BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE 7
Published on 10 Mar 2013
ALL INDIA BAMCEF UNIFICATION CONFERENCE HELD AT Dr.B. R. AMBEDKAR BHAVAN,DADAR,MUMBAI ON 2ND AND 3RD MARCH 2013. Mr.PALASH BISWAS (JOURNALIST -KOLKATA) DELIVERING HER SPEECH.
http://www.youtube.com/watch?v=oLL-n6MrcoM
http://youtu.be/oLL-n6MrcoM
Wednesday, March 7, 2012
और मुश्किल हुआ बजट बनाना। उससे भी ज्यादा मुश्किल है बाजार में सरकार की साख बनाये रखना!
और मुश्किल हुआ बजट बनाना। उससे भी ज्यादा मुश्किल है बाजार में सरकार की साख बनाये रखना!
मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
और मुश्किल हुआ बजट बनाना। उससे भी ज्यादा मुश्किल है बाजार में सरकार की साख बनाये रखना। पांच राज्यों के सदमे से उबरकर कांग्रेस और प्रणव मुखर्जी को बजट की तैयारी में फिर से जुट जाना है। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति चुनाव की चुनौतियों से भी निपटना है। बाजार में चुनाव नतीजों को लेकर जिसतरह की तीखी प्रतिक्रिया आयी है और आर्थिक सुधारों के ठप पड़ जाने की जो आशंका जताई जा रही है, उससे यूपीए के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब जनसमर्थन से ज्यादा बाजार और खारपोरेट जगत का सपोर्ट बनाये रखने की हैगी। तमाम वित्तीय कानून पास करने का जिगर चाहिए। कंपनी बिल, खनिज और भूधिग्रहण कानूनों, श्रम कानूनों में संशोधन करने होंगे। विनिवेश की गति तेज करनी होगी। मल्टी ब्रांड रिटेल एफडीआई पर अरसे से लंबित फैसला करना होगा। सब्सिडी खत्म करनी होगी। डीकंट्रोल की नीतियां अपनानी होगी। खुला बाजार को और खुला करना होगा। डीटीसी और जीएसटी को भी लागू करना होगा। भाजपा भी खुले बाजार और आर्थिक सुधारों के पक्ष में है। नेतृत्वहीनता की शिकार भाजपा को कांग्रेस की दिशाहीनता से नयी लाइफलाइन मिली है। उत्तराखंड में मुंह की खाने के बावजूद पंजाब और गोवा में कामयाबी और खासकर कोथोलिक समुदाय के नये समर्थन से कारपोरेट और बाजार के लिए नये विकल्प का दरवाजा खुल गया है। ये तमाम चुनौतियां प्रणव मुखर्जी के सामने है और वे बाजार की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करने की हालत में नहीं हैं।
भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट जारी है। दोपहर 2 बजे तक प्रमुख सूचकांक बीएसई 82.73 अंकों की गिरावट 17090.56 पर और एनएसई का निफ्टी 23.65 अंकों की गिरावट के साथ 5198.75 पर कारोबार कर रहा था।निवेशकों में जोश की कमी दिखी और बाजार सीमित दायरे में घूमते नजर आए। हालांकि यूरोपीय बाजारों के हल्की तेजी पर खुलने से घरेलू बाजारों में गिरावट कम हुई है। दोपहर 1:45 बजे, सेंसेक्स 85 अंक गिरकर 17088 और निफ्टी 23 अंक गिरकर 5199 के स्तर पर हैं। ऑयल एंड गैस, मेटल, कैपिटल गुड्स, पावर और सरकारी कंपनियों के शेयरों में 1.75-1 फीसदी की कमजोरी है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर 0.25 फीसदी गिरे हैं। बैंक शेयरों में मामूली गिरावट है। जिंदल स्टील, बीएचईएल, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.75-2.25 फीसदी टूटे हैं।
दूसरी ओर फेल युवराज राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी के मुकाबल मैदान में आ गये अखिलेश यादव। अगर वे यूपी के मुख्यमंत्री
बन गये, तो कांग्रेस के लिए उत्तर भारत में खोया हुआ जनाधार वापस पाना मुश्किल होगा। ओबीसी कोटे में मुसलमानों को आरक्षण देने का
शगूफा ुतत्र भारत में ओबीसी को गोलबंद करने और हिंदुत्व का मुलायम के हक में ध्रुवीकरण करने का काम कर गया। णा.ावती का दलित वोट बैंक कायम रहा , सो उन्हें इतनी सीटें मिल गयी और कांग्रेस या भाजपा जैसी उनकी चरम दुर्गति नहीं हुईऍ वक्त बदलने पर मुलायम की तरह वे भी वापसी कर सकते हैं। सबसे बड़ी त्रासदी कांग्रेस और राहुल गांधी की यह रही कि मुसलमान उनके बहकावे में नहीं आये और मायावती की हालत पतली देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों के शिकस्त देने के लिए सपा के साथ हो लिये। देखना है कि अखिलेश यादव के रुप में सपा का नया नेतृत्व इस जनाधार को कायम रख पाते हैं या नहीं। बहरहाल बाजार में तो कांग्रेस ौर यूपीए का बाजा बज गया। मुलायम तलिक कमजोर होते और कांग्रेस की हालत थोड़ी मजबूत होती तो यही बाजार बम बम करता। सपा संसदीय बोर्ड ने लगभग तय कर लिया है कि अखिलेश यादव को ही उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाए। बुधवार को लखनऊ में हुई बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई। बोर्ड में अखिलेश के नाम पर लगभग सहमति बन गई, लेकिन अंतिम फैसला मुलायम सिंह पर छोड़ दिया गया। 9 या 10 मार्च को विधायक दल की बैठक में अखिलेश के नाम पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। उसी दिन नाम सार्वजनिक किया जाएगा। करारी हार के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल बी . एल . जोशी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। पार्टी की हार के लिए कांग्रेस और बीजेपी को दोषी ठहराते हुए कहा मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी को बहुमत देने वाली प्रदेश की जनता को कुछ समय बाद अपने इस कदम पर पछतावा होगा।
पांच राज्यों के विधानसभा परिणाम आने के बाद अब केन्द्रीय बजट का स्वरूप बदला जाएगा। राजनीतिक आर्थिक विश्लेषक ही नहीं बल्कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का भी मानना है परिणाम का असर सम्पूर्ण आर्थिक नीतियों पर असर पड़ सकता है।वित्त मंत्रालय के अधिकारी पहले से ही इस बात को स्वीकार रहे थे कि परिणाम आने के बाद ही बजट की दिशा तय की जाएगी। इस बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से पश्चिमी देशों के कदमों को लेकर चिंता के बीच एशियाई कारोबार में तेल की कीमत में आज तेजी दर्ज की गई। न्यूयॉर्क का मुख्य अनुबंध वेस्ट टेक्सॉस इंटरमीडिएट क्रूड की कीमत अप्रैल डिलीवरी के लिए 40 सेंट्स बढ़कर 105.10 डॉलर प्रति बैरल रही। इसी प्रकार, ब्रेंट नार्थ-सी कच्चे तेल की कीमत अप्रैल डिलीवरी के लिए 50 सेंट्स बढ़कर 122.48 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गयी।
आज का कारोबार भारी उतार-चढ़ाव भरा रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में गिरावट की वजह से घरेलू बाजारों ने भी कमजोरी के साथ शुरुआत की। बैंक, मेटल, ऑयल एंड गैस और सरकारी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली की वजह से बाजार में गिरावट बढ़ी।
मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार 0.75 फीसदी कमजोर हैं। दोपहर 2:40 बजे, सेंसेक्स 127 अंक गिरकर 17046 और निफ्टी 34 अंक गिरकर 5188 के स्तर पर हैं।
मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में 2.5-2 फीसदी की गिरावट है। पावर, कैपिटल गुड्स और सरकारी कंपनियों के शेयर 1.5 फीसदी फिसले हैं। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी, बैंक शेयर 0.6-0.3 फीसदी कमजोर हैं। ऑटो शेयर भी गिरे हैं।
स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, बीएचईएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिंदल स्टील, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, एनटीपीसी 5-2 फीसदी टूटे हैं। टाटा स्टील, कोल इंडिया, एसबीआई, हिंडाल्को, एलएंडटी, ओएनजीसी, गेल, डीएलएफ, टाटा पावर 1.5-1 फीसदी गिरे हैं।
आईटी शेयरों में 0.75 फीसदी की तेजी है। हेल्थकेयर और तकनीकी शेयरों में 0.25 फीसदी की मजबूती है।
विप्रो 2 फीसदी चढ़ा है। बजाज ऑटो, इंफोसिस, एचयूएल, हीरो मोटोकॉर्प, टाटा मोटर्स 1-0.5 फीसदी मजबूत हैं।
छोटे शेयर 1 फीसदी और मझौले शेयर 0.5 फीसदी कमजोर हैं। छोटे शेयरों में किंगफिशर एयरलाइंस, इंडोरामा सिंथेटिक्स, ऑस्कर इंवेस्टमेंट, मैग्मा फिनकॉर्प, ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस 7-5.5 फीसदी टूटे हैं।
रक्षा बजट भी वित्तमंत्री के लिए चुनौती बन गया है। एक तो चीन का रक्षा बजट दोगुणा हुआ, और कांग्रेस को राज्यों में हार का मुंह देखना पड़ा। कमजोर हो चुकी कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उटाने से भाजपा चुकेगी नहीं। पर रक्षा बजट में बड़ोतरी के लिए किस किस मद में वित्तमंत्री कटौती कर पायेंगे, यह दिलचस्प है। सपा और तृणमूल कांग्रेस, नवीन पटनायक और जयललिता अलग सरदर्द हैं। उनकी तरफ से राज्यों की राजस्व में हिस्सेदारी बढ़ाने और राहत पैकेज देने की मांगें जोरदार होने की आशंका है। गौरतलब है कि थल सेनाध्यक्ष जनरल विजय कुमार सिंह ने रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी को चिट्ठी लिखी है। जनरल सिंह ने 10 महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए कहा है कि सेना की युद्ध क्षमता में लगातर गिरावट आ रही है। चिट्ठी में जनरल सिंह ने साफ किया है कि सेना के पास अब उतने गोला-बारूद नहीं हैं कि युद्ध के हालात में भारत मुकाबला कर पाए। चिट्ठी में सेना के आधुनिकिकरण में हो रही देरी की तरफ भी रक्षा मंत्री का ध्यान खींचा गया है। थल सेनाध्यक्ष ने हालांकि इन खबरों का खंडन कर दिया है पर मीडिया ने मसला इतना संगीन बना दिया है कि जनरल के कंडन करने से फर्क नहीं पड़ता। रक्षा बजट तो प्रणव बाबू को भयंकर राजकोषीय घाटे, कमजोर विकास दर और तीखे होते ईंधन संकट के बावजूद बढ़ाना ही होगा।
आम बजट 2012-13, रेल बजट 2012-13 और आर्थिक सर्वे 2011-12 की तारीखों का ऐलान हो गया है। जानकारों के मुताबिक वित्तीय घाटा बढ़ने से बाजार में तेज गिरावट आ सकती है। एसएंडपी के मुताबिक अगर सरकार ने वित्तीय घाटे, ग्रोथ के लिए जल्द कदम नहीं उठाए तो भारत की रेटिंग घट सकती है।साथ ही, नए बैंकिंग लाइसेंस देने का एलान भी बाजार को पसंद आएगा। हालांकि, बाजार को डर है कि फूड सब्सिडी और ऑयल सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा, जिससे वित्तीय घाटा और बढ़ सकता है।
रेल बजट 14 मार्च 2012 को रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा पेश किया जाएगा। दिनेश त्रिवेणी, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं, और 15वीं लोकसभा में पश्चिम बंगाल के बराकपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
15 मार्च 2012 को आर्थिक सर्वे 2011-12 संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी 16 मार्च 2012 को आम बजट 2012-13 पेश करेंगे।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के पास इस बजट में बेहद कम विकल्प हैं। यदि इस बजट में वह कर में छूट देते हैं तो भारत की लंबी अवधि में सुधार की संभावनाओं को जोखिम में डाल देंगे।वित्त मंत्री के सामने यब बड़ी चुनौती है कि वह इस बजट में आम आदमियों की अपेक्षाओं पर कैसे खरे उतरते हैं। वहीं आने वाली 16 मार्च को निवेशकों को की नजरें जीएसटी, डीटीसी और मल्टीब्रांड रिटेल में कम कम से 51 फीसदी एफडीआई पर होगी। वित्त मंत्रालय की ओर से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय कंपनियों द्वारा जारी कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदने की मंजूरी दिए जाने की चर्चा जोरों पर है।उम्मीद है कि इस बजट में मल्टीब्रैंड रिटेल में 51 फीसदी विदेशी निवेश को हरी झंडी मिल जाएगी। और इसी उम्मीद में विदेशी कंपनियां भारत में अपनी नींव मजबूत करने में जुट गई हैं।
माना जा रहा है कि इस साल डायरेक्ट टैक्स कोड लागू हो जाएगा।डीटीसी आए या नहीं आए, उसके कुछ प्रावधान तो इसमें शामिल किये जाने की बात चल ही रही है। डीटीसी के तहत कई प्रस्ताव हैं जिसका असर कामकाजी लोगों पर हो सकता है।डीटीसी के तहत टैक्स छूट का दायरा 1,00,000 रुपये से घटाकर 50,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। वहीं इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के तहत टैक्स छूट नहीं मिलेगी।पेशेवर समुदाय को सर्विस टैक्स से बाहर लाने की भी अलग दबाव है। ऐसे कई छोटे कारोबार करने वाले पेशेवर हैं, जो उन पर लादे गए सर्विस टैक्स के बोझ की वजह से नकदी में व्यापार करते हैं। वित्तीय रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए दायरा बढ़ाने की गुजारिश है।
सरकार वित्त वर्ष 2013 में विनिवेश से 50,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय कर सकती है। बजट के तहत विनिवेश के लक्ष्य में बढ़ोतरी का ऐलान मुमकिन है।जानकारों के मुताबिक अगर सरकार कोई नया टैक्स लाती है या टैक्स दरों में बढ़ोतरी करती है, तो इसका बाजार पर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन अगर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर खर्च बढ़ाती है, तो इसका फायदा बाजार को मिल सकता है।
सूत्रों का कहना है कि 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य में वित्त वर्ष 2012 के बाकी 27,000 करोड़ रुपये को भी शामिल किया जाएगा। वित्त वर्ष 2013 में बीएचईएल, सेल और आरआईएनएल में विनिवेश होने की उम्मीद है।शेयर बाजार को उम्मीद है कि बजट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) हट सकता है। शेयरों में ट्रांजैक्शन के लिए 0.125 फीसदी यानी 1000 रुपये पर 1.25 रुपये का एसटीटी देना पड़ता है। जानकारों का कहना है कि ट्रेडिंग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एसटीटी हटाया जाए।
इसके अलावा वित्त वर्ष 2013 के दौरान एनबीसीसी, एचएएल और हिंदुस्तान कॉपर में भी विनिवेश किए जाने की संभावना है।
हर तीन महीने पर गोता लगाने की वजह से कई निवेशक कंगाल हो गए, तो कई शेयर मार्केट के बेताज बादशाह बनकर उभरे। निवेशकों को ऐसा लगने लगा कि शेयर मार्केट में निवेश करना खुदकुशी करने जैसा ही है। इसलिए निवेशक चाहते हैं कि अगले वित्तीय बजट में ऐसा कुछ प्रावधान हो जिससे शेयर मार्केट में निवेशकों का विश्वास लौट सके।
मल्टीब्रैंड रिटेल में विदेशी निवेश की सीमा नहीं बढ़ने से नाखुश रिटेल इंडस्ट्री इस बार बजट में वित्त मंत्री से राहत की उम्मीद कर रही है। रिटेलर्स मांग कर रहे हैं कि वित्त मंत्री जीएसटी जल्द लागू करें और एपीएमसी एक्ट में बदलाव करें।
रिटेल सेक्टर को उम्मीद है कि इस बजट में मल्टीब्रैंड विदेशी निवेश पर सरकारी नीतियों में कुछ सफाई आ सकती है। उधर, सिंगल ब्रैंड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी के बावजूद अभी भी इंडस्ट्री में एसएमई से 30 फीसदी सोर्सिंग को लेकर दुविधा है, जिसे दूर करने की उम्मीद इंडस्ट्री को है। लेकिन रिटेल इंडस्ट्री की सबसे बड़ी मांग है जीएसटी जल्द लागू किया जाए।
करीब 2,700 करोड़ डॉलर का संगठित रिटेल सेक्टर सरकार से इंडस्ट्री स्टेटस मिलने की उम्मीद भी कर रहा है। रिटेल सेक्टर सरकार से एसईजेड की तर्ज पर आरईजेड यानी रिटेल एंटरटेनमेंट जोन बनाने की मांग कर रहा है जिनमें निवेश करने वाले रिटेलर्स को ऑट्रॉय, स्टैम्प ड्यूटी में छूट और सस्ती बिजली मिले। रिटेलर्स की ये भी मांग है कि सप्लाई चेन बनाने के लिए आयात किए जाने वाले उपकरणों पर ड्यूटी में छूट मिले। साथ ही, सरकार सेविंग के बजाए खपत बढ़ाने वाली पॉलिसी बनाए।
रिटेलर्स एपीएमसी एक्ट में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं, ताकि सीधे किसानों से खरीद आसान हो। इसके अलावा इसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत स्टॉक लिमिट की सीमा बढ़ाने की मांग भी रिटेलर्स कर रहे हैं। अब देखना है कि वित्त मंत्री 16 मार्च को रिटेलर्स की कितनी उम्मीदों पर खरा उतरते हैं।
सरकार खाने के तेल पर बेसिक टैरिफ वैल्यू बढ़ा सकती है ताकि खाने के तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सके। सीएनबीसी आवाज की एक्सक्लूसिव खबर के मुताबिक खाने के तेल पर बेसिक टैरिफ वैल्यू बढ़ाने का ऐलान बजट में किया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि बजट में संभावनाएं हैं कि खाने के तेल पर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है। फिलहाल खाने के तले पर 7.73 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। घरेलू एडिबल ऑयल इंडस्ट्री की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 16.5 फीसदी करने की मांग है।
वहीं खाने के तेल का बेसिक टैरिफ वैल्यू 484 डॉलर प्रति टन से ज्यादा होने की उम्मीद है। दरअसल बेसिक टैरिफ वैल्यू के आधार पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। फिलहाल भारत में घरेलू जरूरतों का 50 फीसदी खाने का तेल आयात किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक कच्चे पाम तेल पर भी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ सकती है। लेकिन सोया रिफाइंड पर ड्यूटी बढ़ने की संभावना नहीं है।
भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों को भले ही खुलकर कारोबार करने की इजाजत नहीं मिली है। लेकिन बैक एंड में जोरदार जंग शुरू हो चुकी है। मेट्रो, कारफोर और वॉलमार्ट जैसी विदेशी कंपनियां अपनी कैश एंड कैरी बिजनेस पर तेजी से काम कर रही हैं। देश में फिलहाल कैश एंड कैरी के लगभग 30 स्टोर खोले जा चुके है। और इसी साल 32 नए स्टोर खोलने की योजना है।
वॉलमार्ट 10-12 स्टोर खोलने की तैयारी में जुटा है। वहीं फ्रेंच कंपनी कारफोर की 10 स्टोर खोलने का प्लानिंग है। जाहिर है इनकी नजर आने वाले वक्त पर है। कंपनियों ने निवेश की भी लंबी चौड़ी योजना बना ली है। जर्मन कंपनी मेट्रो ने इस साल करीब 550 करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा है।
एक अनुमान के मुताबिक कैश एंड कैरी बिजनेस के एक स्टोर को जमाने के लिए लगभग 70-80 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसका मतलब है कि ये कंपनियां भारत में करीब 1 अरब डॉलर लगा चुकी है। और अगले 2-3 साल में ये निवेश बढ़कर 3 अरब डॉलर तक जा सकता है। ऐसे में भारत में कैश एंड कैरी बिजनेस करीब 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
दरअसल विदेशी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी की खास वजह भी है। कंपनियों को उम्मीद है सरकार बजट के बाद मल्टीब्रैंड रिटेल में एफडीआई में छूट दे सकती है। ऐसे में कंपनियां रिटेल के कारोबार में उतरने से पहले होलसेल यानि कैश एंड कैरी बिजनेस में अपनी पकड़ मजबुत बना लेना चाहती है।
बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद वह मीडिया से रूबरू हुईं।उन्होंने बीते पांच साल में प्रदेश का विकास करने का दावा किया और बसपा की करारी हार के कारण गिनाए। मायावती ने जो कहा, वह शब्दश: यह है...
उत्तर प्रदेश के नतीजे घोषित हो चुके हैं और ये हमारी पार्टी के अनुकूल न आने के कारण आज मैंने विधान सभा भंग करने की सिफारिश करने के साथ-साथ अपने मुख्यमंत्री के पद से भी इस्तीफा महामहिम राज्यपाल को सौंप दिया है। हालांकि मेरी इस सरकार के बारे में वैसे आप लोगों को ये भी मालूम है कि मैंने सन 2007 में हर स्तर पर कितनी ज्यादा खराब हालातों में प्रदेश की सत्ता अपने हाथों में ली थी, जिन्हें सुधारने में मेरी सरकार को काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ी है जबकि इस मामले में मेरी सरकार को सहयोग देने में विरोधी पार्टियों की तरह केंद्र सरकार का भी रवैया ज्यादातर नकारात्मक रहा है। इस सबके बावजूद भी मेरी सरकार ने अपनी पार्टी की सर्वजन-हिताय व सर्वजन-सुखाय की नीति के आधार पर चलकर यहां विकास व कानून व्यवस्था के साथ-साथ सर्व समाज में गरीबों, मजदूरों, छात्रायों, कर्मचारियों आदि के हितों के लिए हर मामले में व हर स्तर पर महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कार्य किए हैं। प्रदेश में बिजली की खराब स्थिति को सुधारने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं जिनका फायदा 2014 तक प्रदेश की जनता को मिल जाएगा।
दुख की बात यह है कि प्रदेश में अब सत्ता ऐसी पार्टी के हाथों में आ रही है जो सभी विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डालकर एक बार फिर प्रदेश को कई वर्ष पीछे ले जाएगी। इसके लिए हमारी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के गलत स्टैंड को ही जिम्मेदार मानकर चलती है। इस बारे में आप लोगों को यह भी मालूम है कि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में विधानसभा आम चुनाव घोषित होने के तुंरत बाद ही अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जब मुस्लिम समाज के पिछड़े हुए लोगों को ओबीसी के कोटे में से आरक्षण देने के बात कही तब बीजेपी ने उसका काफी डटकर विरोध किया था। इतना ही नहीं बल्कि इस मुद्दे की आड़ में बीजेपी ने भी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए प्रदेश में अग्रणी समाज के साथ-साथ ओबीसी वोटों को भी अपने ओर खींचने की कोशिश की थी जिसके बाद प्रदेश के मुस्लिम समाज को यह डर सताने लगा था कि कहीं प्रदेश में फिर बीजेपी की सत्ता न आ जाए। इसी स्थिति में कांग्रेस को कमजोर देखते हुए, आरक्षण के मुद्दे पर बीएसपी से अपर कास्ट समाज व पिछडे़ वोटों को बीजेपी में जाने के डर से मुस्लिम समाज ने सपा को वोट किया। इसी कारण से प्रदेश के मुसलिम समाज ने कांग्रेस और बसपा को अपना वोट न देकर अपना 70 फीसदी वोट इकतरफा तौर पर सपा को दे दिया। यही कारण है कि सिर्फ मुसलिम वोटों के कारण ही सपा के ओबीसी, अग्रणी समाज और अन्य समुदायों के लोगों का वोट भी जुड़ जाने के कारण सपा के प्रत्याशी चुनाव जीते। मुसलिम बाहुल्य सीटों पर सपा के मुसलमान उम्मीदवार इस बार आसानी से चुनाव जीत गए।
प्रदेश में दलितों के वर्ग को छोड़कर ज्यादातर हिंदू समाज में से खास तौर पर अपर कास्ट समाज का वोट कई पार्टियों में बंट जाने के कारण सपा के उम्मीदवारों को ही मिला। कुछ अपर कास्ट हिंदू वोट बसपा को मिले, कुछ कांग्रेस को और बाकी बीजेपी को मिला। अपर कास्ट समाज का वोट बंटने के बाद सपा के समर्थन में परिणाम आने के बाद से प्रदेश का अग्रणी हिंदू समाज दुखी महसूस कर रहा है।
लेकिन फिर भी हमारी पार्टी के लिए इस चुनाव में पहले से भी ज्यादा संतोष की बात यह रही है कि विरोधी पार्टियों के हिंदू-मुस्लिम वोटों के चक्कर में बीएसपी का अपना दलित बेस वोट बिलकुल भी नहीं बंटा है। दलित वर्ग के लोगों ने पूरे प्रदेश में अपना इकतरफा वोट बीएसपी के उम्मीदवारों को दिया है। इसी कारण हमारी पार्टी इस चुनाव में दूसरे नंबर पर बनी रही। वरना हमारी पार्टी बहुत पीछे चली जाती। मैं अपने दलित समाज के लोगों का दिल से धन्यवाद और आभार प्रकट करती हूं। इसके साथ-साथ मैं अपनी पार्टी से जुड़े मुस्लिम समाज व अन्य पिछड़ा वर्ग और अग्रणी जाति समाज के उन लोगों का भी दिल से शुक्रिया अदा करती हूं जो इस चुनाव में किसी भी लहर में गुमराह नहीं हुए और बहकावे में नहीं आए और हमारी पार्टी से जुड़े रहे। हमारी पार्टी में सर्वसमाज के 80 उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं।
इसके साथ ही यहां मैं यह भी कहना चाहती हूं कि अब हमारी पार्टी दलितों की तरह यहां प्रदेश में अन्य सभी समाज के लोगों को भी कैडर के जरिए हिंदू-मुसमिल मानसिकता से बाहर निकालने की भी पूरी-पूरी कोशिश करेगी ताकि इस बार के चुनव की तरह आगे अन्य किसी भी चुनाव में हमारी पार्टी को इस तरह का कोई भी नुकसान न पहुंच सके। अंत में मेरा यही कहना है कि अब प्रदेश की जनता बहुत जल्द ही सपा की कार्यशैली से तंग आकर, जिसकी शुरुआत कल से हो चुकी है, बीएसपी के सुशासन को जरूर याद करेगी और मुझे यह पूरा भरोसा है कि अगली बार प्रदेश की जनता फिर से बसपा को पूर्ण बहुमत से सत्ता में लाएगी।
मैं प्रदेश की पुलिस और प्रशासन से जुड़े सभी छोटे बड़े अधिकारियों का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं, पूरी अवधि में उन्होंने मुझे सरकार चलाने में सहयोग किया और 2009 के लोकसभा चुनाव और प्रदेश में 2012 के आम चुनाव करवाने में सहयोग का भी आभार प्रकट करती हूं। भ्रष्टाचार का मेरे शासन के जाने से कोई लेना देना नहीं है। बसपा को मुसलिम वोटों के ध्रविकरण के कारण नुकसान पहुंचा। कांग्रेस और बीजेपी और मीडिया जिम्मेदार हैं। प्रदेश की जनता के साथ अब जो भी होगा उसके लिए जनता कांग्रेस और बीजेपी के साथ-साथ मीडिया को भी कोसेगी।
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