BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Wednesday, June 24, 2015

जरुर उस सांड को भी भूसे की गंध मिली होगी !दिल्ली में बारिश!


शाम को दिल्ली में बारिश हो रही थी , अब भी हो रही है रुक -रुक कर | हम सोचे चलो थोड़े रोमांटिक हो लें | बस निकल पड़े कमरे से | मुनिरका की सुंदर गलियों से होते हुए हम में मार्किट में पहुँच गए | पैरों में चन्दन लेप लग चुका था , कुछ छींटें पतलून पर भी लगी थीं | कूड़ेदान से आती महक ने वातावरण को और भी रोमांटिक बना दिया था | हम रुमाल भूल आये थे कमरे पर | दिल्ली मेट्रो का काम तेजी से परगति पर होने के कारण गड्ढों में और सड़क पर जमे हुए पानी में मैं अपना चेहरा साफ़ देख सकता था | 
उसी वक्त मेरी एक सहेली का फोन आ गया | पूछा क्या कर रहे हो ? मैंने कहा - नज़ारा देख रहे हूँ , मेरी दिल्ली , प्यारी दिल्ली | उसे खूब तेज हँसी आ गयी | वह फोन पर खिलखिला उठी | उसकी मीठी खिलखिलाहट में मैं इतना खो गया कि मैं यह भूल गया कि यहाँ भी सड़कों पर पहला अधिकार मेरे जैसे आवारा और बेरोजगार सांड, बैल और गौ माताओं का है | सूखे मौसम में सड़क पर उन्हें निश्चिंत बैठे जुगाली करते देख मुझे केजरीवाल के संघर्ष के दिन आते हैं | बड़ी से बड़ी गाड़ी के हार्न बजाने पर वे अपनी जगह से एक इंच भी नहीं खिसकते | बस फिर क्या था , एक मुस्टंडा ने आके पीछे सिंग ठोक दिया | मेरे कानों में सन्नता पसर गया और भय से मेरे पैर थिरकने लगे इस तरह जैसे अभी मैं हेमा जी की तरह कथक नृत्य करने लगूंगा | 
मैंने फोन काट दिया और वहां से भागना शुरू कर दिया | भागते -भागते सोचने लगा कि जरुर उस सांड को भी भूसे की गंध मिली होगी और मैंने अपना दिमाग खुजाना शुरू कर दिया | मुझे काशीनाथ सिंह जी के उपन्यास का दृश्य याद आ गया |

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