्रिटनी के भले की सोचते रहे हों और उन्हें खुश देखना चाहते हों, पर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में ये दोनों फिर से एक होंगे।
मुशर्रफ चीन की यात्रा पर जाएँगे


बीजिंग (वार्ता) , शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 12:16 IST )






पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ 10 अप्रैल को चीन की छह दिवसीय यात्रा पर बीजिंग आ रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनरल मुशर्रफ 15 अप्रैल को वापस लौटेंगे।

जनरल मुशर्रफ की चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो चुका है और वह अपदस्थ न्यायाधीशों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है, जबकि चीन सरकार को तिब्बत में आजादी समर्थक आंदोलन तथा आंदोलन समर्थकों के दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आलोचना की दोहरी चुनौती झेलनी पड़ रही है।

चीनी विदेश मंत्रालय अथवा पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अभी इस यात्रा की विषयवस्तु एवं कार्यक्रम के बारे में कुछ नहीं बताया है।
नाओमी हीथ्रो हवाई अड्डे पर गिरफ्तार


लंदन (वार्ता) , शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 12:04 IST )






सुपर मॉडल नाओमी कैम्पबैल को हीथ्रो हवाई अड्डे पर लॉस एंज‍िल्स जाने वाली ब्रिटिश एयरवेज के विमान में एक अधिकारी के साथ हाथापाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

ब्रिटिश हवाई अड्डा प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ने बताया कि कल दोपहर ब्रिटिश एयरवेज के एक विमान से एक यात्री को बाहर करने के लिए पुलिस बुलाना पड़ी।

पुलिस का कहना है कि उन्होंने एक यात्री को एक अधिकारी की पिटाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया है, लेकिन अन्य विवरण देने से मना कर दिया।

हवाई अड्डे के सूत्रों ने बताया कि यह यात्री कोई और नहीं सुपर मॉडल नाओमी कैम्पबैल हैं, जो लॉस एंज‍िल्स जाने वाली उड़ान से जाने वाली थीं।

कैम्पबैल को पिछले वर्ष अपने नौकर पर मोबाइल फोन फेंककर मारने के जुर्म में तीन सप्ताह सामुदायिक सेवा करने और क्रोध प्रबंधन की कक्षा में जाने की सजा दी गई थी।
अलकायदा के आरोप झूठ का पुलिंदा


संयुक्त राष्ट्र (वार्ता), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 10:53 IST )






संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अलकायदा के दूसरे नंबर के आतंकवादी अयमान अल जवाहरी के संयुक्त राष्ट्र द्वारा मुसलमानों की मदद नहीं करने के बयान को झूठ का पुलिंदा करार दिया है।

संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता मारी ओक बे ने बताया कि अलकायदा का यह बयान सरासर झूठ है।

गौरतलब है कि अलकायदा आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन के बाद संगठन में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले जवाहरी ने जारी एक नए वीडियो में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की थी और लादेन के पूरी तरह स्वस्थ होने की बात कही थी। वीडियो में यहूदियों पर हमले का भी आह्वान किया गया था।

सुश्री ओकबे ने बताया कि मून ने बुखारेस्ट में जारी नाटो की बैठक में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से अकेले में मिलकर अलकायदा के संदेश पर बातचीत की।

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने जवाहरी के टेप को प्रतिकूल बताया। मून ने रोमानिया में भी संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों से मुलाकात की और उनसे भी जवाहरी के टेप के बारे में बातचीत की।

सुश्री ओकबे ने कहा कि मून ने जवाहरी के टेप को पूरी तरह झूठा करार देते हुए इसे गलत आरोप बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने मुसलमानों की मदद की है।

जवाहरी ने गुरुवार को जारी अपने टेप में 2003 में बगदाद और 2007 में अल्जीयर्स में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों पर हुए आतंकवादी हमले को सही ठहराया था।

हालाँकि सुश्री ओक बे इस बात का उत्तर टाल गईं कि क्या जवाहरी द्वारा जारी इस टेप के बाद संयुक्त राष्ट्र अपनी सुरक्षा कड़ी करेगा। उन्होंने कहा आपको पता है कि संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों के सुरक्षा की समीक्षा हर दिन की जाती है और हम सार्वजनिक तौर पर इसके बारे में नहीं बताते हैं।
अमेरिकी संसद में तिब्बत पर चर्चा होगी


वॉशिंगटन (वार्ता), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 10:37 IST )






अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अगले सप्ताह एक प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसमें चीन सरकार से तिब्बत में दमनात्मक कार्रवाई खत्म करने और दलाई लामा के साथ सार्थक बातचीत शुरू करने का आह्वान किया जाएगा।

प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नेंसीपेलोसी तथा सर्वदलीय सांसद प्रतिनिधिमंडल ने भारत में दलाई लामा तथा तिब्बत की निर्वासित सरकार के अन्य नेताओं से भी मुलाकात की थी।

सुश्री पेलोसी ने कहा कि दुनियाभर के नेताओं ने चीन सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले तिब्बत का दमन बंद करने और श्रद्धेय दलाई लामा से बात करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि उन्हें आशा है कि सदन इस संवदेनशील वक्त में तिब्बती लोगों के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के समर्थन में एक प्रभावशाली एवं एकजुटता वाला बयान जारी करेगा।
सहवास का असली सुख 3 से 13 मिनट में


न्यूयॉर्क (भाषा), शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008( 10:15 IST )






स्त्री-पुरुष के बीच यौन संबंधों का असल सुख मिनटों के सहवास से प्राप्त होता है न कि घंटों के सहवास से। अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि स्त्री-पुरुष के बीच संतोषजनक सहवास आमतौर पर 3 से 13 मिनट का होता है।

अग्रणी शोधकर्ता एरिक कोर्टी ने कहा कि एक स्त्री या पुरुष के मन में अपनी और अपने साथी की यौन कार्यशीलता की व्याख्या समाज से मिले औपचारिक या अनौपचारिक संदेशों के रूप में विकसित हुई।

उन्होंने कहा दुर्भाग्य से आज स्त्री-पुरुष पूरी रात के सहवास जैसी कल्पनाएँ करते रहते हैं। पिछले शोधों से पता चला कि अधिकतर स्त्री-पुरुष आधा घंटा या इससे अधिक समय तक सहवास करना चाहते हैं। यह निराशा और असंतुष्टि पैदा करने वाली स्थिति है।

कोर्टी ने कहा इस सर्वेक्षण से हमें इस तरह की गफलतों के दूर होने की उम्मीद है। नए सर्वेक्षण से स्त्री पुरुषों को स्वीकार्य सहवास के वास्तविक विवरण के प्रति प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। साथ ही साथ इससे यौन निराशा तथा यौन सुख असंतुष्टि को रोकने में भी मदद मिलेगी।

शोधकर्ताओं ने अपने सर्वेक्षण में सेक्स थेरैपी और अनुसंधान के लिए बनाए गए समूह के 50 सदस्यों से बात की। इस समूह में मनोवैज्ञानिकों डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पारिवारिक मामलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया।

अधिकतर विशेषज्ञों ने कहा कि यौन संबंधों के दौरान संतोषजनक सुख के लिए पर्याप्त अवधि 3 से 13 मिनट और वांछनीय अवधि 7 से 13 मिनट है। विशेषज्ञों ने कहा कि इसके लिए एक से दो मिनट का समय काफी 'कम' है तथा 10 से 30 मिनट का समय काफी 'लंबा' है।
ऑनलाइन होंगे शेक्सपियर के नाटक


लंदन (भाषा), गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 14:52 IST )






विलियम शेक्सपियर के नाटकों के 1641 से पूर्व के सभी 75 संस्करण जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। शेक्सपियर के सबसे पहले प्रकाशित संस्करण 'द क्वार्टोज' को ऑनलाइन नि:शुल्क पढ़ा जा सकेगा। क्वार्टोज के संग्रह को ऑनलाइन करने की एक वर्षीय योजना इस महीने शुरू हो जाएगी।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का बोडलेन पुस्तकालय और वॉशिंगटन स्थित फोल्गर शेक्सपियर पुस्तकालय इस दिशा में काम कर रहे हैं। परियोजना की साइट पर उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और शेक्सपियर का समस्त उपलब्ध क्वार्टोज आकर्षक रूप में होगा। कुछ पांडुलिपियों के नहीं होने की स्थिति में क्वार्टोज में शेक्सपियर से जुड़े उन ज्ञात तथ्यों का उल्लेख होगा, जिनको उन्होंने लिखा हो या जिसका आधुनिक अंग्रेजी मंजों पर प्रस्तुतीकरण किया गया हो।

शेक्सपियर की रचनाओं में विद्वानों, शिक्षकों, संपादकों और रंगमंच निर्देशक सभी रुचि रखते हैं। लेकिन दुर्लभ और नाजुक होने की वजह से क्वार्टोज का पहला संस्करण अधिकतर लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं है। पहले चरण में हेमलेठ की सभी 32 प्रतियों पर भी यह योजना लागू होगी।
दुबई में विदेशी श्रमिकों का उपद्रव


दुबई (वार्ता) , गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 13:59 IST )






संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में दुबई-शारजाह राजमार्ग पर अल नाह्दा में वाहनों पर पथराव करने के आरोप में 600 से ज्यादा विदेशी कामगारों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक भी शामिल हैं।

रिपोर्टो में कहा गया है कि भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के ये श्रमिक टाइगर कांट्रेक्टिंग कंपनी में काम करते थे। कंपनी ने इन्हें दो निर्माणाधीन इमारतों में रहने को कहा था, जिसका ये विरोध कर रहे थे।

खलीज टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गिरफ्तार किए जाने के बाद इन श्रमिकों को अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

मंगलवार रात को हुई इस घटना में 800 से ज्यादा कामगार लिप्त थे। उनका उपद्रव बुधवार तड़के तक चला, लेकिन पुलिस ने 625 श्रमिकों को ही गिरफ्तार किया है। इस घटना में 15 श्रमिक घायल भी हुए हैं।
स्कारलेट की माँ को न्याय की उम्मीद


लंदन (भाषा) , गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 12:57 IST )






स्कारलेट कीलिंग की सनसनीखेज हत्या मामले की जाँच सीबीआई के हवाले करने के गोवा सरकार के फैसले के कुछ ही घंटों बाद मृतक ब्रिटिश किशोरी की माँ ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से सचाई सामने आएगी।

स्कारलेट की माँ फियोना मैकेओन ने कहा कि मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का फैसला उम्मीद जगाने वाला है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे कुछ भी छिपा नहीं रहेगा और सचाई लोगों के सामने आएगी। फियोना कुछ ही दिन पहले 15 वर्षीय बेटी के अंतिम संस्कार के लिए उसका शव लेकर लंदन आई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा पुलिस भ्रष्ट है। उन्होंने वहाँ के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे उनकी बेटी की हत्या मामले को तवज्जो नहीं देकर पर्यटन को बनाए रखने को लेकर चिंतित थे।

उन्होंने कहा कि मुझे यह जानने की जरूरत है कि आखिर उसके साथ क्या हुआ। जब तक मैं इस बारे में जान नहीं जाती, चुप नहीं बैठ सकती।
भारतीय दंपति ने की आत्महत्या


दुबई (भाषा) , गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 12:07 IST )






सउदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित अपने आवास के पंखे से लटककर एक भारतीय दंपति ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। महिला को एड्स होने का पता लगने पर दोनों ने यह कदम उठाया।

पूर्वी प्रांत के पुलिस प्रवक्ता यूसुफ अलकाहतानी ने बताया कि पुरुष के भाई ने इस दंपति के लापता होने के बारे में रिपोर्ट लिखवाई थी।

उन्होंने बताया कि नागरिक सुरक्षा अधिकारी जब दंपति के अपार्टमेंट में पहुँचे तो उन्हें पंखे से लटकता पाया।

उन्होंने बताया मौके से एक पत्र बरामद किया गया, जिसमें लिखा है कि महिला को एड्स हो जाने से वे परेशान थे।
दलाई लामा के असली चरित्र को समझें


बीजिंग (वार्ता) , गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 11:40 IST )






चीन ने अमेर‍िका से आग्रह किया है कि वह तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के गुट के 'असली चरित्र' को समझे और चीन के न्यायोचित रुख का समर्थन करे।

चीन के विदेशमंत्री यांग जिएची ने अमेर‍िका के वित्तमंत्री हेनरी पालसन के साथ बैठक में यह टिप्पणी की।

चीन के सरकारी समाचार-पत्र 'चाइना डेली' ने एक रिपोर्ट में कहा कि यांग ने पालसन को ल्हासा में हुए दंगों की सचाई और चीन सरकार के रुख से अवगत कराया।

चीनी विदेशमंत्री ने बताया कि चीन सरकार ने कानून के अनुसार ऐसे कदम उठाए हैं जिन्हें न सिर्फ चीनी जनता का समर्थन हासिल है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी समर्थन प्राप्त है।

चीन की यात्रा पर आए पालसन ने कहा कि चीनी नेतृत्व के समक्ष तिब्बत का मामला उठाया था तथा बातचीत के जरिये इस मसले के समाधान की अपील की थी। पालसन ने चीनी राष्ट्रपति हू जिन्ताओ, उप प्रधानमंत्री वांग किशांन से मुलाकात की है। वे प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ से आज मिलेंगे।
अमेरिका इराक से सेना हटाना जारी रखेगा


वाशिंगटन (वार्ता) , गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 11:25 IST )






अमेरिका इराक में जारी हिंसा में बढ़ोतरी के बावजूद जुलाई तक वहाँ से अपने सैनिकों को हटाना जारी रखेगा।

अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया कि जुलाई के बाद अमेरिका वहाँ से सैनिकों को हटाना बंद कर इराक की सुरक्षा स्थिति का जायजा लेगा।

अमेरिकी ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष एडम माइक मुलिन ने कहा कि हाल में बगदाद और बसरा में हुई हिंसा के बावजूद अमेरिका अपने पाँच ब्रिगेडों को युद्ध क्षेत्र से हटाने की योजना जारी रखेगा।

मुलिन ने पेंटागन में कहा कि अभी हम इराक से अपनी पाँचवीं ब्रिगेड को हटाने की योजना पर काम कर रहे हैं और इसका आखिरी दस्ता जुलाई के अंत तक वापस आ जाएगा तथा इसके बाद इराक की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
कश्मीर नीति को जारी रखे पाक-मुफ्ती


इस्लामाबाद (वार्ता), गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 09:31 IST )






पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की नई सरकार से राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की कश्मीर नीति को जारी रखने का आग्रह किया है।

सुश्री मुफ्ती ने मंगलवार को 'शांति प्रक्रिया और कश्मीर मुद्दा' पर आयोजित एक समारोह में कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह किसी की निजी नीति नहीं है और इससे कश्मीर के लोगों में विश्वास बहाली हुई है।

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है नई सरकार के साथ यह नीति भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार लोगों और सामानों के आवागमन को और बढ़ावा देकर वहाँ विश्वास बहाली के कदमों को और ठोस करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके तहत ही भारत सरकार कश्मीरियों को परमिट पर नियंत्रण रेखा पर आवागमन करने की अनुमति दे रही है। सुश्री मुफ्ती ने कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ की कश्मीर नीति अपने आप समाप्त नहीं हो सकती।

अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान सुश्री मुफ्ती ने कल शायर-ए-मशरीक अल्लमा इकबाल के लाहौर स्थित मजार पर जाकर इस महान कवि को श्रद्धांजलि दी।
ओबामा ने किया जीत का दावा


वाशिंगटन (भाषा), गुरूवार, 3 अप्रैल 2008( 09:51 IST )






बराक ओबामा के समर्थकों ने टेक्सास में हिलेरी क्लिंटन पर अपने नेता की जीत का दावा किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करने की जंग में जुटे ओबामा और हिलेरी के बीच टेक्सास में भिड़ंत पिछले महीने हुई थी। हिलेरी हालाँकि राज्य के प्राइमरी चुनाव में विजयी रहीं।

ओबामा के समर्थकों ने कहा कि उनके नेता को हिलेरी के 94 के मुकाबले 99 डेलीगेट के वोट मिले। जीत-हार के आकलन के लिए प्राइमरी के बाद हुए काकस चुनाव के परिणामों को शामिल किया गया।

जीत के बारे में अंतिम पुष्टि जून के पहले सप्ताह से पूर्व नहीं हो पाएगी, क्योंकि तब टेक्सास के डेमोक्रेट्स राज्यस्तरीय बैठक करेंगे।

दूसरी ओर आस्टिन से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सांसद लियोड डोगेट ने कहा कि ओबामा और हिलेरी के बीच टेक्सास में उम्मीदवारी की जंग पूरी हो चुकी है।

संवाददाता सम्मेलन में कल उन्होंने कहा कि यह 100 प्रतिशत स्पष्ट है कि टेक्सास में ओबामा की जीत हुई है और संभवत: वह पाँच वोटों से जीते हैं।
हिलेरी 30 लाख नौकरियाँ सृजित करेंगी


वाशिंगटन (भाषा), बुधवार, 2 अप्रैल 2008( 23:02 IST )






डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन ने अमेरिकी आधारभूत ढाँचे के पुनर्निर्माण के लिए 30 लाख नई नौकरियाँ पैदा करने का वायदा किया और मजदूर यूनियनों की प्रशंसा बटोरी।

उन्होंने इस महीने होने वाले पेनसिलवेनिया प्राइमरी चुनाव में कामकाजी श्रेणियों के मतदाताओं से अपने समर्थन के लिए अपील की। कामकाजी श्रेणी के मतदाताओं की पेनसिलवेनिया प्राइमरी में काफी अहमियत है।

डेमोकेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की जंग में लगे हिलेरी के प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा ने भी मतदाताओं को रिझाने के लिए नई नौकरियाँ पैदा करने का वायदा किया।

उन्होंने कहा कि वह 60 अरब अमेरिकी डॉलर की नई नौकरियाँ पैदा करेंगे और यह राशि इराक युद्ध का खात्मा कर बचाई जाएगी। हिलेरी ने नई नौकरियाँ पैदा करने के लिए अपनी 10 वर्षीय योजना के बारे में कहा कि यह इसलिए जरूरी है क्योंकि राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश मूकदर्शक बने रहे। उन्होंने कुछ नहीं किया और हमने 30 लाख विनिर्माण संबंधी नौकरियाँ खो दीं।

हिलेरी क्लिंटन ने नई नौकरियों के मुद्दे का अपना आक्रामक एजेंडा बना लिया है। हिलेरी के मुद्दे को लपकने की कोशिश में उनके प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा भी लगे हैं। अपने अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि यदि हम हर महीने बगदाद में 10 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर सकते हैं तो इनमें से कुछ अरब हम अमेरिका के आधारभूत ढाँचे को फिर से दुरुस्त करने के लिए भी खर्च कर सकते हैं।

पेनसिलवेनिया में 22 अप्रैल को प्राइमरी चुनाव होने हैं और यहाँ चौथे नंबर पर सर्वाधिक मजदूर यूनियनें हैं। हिलेरी के पक्ष में अधिक यूनियनें हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से मजबूत कुछ यूनियनें ओबामा का समर्थन भी कर रही हैं।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने चेतावनी दी कि आम चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन मैक्केन के खिलाफ डेमोक्रेटों की राह आसान नहीं होगी।
पाक जेलों में बंद हैं 489 भारतीय


इस्लामाबाद (भाषा), मंगलवार, 1 अप्रैल 2008( 18:33 IST )






पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में कम से कम 489 भारतीय कैदी के रूप में सजा काट रहे हैं। इनमें से अधिकतर मछुआरे हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच अदला-बदली की गई कैदियों की सूची के अनुसार पाकिस्तान की जेलों में इस समय 489 भारतीय कैदी हैं।

दोनों देशों के बीच कल दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्त स्तर पर कैदियों की सूची की अदला-बदली की गई।

पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने भारत के 53 नागरिकों और 436 मछुआरों को अपनी जेलों में बंद कर रखा है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि उनकी जेलों में कुल 210 पाकिस्तानी कैदी हैं।

सूत्रों ने बताया कि भारत की जेलों में बंद पाकिस्तान के 145 नागरिकों और 14 मछुआरों का ब्योरा पाकिस्तान उच्चायोग को दिया गया है, जबकि शेष 65 कैदियों का सत्यापन किया जा रहा है। यह ब्योरा भी पाकिस्तान को जल्द ही मुहैया करा दिया जाएगा।

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