BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7

Published on 10 Mar 2013 ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH. http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM http://youtu.be/oLL-n6MrcoM

Friday, August 23, 2013

हुगली के आर पार फेरी घाटों की भी सुधि लें!

हुगली के आर पार फेरी घाटों की भी सुधि लें!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


कोलकाता तीन सौ साल पुराना शहर है तो हावड़ा की आयु पांच सौ पार है। उलबेड़िया को अंग्रेज पहले राजधानी बनाना चाहते थे, लेकिन मराठा आक्रमण के डर से उन्होंने कोलकाता को ही राजधानी बनाने का फैसला किया। तबसे हावड़ा उपेक्षित है।मशहूर  भारतीय उपन्यासकार और हावड़ा के पुराने वाशिंदे चौरंगी के लेखक शंकर ने कोलकाता से राजधानी हावड़ा ले जाने को क्रांतिकारी कदम बताते हुए बंगाल भर के नागरिकों से इस उपक्रम का समर्थन करने की अपील की है। उनके मुताबिक इससे कोलकाता केंद्रित विकास के बजाय जनपदों के विकास की दिशा बनेगी।


पिछले पांच सौ सालों में हावड़ा के लोग हुगली पार आने जाने के लिए नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं। हुगली के दोनों किनारे तेज शहरीकरण और औद्योगीकरण होने की वजह से हुगली के आर पार जाने के लिए फेरी घाट बनाये गये तमाम। इस दौरान हावड़ा ब्रिज यानी रवींद्र सेतु और बाली में विवेकानंद सेतु के अलावा कल्याणी तक नदी के आरपार जाने के लिए कोई पुल नहीं बना। नैहाटी के गरीफा पर जो जुबिली पुल है ,वह रेलयातायात के लिए है। हाल में विद्यासागर सेतु और कल्याणी में एक पुल का निर्माण जरुर हुआ है। लेकिन लंबा रास्ता पार करके इन पुलों के जरिये नदी किनारे की रोजर्रे की जिंदगी नहीं  चल सकती। इसलिए फेरीघाटों के जरिये नदी परिवहन की प्रासंगिकता बढ़ी ही है, घटी नहीं है। हावड़ा स्टेशन पहुंचने के लिए नित्ययात्री नदी पथ का खूब इस्तेमाल करते हैं। जबकि हुगली के दोनों किनारे बसे उपनगरों में जीवन इन्हीं फेरीघाटों के इर्द गिर्द चलता है। सालकिया तक पहुंचने के लि ए हावड़ा ब्रिज पार करके जीटी रोड पकड़ना दुस्वप्न के बराबर है। लोग सीधे आहिरीटोला से बांधाघाट चले जाते हैं। इसीतरह बैरकपुर के धोबीघाट और शेवड़ाफुली घाट के जरिये बड़ी संख्या में लोग आते जाते हैं।


विडंबना यह है कि इन फेरी घाटों की देखभाल और मरम्मत का ख्याल ही नहीं आता किसी को।मसलन बेलुड़ और बाग बाजार के बीच लंचसेवा बंद है। खास कोलकाता से हावड़ा जाने के लिए पक्की जेटी है। लेकिन बाकी जगह पानीहाटी और नैहाटी को छोड़कर कहीं भी पक्की जेटी नही ंहै।लंचसेवा पानीहाटी में भी नहीं है। बैरकपुर और चंदननगर जैसे बड़ी जगहो को जोड़ने के तमाम घाट कच्चे हैं। छोटी नावों में लोग साइकिल से लेकर मोटरसाइकिलें तक लाद कर चलते हैं। दूसरा सामान भी खूब होता है।

ओवरलोडिंग की निगरानी होती ही नहीं है। अक्सरहां ही बीच नदी में दुर्घटनाएं आम हैं। बेलुड़ और दक्षिणेश्वर के बीच तो जोखिम उठाकर छोटी नावें भी खूब चलती हैं।


नदी परिवहन को सुधारने की लंबे अरसे से चर्चा होती रहती है। लेकिन अभीतक इस दिसा में कुछ खास हुआ नहीं है। बरसात के दिनों में कच्चे घाटों से आवाजाही लोगों की मजबूरी है।वे जान हथेली पर लेकर चलते हैं।


हावड़ा में लोग दीदी के एचआरबीसी भवन में बैठने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। शंकर भी ुम्मीद जताते हैं कि सदियों से हावड़ा समेत जनपदों की जो भारी उपेक्षा हुई है, दीदी के इस कदम से उसका अंत जरुर होगा। वे शिकायत करते हैं कि हुगली के आरपार आने जाने के लिएपुलों का जाल बनना चाहिए था। लेकिन हावड़ा और हुगली किनारे बसे नगरों की आबादी की समस्याओं की ओर ध्यान दिये न जाने से ऐसा कुछ हुआ नहीं है।


पुल तो नये अब बनने के हालात है नहीं। लेकिन नदी परिवहन के विकल्प के बारे में दीदी जरुर सोच सकती है। कम से कम कच्चे घाटों को पक्का बनाने का काम हो सकता है। जहां लंचसेवा संभव है, वहा लंच सेवा होनीचाहिए। पानीहाटी में पक्की जेटी है , वहां से लंच सेवा शुरु की जा सकती है। बैरकपुर और चंदननगर जैसे बड़ें केंद्रों से लंच सेवा चालू करने के इंतजामात हो तो हावड़ा, हुगली और उत्तर 24 परगना के लोगों की किस्मत ही सुधर जायेगी।


No comments:

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...